रासायनिक अभिक्रिया (Chemical reaction) क्या है

रासायनिक अभिक्रिया क्या है?

रासायनिक अभिक्रिया: एक विस्तृत और संपूर्ण मार्गदर्शिका

नमस्ते दोस्तों! क्या आपने कभी गहराई से सोचा है कि हमारी यह दुनिया कैसे काम करती है? हम साँस लेते हैं और ऊर्जा पाते हैं, बीज से एक विशाल पेड़ बन जाता है, लोहे की मजबूत छड़ बारिश के पानी में रहकर धीरे-धीरे जंग खाकर टूट जाती है, और किचन में रखा दूध सुबह तक स्वादिष्ट दही में बदल जाता है। विज्ञान की चमत्कारी दुनिया में इस जादुई बदलाव को “रासायनिक अभिक्रिया” (Chemical Reaction) कहा जाता है। आज के इस बेहद विस्तृत और जानकारी से भरे ब्लॉग में हम रासायनिक अभिक्रियाओं की दुनिया में एक गहरा गोता लगाएंगे। हम इसके हर एक पहलू को बहुत ही आसान और रोचक भाषा में समझेंगे।

रासायनिक अभिक्रिया वास्तव में क्या है?

अगर हम इसकी सबसे सरल परिभाषा की बात करें, तो रासायनिक अभिक्रिया वह प्रक्रिया है जिसमें एक या एक से अधिक पदार्थ (जिन्हें अभिकारक या Reactants कहते हैं) आपस में मिलकर या टूटकर बिल्कुल नए पदार्थ (जिन्हें उत्पाद या Products कहते हैं) बनाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे दिलचस्प और महत्वपूर्ण बात यह होती है कि जो नया पदार्थ बनता है, उसके भौतिक और रासायनिक गुण (Physical and Chemical Properties) उन पुराने पदार्थों से बिल्कुल अलग होते हैं जिनसे वह बना है।

इसे समझने के लिए पानी का सबसे बेहतरीन उदाहरण लेते हैं। पानी का रासायनिक सूत्र H2O है। यह दो गैसों से मिलकर बनता है: हाइड्रोजन (Hydrogen) और ऑक्सीजन (Oxygen)। हाइड्रोजन एक ऐसी गैस है जो बहुत तेज़ी से आग पकड़ती है और ज्वलनशील (Combustible) है। दूसरी तरफ, ऑक्सीजन वह गैस है जो किसी भी चीज़ को जलने में मदद करती है (Supporter of Combustion)। लेकिन जब ये दोनों गैसें एक खास रासायनिक अभिक्रिया के तहत आपस में मिलती हैं, तो ‘पानी’ बनता है। और हम सब जानते हैं कि पानी आग बुझाने के काम आता है! है ना यह एक कमाल का जादू? यही रासायनिक अभिक्रिया की असली ताकत है।

भौतिक और रासायनिक परिवर्तन में अंतर

विज्ञान को गहराई से समझने के लिए हमें यह जानना बहुत ज़रूरी है कि दुनिया में होने वाले बदलाव मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं: भौतिक परिवर्तन (Physical Change) और रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change)।

  • भौतिक परिवर्तन: इसमें पदार्थ का रूप, आकार या अवस्था बदल जाती है, लेकिन अंदर से वह पदार्थ वही रहता है। जैसे बर्फ का पिघलकर पानी बनना, या पानी का उबलकर भाप बनना। तीनों ही अवस्थाओं (ठोस, द्रव, गैस) में वह है तो पानी (H2O) ही। आप कागज़ को फाड़ दें या कांच को तोड़ दें, यह भौतिक बदलाव है। इसे आसानी से पलटा (Reverse) जा सकता है।
  • रासायनिक परिवर्तन: इसमें पदार्थ अंदर से ही बदल जाता है। उसके अणु (Molecules) टूटते हैं और नए सिरे से जुड़कर कुछ नया बनाते हैं। जैसे कागज़ का जलना। जलने के बाद कागज़ राख और धुएं में बदल जाता है। क्या आप राख को वापस जोड़कर कागज़ बना सकते हैं? बिल्कुल नहीं। यह एक स्थायी (Permanent) बदलाव है, और यही रासायनिक अभिक्रिया की पहचान है।

रासायनिक अभिक्रिया के मुख्य हिस्से

किसी भी रासायनिक अभिक्रिया रूपी नाटक के कुछ मुख्य किरदार होते हैं। अगर हम इन किरदारों को समझ लें, तो पूरी कहानी समझ आ जाती है:

  1. अभिकारक (Reactants): ये वे पदार्थ हैं जो अभिक्रिया की शुरुआत में हमारे पास होते हैं और जो एक-दूसरे के साथ रासायनिक रूप से जुड़ते हैं। रासायनिक समीकरण लिखते समय इन्हें हमेशा बाईं (Left) ओर लिखा जाता है।
  2. उत्पाद (Products): अभिक्रिया पूरी होने के बाद जो नया पदार्थ बनता है, उसे उत्पाद कहते हैं। इसे हमेशा दाईं (Right) ओर लिखा जाता है।
  3. तीर का निशान (Arrow →): यह तीर अभिकारकों और उत्पादों के बीच लगाया जाता है। यह बताता है कि अभिक्रिया किस दिशा में हो रही है और बदलाव क्या हुआ है।
  4. उत्प्रेरक (Catalysts): ये वो खास पदार्थ होते हैं जो अभिक्रिया में सीधे तौर पर हिस्सा तो नहीं लेते (मतलब वे खर्च नहीं होते), लेकिन वे अभिक्रिया की गति (Speed) को बढ़ा या घटा सकते हैं। यह ठीक वैसे ही है जैसे खेल के मैदान में चीयरलीडर्स खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हैं, लेकिन खुद नहीं खेलते।

हमें कैसे पता चलता है कि रासायनिक अभिक्रिया हुई है?

हम अपनी आँखों से अणुओं और परमाणुओं को टूटते या जुड़ते हुए तो नहीं देख सकते। तो फिर हमें कैसे पता चलेगा कि कोई रासायनिक अभिक्रिया हो रही है? विज्ञान हमें इसके कुछ स्पष्ट लक्षण (Indicators) बताता है। अगर आपको इनमें से कोई भी बदलाव दिखे, तो समझ जाइये कि वहाँ कोई न कोई रासायनिक अभिक्रिया हुई है:

  • रंग में परिवर्तन (Change in Color): कई बार जब दो चीजें मिलती हैं, तो उनका रंग बदल जाता है। सबसे आम उदाहरण है लोहे पर जंग लगना। लोहे का मूल रंग सलेटी (Grey) होता है, लेकिन ऑक्सीजन और नमी के साथ अभिक्रिया करने पर उस पर लाल-भूरे रंग की परत (जंग) चढ़ जाती है। इसी तरह, जब सेब को काटकर छोड़ दिया जाता है, तो वह हवा में मौजूद ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके भूरा (Brown) हो जाता है।
  • गैस का उत्सर्जन (Evolution of Gas): कई अभिक्रियाओं में गैस बुलबुलों के रूप में बाहर निकलती है। जब आप बेकिंग सोडा में नींबू का रस या सिरका मिलाते हैं, तो एकदम से झाग और बुलबुले उठते हैं। यह कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस के निकलने का संकेत है।
  • तापमान में बदलाव (Change in Temperature): अभिक्रियाएँ अक्सर गर्मी पैदा करती हैं या गर्मी सोख लेती हैं। अगर आप बाज़ार से कली चूना (Quicklime) लाकर उसमें पानी मिलाते हैं, तो बर्तन इतना गर्म हो जाता है कि पानी उबलने लगता है। इसे ऊष्माक्षेपी (Exothermic) अभिक्रिया कहते हैं। वहीं, कुछ अभिक्रियाओं में बर्तन ठंडा हो जाता है, जिन्हें ऊष्माशोषी (Endothermic) अभिक्रिया कहा जाता है।
  • अवस्था में परिवर्तन (Change in State): मोमबत्ती का जलना इसका एक बेहतरीन उदाहरण है। मोमबत्ती का मोम ठोस (Solid) होता है। जलने पर वह पिघलकर तरल (Liquid) बनता है और फिर कार्बन डाइऑक्साइड और जलवाष्प गैस (Gas) के रूप में उड़ जाता है। यहाँ अवस्था बदल रही है।
  • अवक्षेप का बनना (Formation of Precipitate): कभी-कभी दो तरल पदार्थों को मिलाने पर एक ऐसा ठोस पदार्थ बन जाता है जो तरल में घुलता नहीं है और नीचे बैठ जाता है। इसे अवक्षेप (Precipitate) कहते हैं। दूध का फटना भी एक तरह से अवक्षेपण है, जहाँ ठोस पनीर पानी से अलग हो जाता है।

रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार (Types of Chemical Reactions)

दुनिया भर में लाखों-करोड़ों तरह की रासायनिक अभिक्रियाएँ होती हैं। वैज्ञानिकों ने इन्हें समझने में आसानी के लिए कुछ मुख्य श्रेणियों में बांटा है। आइए इन प्रकारों को विस्तार से समझते हैं:

1. संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction)

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है – जुड़ना या संयोग होना। जब दो या दो से अधिक छोटे और सरल पदार्थ आपस में मिलकर एक नया और बड़ा पदार्थ (एकल उत्पाद) बनाते हैं, तो उसे संयोजन अभिक्रिया कहते हैं। इसे आप ‘A + B → AB’ के रूप में समझ सकते हैं। उदाहरण: कोयले (कार्बन) को जब हवा (ऑक्सीजन) में जलाया जाता है, तो कार्बन और ऑक्सीजन मिलकर कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनाते हैं (C + O2 → CO2)।

2. वियोजन या अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction)

यह संयोजन अभिक्रिया का बिल्कुल उल्टा है। वियोजन का मतलब होता है ‘टूटना’। जब एक बड़ा और जटिल पदार्थ (यौगिक) किसी ऊर्जा के प्रभाव से टूटकर दो या दो से अधिक सरल पदार्थों में बंट जाता है, तो उसे वियोजन अभिक्रिया कहते हैं। इसे ‘AB → A + B’ के रूप में लिखा जा सकता है। यह ऊर्जा ऊष्मा (गर्मी), प्रकाश (रोशनी), या बिजली के रूप में हो सकती है। उदाहरण: जब हम चूना पत्थर (Calcium Carbonate – CaCO3) को बहुत अधिक गर्म करते हैं, तो वह टूटकर कली चूना (Calcium Oxide – CaO) और कार्बन डाइऑक्साइड गैस (CO2) में बदल जाता है।

3. विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction)

विस्थापन का अर्थ है ‘जगह से हटाना’। इस अभिक्रिया में एक अधिक ताकतवर (अधिक क्रियाशील) तत्व, किसी दूसरे कम ताकतवर (कम क्रियाशील) तत्व को उसके यौगिक (Compound) से धक्के मार कर बाहर निकाल देता है और खुद उसकी जगह ले लेता है। उदाहरण: अगर आप कॉपर सल्फेट (नीला थोथा) के नीले रंग के घोल में लोहे की कुछ कीलें डाल दें, तो लोहा (Iron) कॉपर (Copper) से ज्यादा ताकतवर होता है। इसलिए लोहा कॉपर को हटाकर खुद सल्फेट के साथ जुड़ जाता है और फेरस सल्फेट बना लेता है। इससे घोल का नीला रंग गायब होकर हल्का हरा हो जाता है और कीलों पर भूरे रंग का कॉपर जमा हो जाता है।

4. द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction)

यह विस्थापन अभिक्रिया का एक उन्नत रूप है। इसमें दो अलग-अलग यौगिक (Compounds) आपस में अपने आयनों (Ions) या हिस्सों की अदला-बदली कर लेते हैं। यह कुछ ऐसा है जैसे दो डांसिंग कपल्स (Dancing Couples) नाचते-नाचते अपने पार्टनर्स बदल लें! उदाहरण: जब बेरियम क्लोराइड और सोडियम सल्फेट के घोल को मिलाया जाता है, तो वे अपने हिस्से बदल लेते हैं और बेरियम सल्फेट (जो सफेद रंग का ठोस पदार्थ बनकर नीचे बैठ जाता है) और सोडियम क्लोराइड (नमक) बनाते हैं।

5. उपचयन और अपचयन अभिक्रिया (Oxidation and Reduction / Redox Reaction)

यह रसायन विज्ञान का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। उपचयन (Oxidation): जब किसी पदार्थ में ऑक्सीजन जुड़ जाती है या उसमें से हाइड्रोजन बाहर निकल जाती है, तो उसे उपचयन कहते हैं। जैसे लोहे पर जंग लगना ऑक्सीडेशन का ही उदाहरण है, क्योंकि लोहा ऑक्सीजन को सोख रहा है। अपचयन (Reduction): यह ऑक्सीडेशन का उल्टा है। जब किसी पदार्थ में से ऑक्सीजन हट जाती है या उसमें हाइड्रोजन जुड़ जाती है, तो उसे अपचयन कहते हैं। मजेदार बात यह है कि ये दोनों प्रक्रियाएँ हमेशा एक साथ होती हैं। इसलिए इन्हें मिलाकर ‘रेडॉक्स’ (Redox – Reduction + Oxidation) अभिक्रिया कहते हैं।

6. उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction)

जब एक अम्ल (Acid – जो खट्टा और तेज़ होता है) और एक क्षारक (Base – जो कड़वा और साबुन जैसा होता है) आपस में मिलाए जाते हैं, तो वे एक-दूसरे के प्रभाव को खत्म कर देते हैं। इस लड़ाई के अंत में जो शांति कायम होती है, उससे ‘नमक’ (Salt) और ‘पानी’ (Water) बनता है। इस प्रक्रिया को उदासीनीकरण कहते हैं। उदाहरण: जब हमें एसिडिटी होती है, margin पेट में अम्ल (HCl) बढ़ जाता है। हम ईनो या कोई एंटासिड पीते हैं जो कि एक क्षारक (Base) होता है। ये दोनों मिलकर पेट में पानी और नमक बनाते हैं, जिससे हमें तुरंत राहत मिलती है।

रासायनिक समीकरणों को संतुलित करना (Balancing Chemical Equations)

विज्ञान में ‘द्रव्यमान संरक्षण का नियम’ (Law of Conservation of Mass) बहुत महत्वपूर्ण है। इस नियम के अनुसार, दुनिया में किसी भी रासायनिक अभिक्रिया के दौरान द्रव्यमान (Mass/वजन) को ना तो पैदा किया जा सकता है और ना ही नष्ट किया जा सकता है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि अभिक्रिया शुरू होने से पहले आपके पास जितने परमाणु (Atoms) थे, अभिक्रिया खत्म होने के बाद भी उतने ही परमाणु होने चाहिए। वे बस इधर से उधर हो सकते हैं।

इसीलिए हमें रासायनिक समीकरणों को संतुलित (Balance) करना पड़ता है। तीर के निशान के बाईं ओर (अभिकारकों में) हर तत्व के जितने परमाणु हैं, दाईं ओर (उत्पादों में) भी उतने ही परमाणु होने चाहिए। जैसे: असंतुलित: H2 + O2 → H2O (यहाँ ऑक्सीजन के 2 परमाणु थे, पर बना सिर्फ 1) संतुलित: 2H2 + O2 → 2H2O (अब हाइड्रोजन के 4 और ऑक्सीजन के 2 परमाणु दोनों तरफ हैं।)

हमारे दैनिक जीवन में रासायनिक अभिक्रियाएँ (Everyday Life Examples)

रासायनिक अभिक्रियाएँ केवल प्रयोगशाला (Laboratory) के बीकर और टेस्ट ट्यूब तक सीमित नहीं हैं। यह हमारे चारों ओर, यहाँ तक कि हमारे शरीर के अंदर भी हर सेकंड हो रही हैं। आइए रोज़मर्रा की ज़िंदगी के कुछ अद्भुत उदाहरण देखते हैं:

  • पाचन तंत्र (Digestion of Food): जब हम खाना खाते हैं, तो हमारे मुँह से ही रासायनिक अभिक्रिया शुरू हो जाती है। हमारी लार (Saliva) में मौजूद एंजाइम खाने के कार्बोहाइड्रेट को तोड़ना शुरू कर देते हैं। पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl) और अन्य रस खाने को और छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर उसे ऊर्जा में बदलते हैं।
  • साँस लेना (Respiration): हम जो ऑक्सीजन नाक से अंदर खींचते हैं, वह हमारे फेफड़ों से होते हुए रक्त (Blood) में जाती है और शरीर की हर एक कोशिका तक पहुँचती है। वहाँ यह ऑक्सीजन हमारे खाये हुए भोजन (ग्लूकोज) के साथ रासायनिक अभिक्रिया करती है। इसी अभिक्रिया से हमें काम करने की ऊर्जा (Energy) मिलती है और साथ ही कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) बनती है जिसे हम साँस के ज़रिए बाहर छोड़ देते हैं।
  • प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis): यह धरती की सबसे ज़रूरी अभिक्रिया है। पेड़-पौधे सूरज की रोशनी (Sunlight), हवा से कार्बन डाइऑक्साइड, और ज़मीन से पानी लेकर अपना भोजन (ग्लूकोज) खुद बनाते हैं और बदले में हमें जीवनदायिनी गैस ‘ऑक्सीजन’ देते हैं। अगर यह अभिक्रिया रुक जाए, तो पृथ्वी पर जीवन खत्म हो जाएगा।
  • रसोईघर का विज्ञान (Kitchen Science): आपकी रसोई घर की सबसे बड़ी प्रयोगशाला है। दूध में थोड़ा सा जामन डालने से लैक्टोबैसिलस (Lactobacillus) नामक बैक्टीरिया दूध की शर्करा को लैक्टिक एसिड में बदल देता है और दूध दही बन जाता है। केक या ब्रेड बनाने के लिए मैदे में बेकिंग पाउडर और यीस्ट मिलाया जाता है, जो गर्म होने पर CO2 गैस छोड़ते हैं। इसी गैस के बुलबुलों के कारण केक फूल कर स्पंजी हो जाता है। कच्ची सब्ज़ियों को आग पर पकाना भी एक जटिल रासायनिक प्रक्रिया है जिससे उनका स्वाद और रंग बदल जाता है।
  • साबुन और डिटर्जेंट का काम (Action of Soap): जब हम मैले कपड़ों को साबुन या डिटर्जेंट वाले पानी में डालते हैं, तो साबुन के अणु मैल और तेल (Oil) के साथ एक खास तरह की रासायनिक संरचना (जिससे मिसेल/Micelle कहते हैं) बनाते हैं और मैल को कपड़े से अलग करके पानी में घोल देते हैं।

उद्योगों और कारखानों में रसायन विज्ञान (Industrial Applications)

आज की आधुनिक दुनिया रासायनिक अभिक्रियाओं के बिना एक दिन भी नहीं चल सकती। बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों और उद्योगों में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है:

  • दवाइयों का निर्माण (Pharmaceuticals): हर छोटी-बड़ी बीमारी की दवा, सिरदर्द की गोली से लेकर कैंसर के इलाज तक, सब जटिल रासायनिक अभिक्रियाओं का ही परिणाम हैं। वैज्ञानिक लैब में केमिकल्स को मिलाकर नई और जीवन रक्षक दवाएं बनाते हैं।
  • प्लास्टिक और पॉलिमर (Plastics and Polymers): हमारे आस-पास मौजूद हर प्लास्टिक की चीज़ (बोतल, कुर्सी, खिलौने, लैपटॉप की बॉडी) पेट्रोलियम पदार्थों की रासायनिक अभिक्रिया (Polymerization) के द्वारा बनाई जाती है।
  • कृषि और उर्वरक (Agriculture and Fertilizers): बढ़ती आबादी का पेट भरने के लिए खेतों में फसल की पैदावार बढ़ाना ज़रूरी है। कारखानों में अमोनिया (Ammonia), यूरिया (Urea) और कई तरह के कृत्रिम खाद (Fertilizers) और कीटनाशक (Pesticides) रासायनिक प्रक्रियाओं से ही बनाए जाते हैं।
  • बैटरियाँ (Batteries): आपके मोबाइल फोन की बैटरी से लेकर कार और इन्वर्टर की बैटरी तक, सब में रासायनिक ऊर्जा जमा होती है। जब आप फोन इस्तेमाल करते हैं, तो बैटरी के अंदर एक रासायनिक अभिक्रिया होती है जो उस ऊर्जा को बिजली (Electrical Energy) में बदल देती है।

पर्यावरण और रासायनिक अभिक्रियाएँ (Environment and Reactions)

रासायनिक अभिक्रियाओं का हमारे पर्यावरण पर अच्छा और बुरा, दोनों तरह का गहरा असर पड़ता है।

बुरा असर: वाहनों और कारखानों में पेट्रोल, डीजल, या कोयला जलता है (जो कि दहन या Combustion अभिक्रिया है)। इससे खतरनाक गैसें जैसे सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड हवा में मिलती हैं। जब बारिश होती है, तो ये गैसें पानी के साथ मिलकर ‘अम्लीय वर्षा’ (Acid Rain) करती हैं, जो पेड़-पौधों, ज़मीन और ताजमहल जैसी संगमरमर की इमारतों को तबाह कर रही है। इसके अलावा, ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) भी अत्यधिक CO2 के उत्सर्जन का ही नतीजा है।

अच्छा असर (ग्रीन केमिस्ट्री): आज के वैज्ञानिक पर्यावरण को बचाने के लिए ‘ग्रीन केमिस्ट्री’ (Green Chemistry) पर ज़ोर दे रहे हैं। यह रसायन विज्ञान की वह शाखा है जिसमें ऐसे रसायनों और प्रक्रियाओं का विकास किया जाता है जो पर्यावरण के लिए सुरक्षित हों। उदाहरण के लिए, प्रदूषण न फैलाने वाले बायो-प्लास्टिक (Bio-plastics) का निर्माण और सौर ऊर्जा (Solar Energy) से बिजली बनाने की नई तकनीकें।

निष्कर्ष (Conclusion)

अंत में हम यह पूरी तरह से कह सकते हैं कि ‘रासायनिक अभिक्रियाएँ’ कोई बोरिंग किताबी विषय नहीं हैं, बल्कि यह हमारे जीवन का आधार हैं। जन्म से लेकर मृत्यु तक, सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, हमारे शरीर के अंदर और हमारे आस-पास के वातावरण में अनगिनत रासायनिक अभिक्रियाएँ लगातार चलती रहती हैं। यह प्रकृति की एक खूबसूरत भाषा है जिसमें परमाणु और अणु एक-दूसरे से बात करते हैं, मिलते हैं, बिछड़ते हैं और कुछ नया रचते हैं।

उम्मीद है कि इतने विस्तार से चर्चा करने के बाद अब आपको समझ आ गया होगा कि जब अगली बार आप माचिस की तीली जलाएंगे, या लोहे पर जंग लगा देखेंगे, या अपनी माँ के हाथ का स्वादिष्ट फूला हुआ केक खाएंगे, तो आप उस जादू के पीछे छिपे विज्ञान—यानी रासायनिक अभिक्रिया—को पहचान लेंगे और मुस्कुराएंगे! विज्ञान का यह सफर बहुत रोमांचक है, बस हमें अपने आस-पास की चीज़ों को ध्यान से देखने की ज़रूरत है।

Manikant kumar Yadav
Manikant kumar Yadav

नमस्कार! मैं हूँ SelfShiksha का संस्थापक, और मेरा मकसद है शिक्षा को आसान बनाना। इस वेबसाइट के माध्यम से मैं छात्रों को बोर्ड परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा और करियर से जुड़ी सटीक जानकारी प्रदान करता हूँ, ताकि हर छात्र अपनी मंज़िल पा सके।

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