NCERT कक्षा 10 विज्ञान – अध्याय 7: जीव जनन कैसे करते हैं?

NCERT कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 7: जीव जनन कैसे करते हैं? (How do Organisms Reproduce?) – विस्तृत नोट्स

NCERT कक्षा 10 विज्ञान – अध्याय 7: जीव जनन कैसे करते हैं?

(सम्पूर्ण विस्तृत गाइड: अवधारणा, नोट्स, प्रश्नोत्तर और परीक्षा टिप्स)

विषय सूची

  1. परिचय: जनन क्यों आवश्यक है?
  2. क्या जीव अपनी यथार्थ प्रतिलिपि (Copy) बनाते हैं?
  3. एकल जीवों में प्रजनन की विधियाँ (अलैंगिक जनन)
  4. लैंगिक जनन: आवश्यकता और महत्व
  5. पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन
  6. मानव में जनन (नर एवं मादा जनन तंत्र)
  7. ऋतुस्राव (Menstruation) क्या है?
  8. जनन स्वास्थ्य और परिवार नियोजन
  9. बोर्ड परीक्षा विशेष: प्रश्न और रणनीतियाँ

1. परिचय: जनन क्यों आवश्यक है?

नमस्ते प्रिय विद्यार्थियों! कक्षा 10 विज्ञान का यह अध्याय न केवल जीव विज्ञान का सबसे विस्तृत अध्याय है, बल्कि बोर्ड परीक्षा में इसका भारांक (Weightage) भी बहुत अधिक है।

सबसे पहले एक बुनियादी प्रश्न: जीव जनन क्यों करते हैं?
पोषण, श्वसन या उत्सर्जन के विपरीत, ‘जनन’ किसी जीव के जीवित रहने के लिए आवश्यक नहीं है। यदि कोई जीव जनन न भी करे, तो भी वह जीवित रह सकता है। लेकिन, किसी स्पीशीज़ (Species/जाति) के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए जनन अनिवार्य है। यदि जनन नहीं होगा, तो वह प्रजाति पृथ्वी से लुप्त हो जाएगी।

अतः, जनन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा सजीव अपने जैसे नए जीवों का निर्माण करते हैं ताकि उनकी पीढ़ी दर पीढ़ी निरंतरता बनी रहे।


2. क्या जीव अपनी यथार्थ प्रतिलिपि (Exact Copy) बनाते हैं?

डी.एन.ए. (DNA) की भूमिका

जनन की मूल घटना है: DNA की प्रतिकृति (Copy) बनाना।
कोशिका के केंद्रक (Nucleus) में DNA (Deoxyribo Nucleic Acid) होता है। यह अनुवांशिक गुणों का ब्लूप्रिंट है।

  1. जनन के दौरान कोशिका अपने DNA की दो प्रतियाँ बनाती है।
  2. इसके साथ ही दूसरी कोशिकीय संरचनाएं भी बनती हैं।
  3. अंत में, कोशिका विभाजित होकर दो नई कोशिकाएं बनाती है।

विभिन्नता (Variation) का महत्व

क्या बनने वाली दोनों कोशिकाएं बिल्कुल एक जैसी होती हैं?
वे समरूप (Similar) होती हैं, लेकिन सर्वसम (Identical) नहीं। DNA कॉपी करने की प्रक्रिया में कुछ न कुछ त्रुटियाँ या बदलाव हो जाते हैं। यही बदलाव विभिन्नता (Variation) कहलाते हैं।

विभिन्नता क्यों जरूरी है? (बोर्ड का महत्वपूर्ण प्रश्न)
विभिन्नता किसी स्पीशीज़ की ‘उत्तरजीविता’ (Survival) के लिए जरूरी है।
उदाहरण (NCERT): मान लीजिए जीवाणुओं की एक आबादी सामान्य तापमान वाले पानी में रहती है। यदि वैश्विक उष्मीकरण (Global Warming) के कारण पानी का तापमान अचानक बढ़ जाए, तो वे जीवाणु मर जाएंगे। लेकिन, यदि उनमें से कुछ जीवाणुओं में ‘गर्मी झेलने की विभिन्नता’ (Heat resistance) होगी, तो केवल वे ही जीवित बचेंगे और अपनी प्रजाति को आगे बढ़ाएंगे। अतः विभिन्नता प्रजातियों को बदलते पर्यावरण में जीवित रहने में मदद करती है।


3. एकल जीवों में प्रजनन की विधियाँ (अलैंगिक जनन)

जब एक अकेला जनक (Single Parent) बिना किसी दूसरे जीव की सहायता के नए जीव को जन्म देता है, तो उसे अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction) कहते हैं। इसकी मुख्य विधियाँ निम्नलिखित हैं:

(क) विखंडन (Fission)

एककोशिकीय जीवों में कोशिका विभाजन द्वारा नए जीवों की उत्पत्ति।

  • द्विखंडन (Binary Fission): जीव दो बराबर भागों में बंट जाता है।
    उदाहरण 1: अमीबा (Amoeba) – यह किसी भी तल (Plane) से विभाजित हो सकता है।
    उदाहरण 2: लेश्मानिया (Leishmania) – कालाजार का रोगाणु। इसमें एक सिरे पर कोड़े जैसी संरचना (कशाभिका) होती है, इसलिए इसमें विभाजन एक निश्चित तल से होता है।
  • बहुखंडन (Multiple Fission): एक कोशिका कई संतति कोशिकाओं में विभाजित हो जाती है।
    उदाहरण: प्लाज्मोडियम (Plasmodium) – मलेरिया परजीवी। प्रतिकूल परिस्थितियों में इसके चारों ओर एक पुटी (Cyst) बन जाती है और अंदर कोशिका कई बार विभाजित होती है।

(ख) खंडन (Fragmentation)

बहुकोशिकीय जीव (जिनकी संरचना सरल है) परिपक्व होने पर छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाते हैं। प्रत्येक टुकड़ा नया जीव बन जाता है।
उदाहरण: स्पाइरोगाइरा (Spirogyra)
नोट: यह जटिल जीवों (जैसे मानव या कुत्ता) में संभव नहीं है क्योंकि उनकी कोशिकाएं विशेष ऊतक और अंगों में संगठित होती हैं।

(ग) पुनरुद्भवन / पुनर्जनन (Regeneration)

यदि किसी पूर्ण रूप से विभेदित जीव को टुकड़ों में काट दिया जाए, तो प्रत्येक टुकड़ा अपने खोए हुए भागों को दोबारा विकसित कर लेता है।
उदाहरण: हाइड्रा (Hydra) और प्लेनेरिया (Planaria)
यह जनन के समान नहीं है, क्योंकि कोई भी जीव खुद को काटकर जनन करने की योजना नहीं बनाता। यह विशेष कोशिकाओं द्वारा होता है जो तेजी से विभाजित होकर ऊतक बनाती हैं।

(घ) मुकुलन (Budding)

जीव के शरीर पर एक उभार (Outgrowth) निकल आता है जिसे ‘मुकुल’ (Bud) कहते हैं। यह विकसित होकर नन्हा जीव बनता है और बाद में जनक से अलग हो जाता है।
उदाहरण: हाइड्रा और यीस्ट (Yeast)
(परीक्षा टिप: हाइड्रा में मुकुलन और पुनर्जनन दोनों होते हैं।)

(ङ) बीजाणु समासंग (Spore Formation)

कुछ जीवों में धागे जैसी संरचनाएं (कवक तंतु) होती हैं जिनके ऊपर गोल संरचनाएं (बीजाणुधानी) होती हैं। इनमें विशेष कोशिकाएं या ‘बीजाणु’ (Spores) होते हैं। ये बीजाणु हवा में बिखर जाते हैं। इनके चारों ओर एक मोटी भित्ति होती है जो इन्हें प्रतिकूल परिस्थितियों (गर्मी, सूखा) से बचाती है। नमी मिलने पर ये अंकुरित हो जाते हैं।
उदाहरण: राइजोपस (Rhizopus) – ब्रेड पर लगने वाली फफूँद।

(च) कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation)

पौधों के कायिक भागों (जड़, तना, पत्ती) से नए पौधे उगाना।

  • प्राकृतिक विधियाँ:
    • पत्ती द्वारा: ब्रायोफिलम (Bryophyllum) की पत्तियों के किनारों पर कलिकाएं होती हैं जो गिरकर नया पौधा बनाती हैं।
    • तना द्वारा: आलू (आँखें/कलिकाएं), अदरक।
    • जड़ द्वारा: शकरकंद, डहेलिया।
  • कृत्रिम विधियाँ: कलम लगाना (गुलाब), रोपण (आम), लेयरिंग (चमेली)।

कायिक प्रवर्धन के लाभ (महत्वपूर्ण):

  1. जिन पौधों ने बीज बनाने की क्षमता खो दी है (जैसे केला, संतरा, गुलाब), वे इससे उगाए जा सकते हैं।
  2. नये पौधे आनुवंशिक रूप से जनक के बिल्कुल समान होते हैं (गुण सुरक्षित रहते हैं)।
  3. बीज की तुलना में इनसे पौधे जल्दी उगते हैं और फल-फूल जल्दी आते हैं।

ऊतक संवर्धन (Tissue Culture): पौधे के ऊतक या कोशिकाओं को निकालकर कृत्रिम माध्यम में रखकर नए पौधे उगाना। इसका उपयोग सजावटी पौधों के लिए अधिक होता है।


4. लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)

जब जनन प्रक्रिया में दो जनक (नर और मादा) भाग लेते हैं, तो इसे लैंगिक जनन कहते हैं।

इसकी आवश्यकता क्यों है?
अलैंगिक जनन में विभिन्नता कम होती है। लैंगिक जनन में दो अलग-अलग जीवों का DNA मिलता है, जिससे बहुत अधिक विभिन्नता (Variation) उत्पन्न होती है। यह विभिन्नता विकास (Evolution) और प्रजाति की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


5. पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन

पुष्प की संरचना

पुष्प पौधे का जनन अंग है। इसके मुख्य भाग हैं:

  • बाह्यदल (Sepals): हरे रंग की पत्तियां, कली की रक्षा करती हैं।
  • पंखुड़ी (Petals): रंगीन भाग, कीटों को आकर्षित करते हैं।
  • पुंकेसर (Stamen) – नर जनन भाग: इसके शीर्ष पर ‘परागकोष’ (Anther) होता है, जिसमें पीले रंग के परागकण (Pollen grains) बनते हैं।
  • स्त्रीकेसर (Carpel/Pistil) – मादा जनन भाग: यह फूल के केंद्र में होता है। इसके तीन भाग हैं:
    1. अंडाशय (Ovary): निचला फूला हुआ भाग। इसमें बीजांड (Ovules) होते हैं।
    2. वर्तिका (Style): मध्य का लंबा भाग।
    3. वर्तिकाग्र (Stigma): सबसे ऊपरी चिपचिपा भाग, जो परागकणों को ग्रहण करता है।

परागण (Pollination)

परागकणों का पुंकेसर से स्त्रीकेसर के वर्तिकाग्र तक पहुँचने की क्रिया।

  • स्व-परागण (Self-pollination): उसी फूल के या उसी पौधे के दूसरे फूल के वर्तिकाग्र पर जाना।
  • पर-परागण (Cross-pollination): एक पौधे के फूल से दूसरे पौधे के फूल पर जाना (हवा, जल या जंतुओं द्वारा)। यह विकास के लिए बेहतर है।

निषेचन (Fertilization) और बीज निर्माण

यह प्रक्रिया बोर्ड परीक्षा में अक्सर चित्र सहित पूछी जाती है:

  1. परागकण वर्तिकाग्र पर गिरता है और अंकुरित होता है।
  2. उससे एक पराग नलिका (Pollen Tube) निकलती है जो वर्तिका से होती हुई अंडाशय तक पहुँचती है।
  3. पराग नलिका में नर युग्मक (Male Gamete) होते हैं।
  4. नर युग्मक अंडाशय के अंदर बीजांड में स्थित मादा युग्मक (अण्ड कोशिका) से मिलता है। इसे निषेचन कहते हैं।
  5. निषेचन के बाद बना युग्मनज (Zygote) विभाजित होकर भ्रूण (Embryo) बनाता है।
  6. बीजांड (Ovule) कठोर होकर बीज (Seed) में बदल जाता है।
  7. अंडाशय (Ovary) पककर फल (Fruit) बन जाता है। (बाकी भाग जैसे पंखुड़ियाँ गिर जाती हैं)।

6. मानव में जनन (Reproduction in Human Beings)

मानव में लैंगिक परिपक्वता एक निश्चित आयु के बाद आती है, जिसे किशोरावस्था (Puberty) कहते हैं।

यौवनारंभ के परिवर्तन:

  • साझा परिवर्तन: कांख और जननांगों के पास बाल आना, त्वचा का तैलीय होना, मुँहासे।
  • लड़कों में: आवाज का भारी होना, दाढ़ी-मूंछ आना, लिंग का आकार बढ़ना।
  • लड़कियों में: स्तन के आकार में वृद्धि, जननांगों का गहरा होना, ऋतुस्राव (Periods) का शुरू होना।

(क) नर जनन तंत्र (Male Reproductive System)

इसके मुख्य भाग और कार्य निम्नलिखित हैं:

  1. वृषण (Testis):
    • ये उदर गुहा के बाहर ‘वृषण कोष’ (Scrotum) में स्थित होते हैं।
    • कारण (Imp): शुक्राणु निर्माण के लिए शरीर के तापमान से 2-3°C कम तापमान की आवश्यकता होती है।
    • कार्य: शुक्राणु (Sperms) बनाना और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन स्रावित करना।
  2. शुक्रवाहिनी (Vas deferens): शुक्राणुओं को वृषण से मूत्रमार्ग तक ले जाती है।
  3. ग्रंथियाँ (प्रोस्टेट और शुक्राशय): ये अपना स्राव शुक्राणुओं में मिलाते हैं। इससे शुक्राणु तरल माध्यम (वीर्य/Semen) में आ जाते हैं, जिससे उनका स्थानांतरण आसान होता है और उन्हें पोषण भी मिलता है।
  4. मूत्रमार्ग (Urethra): यह मूत्र और वीर्य दोनों के बाहर निकलने का एक ही रास्ता है।

(ख) मादा जनन तंत्र (Female Reproductive System)

  1. अंडाशय (Ovary):
    • मादा युग्मक (अण्ड कोशिका/Egg) बनाती हैं।
    • एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बनाती हैं।
    • लड़की के जन्म के समय ही अंडाशय में हजारों अपरिपक्व अंडे होते हैं। यौवनारंभ पर हर महीने एक अंडा परिपक्व होकर निकलता है।
  2. अण्डवाहिका / फैलोपियन ट्यूब (Oviduct):
    • यह अंडे को गर्भाशय तक ले जाती है।
    • महत्वपूर्ण: निषेचन (Fertilization) की क्रिया यहीं (फैलोपियन ट्यूब में) होती है।
  3. गर्भाशय (Uterus): यह नाशपाती के आकार का थैला है जहाँ शिशु का विकास होता है।
  4. ग्रीवा (Cervix) और योनि (Vagina): शुक्राणु प्रवेश और शिशु जन्म का मार्ग।

निषेचन से जन्म तक

  1. मैथुन के दौरान शुक्राणु योनि में प्रवेश करते हैं और ऊपर की ओर तैरते हुए अण्डवाहिका तक पहुँचते हैं।
  2. वहाँ शुक्राणु और अंडा मिल जाते हैं (निषेचन) और ‘युग्मनज’ (Zygote) बनता है।
  3. युग्मनज विभाजित होकर कोशिकाओं की गेंद (भ्रूण) बनाता है और गर्भाशय की दीवार में स्थापित (Implant) हो जाता है।
  4. प्लेसेंटा (Placenta/अपरा): यह भ्रूण और माँ के शरीर के बीच एक तश्तरी जैसी संरचना है।
    कार्य: माँ के रक्त से भ्रूण को पोषण (ग्लूकोज, ऑक्सीजन) देना और भ्रूण के अपशिष्ट पदार्थों को माँ के रक्त में डालना।
  5. मानव में गर्भकाल लगभग 9 महीने का होता है।

7. ऋतुस्राव (Menstruation) क्या है?

यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण टॉपिक है।
क्या होता है जब अंड का निषेचन नहीं होता?

  • गर्भाशय हर महीने भ्रूण को ग्रहण करने के लिए खुद को तैयार करता है। इसकी भीतरी परत (Lining) मोटी, स्पंजी और रक्त से भरपूर हो जाती है।
  • यदि निषेचन नहीं होता, तो इस परत की आवश्यकता नहीं रहती।
  • अतः यह परत धीरे-धीरे टूट कर योनि मार्ग से रक्त और म्यूकस (श्लेष्मा) के रूप में बाहर निकलती है।
  • इस चक्र को मासिक धर्म या ऋतुस्राव कहते हैं। यह 2 से 8 दिनों तक चलता है और हर 28-30 दिनों में दोहराया जाता है।

8. जनन स्वास्थ्य और परिवार नियोजन

यौन संचारित रोग (STDs)

असुरक्षित यौन संबंधों से फैलने वाले रोग:

  • जीवाणु जनित (Bacterial): गोनोरिया (Gonorrhoea) और सिफलिस (Syphilis)।
  • विषाणु जनित (Viral): मस्सा (Warts) और HIV-AIDS।

गर्भनिरोधक विधियाँ (Contraception)

गर्भधारण को रोकने के उपाय। यह जनसंख्या नियंत्रण और स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।

विधि का नाम उदाहरण / विवरण विशेषता
यांत्रिक अवरोध (Barrier Method) कंडोम (Condom), डायफ्राम। यह शुक्राणु और अंडे को मिलने से रोकता है। कंडोम STDs से भी बचाता है।
रासायनिक विधि (Chemical) मुख से लेने वाली गोलियाँ (Oral Pills)। ये हार्मोन संतुलन बदल देती हैं ताकि अंडा न निकले। इसके दुष्प्रभाव (Side effects) हो सकते हैं।
IUCD (Intra Uterine Contraceptive Device) कॉपर-टी (Copper-T)। इसे डॉक्टर द्वारा गर्भाशय में लगाया जाता है।
शल्य क्रिया (Surgical Method) नसबंदी (Vasectomy – पुरुषों में शुक्रवाहिनी काटना), ट्यूबेक्टमी (Tubectomy – महिलाओं में अण्डवाहिका काटना)। यह स्थायी तरीका है।

भ्रूण हत्या (Female Foeticide):

अल्ट्रासाउंड द्वारा जन्म से पहले लिंग का पता लगाना और मादा भ्रूण को मार देना अपराध है। इससे समाज में लिंग अनुपात (Sex Ratio) बिगड़ रहा है।


9. बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु

महत्वपूर्ण परिभाषाएँ

  • युग्मनज (Zygote): नर और मादा युग्मक के संलयन से बनी एकल कोशिका।
  • यौवनारंभ (Puberty): वह आयु जब जनन ऊतक परिपक्व होने लगते हैं।
  • परागण (Pollination): परागकणों का परागकोष से वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण।
  • निषेचन (Fertilization): नर और मादा युग्मक का मिलन।

महत्वपूर्ण आरेख (Diagrams to Practice)

बोर्ड परीक्षा में इन 4 चित्रों का अभ्यास अनिवार्य है:

  1. पुष्प की अनुदैर्ध्य काट: (पुंकेसर और स्त्रीकेसर को स्पष्ट दिखाएं)।
  2. पुष्प में निषेचन (पराग नलिका का बीजांड में प्रवेश): सबसे महत्वपूर्ण।
  3. मानव नर जनन तंत्र।
  4. मानव मादा जनन तंत्र।

पिछले वर्षों के प्रश्नों का फोकस

अंक संभावित प्रश्न
1 अंक (MCQ)
  • परागकोष में क्या होता है? (परागकण)
  • मानव में निषेचन कहाँ होता है? (अण्डवाहिका/Fallopian tube)
  • अमीबा में जनन विधि।
  • IUCD का पूरा नाम।
2 अंक (लघु)
  • स्व-परागण और पर-परागण में अंतर।
  • DNA प्रतिकृति का महत्व।
  • प्लेसेंटा के दो कार्य लिखिए।
  • वृषण उदर गुहा के बाहर क्यों होते हैं?
3 अंक (लघु)
  • “कायिक प्रवर्धन के तीन लाभ लिखिए।”
  • “ऋतुस्राव क्यों होता है?” (तर्क सहित समझाइए)।
  • गर्भनिरोधक की विभिन्न विधियों का वर्णन करें।
5 अंक (दीर्घ)
  • मानव मादा जनन तंत्र का नामांकित चित्र बनाएँ और निषेचन प्रक्रिया समझाएँ।
  • पुष्प में निषेचन से लेकर फल बनने तक की प्रक्रिया का सचित्र वर्णन करें।

NCERT अभ्यास एवं इन-टेक्स्ट प्रश्न रणनीति

अति महत्वपूर्ण प्रश्न:

  • “एककोशिकीय एवं बहुकोशिकीय जीवों की जनन पद्धति में क्या अंतर है?”
  • “शुक्राशय एवं प्रोस्टेट ग्रंथि की क्या भूमिका है?”
  • “माँ के शरीर में गर्भस्थ भ्रूण को पोषण किस प्रकार प्राप्त होता है?” (प्लेसेंटा वाला उत्तर)।
  • “गर्भनिरोधक युक्तियाँ अपनाने के क्या कारण हो सकते हैं?”

उत्तर लिखने की टिप:

जीव विज्ञान में ‘क्यों’ और ‘कैसे’ वाले प्रश्नों में तर्क (Reasoning) देना जरूरी है। जैसे- “वृषण बाहर होते हैं, क्योंकि शुक्राणु बनने के लिए कम तापमान चाहिए।” इस ‘क्योंकि’ के बाद वाले हिस्से पर ही अंक मिलते हैं।

त्वरित पुनरावृत्ति नोट्स (Quick Revision)

  • अमीबा: द्विखंडन। प्लाज्मोडियम: बहुखंडन। हाइड्रा: मुकुलन। ब्रायोफिलम: पत्ती द्वारा।
  • पुष्प: पौधे का जनन अंग। पुंकेसर (नर), स्त्रीकेसर (मादा)।
  • बीज: भावी पौधा (भ्रूण) होता है।
  • नर हार्मोन: टेस्टोस्टेरोन। मादा हार्मोन: एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन।
  • निषेचन स्थल: अण्डवाहिका (Fallopian tube)।
  • कॉपर-टी: गर्भाशय में लगाई जाती है, गर्भ रोकती है पर रोगों से नहीं बचाती।
  • कंडोम: गर्भ और रोग (STDs) दोनों से बचाता है।

निष्कर्ष

प्रिय विद्यार्थियों, ‘जीव जनन कैसे करते हैं’ अध्याय न केवल परीक्षा के लिए, बल्कि जीवन को समझने के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह हमें बताता है कि जीवन कितना जटिल और सुंदर है। यौन स्वास्थ्य और किशोरावस्था से जुड़े विषयों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझें।

सफलता का सूत्र: “चित्रों (Diagrams) पर पकड़ मजबूत करें और प्रजनन तंत्र के हर भाग का कार्य (Function) याद रखें।” बोर्ड परीक्षा के लिए आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

yadavmanikant141@gmail.com
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नमस्कार! मैं हूँ SelfShiksha का संस्थापक, और मेरा मकसद है शिक्षा को आसान बनाना। इस वेबसाइट के माध्यम से मैं छात्रों को बोर्ड परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा और करियर से जुड़ी सटीक जानकारी प्रदान करता हूँ, ताकि हर छात्र अपनी मंज़िल पा सके।

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