कक्षा 6 इतिहास – अध्याय 3: आरंभिक नगर (In the Earliest Cities)(हड़प्पा सभ्यता: संपूर्ण विस्तृत UPSC/IAS गाइड)

Class 6 History Chapter 3 – Ultimate UPSC Guide

कक्षा 6 इतिहास – अध्याय 3: आरंभिक नगर (In the Earliest Cities)
(हड़प्पा सभ्यता: संपूर्ण विस्तृत UPSC/IAS गाइड)

1. अध्याय परिचय: प्रथम नगरीकरण (First Urbanisation)

नमस्कार दोस्तों। पिछले अध्याय में हमने देखा कि मनुष्य कैसे ‘किसान’ बना। इस अध्याय में हम एक बड़ी छलांग लगाएंगे। हम लगभग 4700 साल पीछे जाएंगे, जब भारतीय उपमहाद्वीप में पहली बार शहर बसे। इसे इतिहास में “प्रथम नगरीकरण” (First Urbanisation) या “हड़प्पा सभ्यता” (Harappan Civilization) कहा जाता है। UPSC के लिए यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमारी नगर नियोजन (Urban Planning), व्यापार और शिल्प कौशल की जड़ों को दर्शाता है।

2. हड़प्पा की कहानी: खोज कैसे हुई?

हड़प्पा की खोज एक संयोग थी।

  • रेलवे लाइन: लगभग 150 साल पहले जब पंजाब (वर्तमान पाकिस्तान) में पहली बार रेलवे लाइन बिछाई जा रही थी, तो इंजीनियरों को एक पुराना खंडहर मिला। उन्हें लगा कि यह ईंटों की एक खान है। उन्होंने वहां की हजारों पक्की ईंटें उखाड़कर रेलवे लाइन में लगा दीं, जिससे कई पुरानी इमारतें नष्ट हो गईं।
  • पुरातत्विक खोज: लगभग 80 साल पहले पुरातत्वविदों ने इस स्थल को दोबारा ढूंढा और महसूस किया कि यह उपमहाद्वीप के सबसे पुराने शहरों में से एक है। दयाराम साहनी (1921) ने हड़प्पा की और राखालदास बनर्जी (1922) ने मोहनजोदड़ो की खोज की।
  • नामकरण: चूँकि इस नगर की खोज सबसे पहले हुई थी, इसलिए बाद में मिलने वाले इस तरह के सभी पुरास्थलों को ‘हड़प्पा सभ्यता की इमारतें’ कहा गया। इन शहरों का निर्माण लगभग 4700 साल पहले (2700 BC) हुआ था।

3. इन नगरों की विशेषता: नगर नियोजन (Town Planning)

हड़प्पा सभ्यता की सबसे बड़ी पहचान उसका अद्भुत ‘नगर नियोजन’ है। अधिकांश नगर दो भागों में विभाजित थे:

(A) पश्चिमी भाग (नगर-दुर्ग / Citadel)

  • यह हिस्सा छोटा था लेकिन ऊंचाई पर बना था।
  • ऊंचाई का कारण: यह ईंटों के चबूतरे पर बना होता था।
  • पुरातत्वविदों ने इसे ‘नगर-दुर्ग’ कहा है। यहाँ संभवतः शासक वर्ग रहता था या सार्वजनिक इमारतें (अन्नागार, स्नानागार) होती थीं।

(B) पूर्वी भाग (निचला नगर / Lower Town)

  • यह हिस्सा बड़ा था लेकिन निचले इलाके में था।
  • इसे ‘निचला नगर’ कहा गया है। यहाँ सामान्य लोग (शिल्पकार, व्यापारी, आम जनता) रहते थे।

दीवारें और ईंटें: दोनों हिस्सों की चारदीवारियाँ पक्की ईंटों (Baked Bricks) से बनाई जाती थीं। ईंटें इतनी अच्छी तरह पकी थीं कि हजारों साल बाद भी दीवारें खड़ी हैं। ईंटों की चुनाई ‘इंटरलॉकिंग’ (Interlocking) पैटर्न में की जाती थी, जिससे दीवारें मजबूत बनती थीं।

4. विशेष इमारतें: महान स्नानागार (The Great Bath)

मोहनजोदड़ो (Mohenjodaro) के नगर-दुर्ग में एक बहुत खास तालाब मिला है, जिसे पुरातत्वविदों ने ‘महान स्नानागार’ कहा है।

  • निर्माण: इसे ईंट और प्लास्टर से बनाया गया था। पानी का रिसाव रोकने के लिए प्लास्टर के ऊपर चारकोल (Charcoal/Natural Tar) की परत चढ़ाई गई थी।
  • संरचना: तालाब में उतरने के लिए दो तरफ से सीढ़ियाँ थीं और चारों ओर कमरे बने हुए थे।
  • पानी: इसमें पानी पास के कुएँ से भरा जाता था और उपयोग के बाद निकाल दिया जाता था (ड्रेनेज)।
  • महत्व: शायद यहाँ विशिष्ट नागरिक विशेष अवसरों पर स्नान करते थे (धार्मिक महत्व)।

5. भवन, नाले और सड़कें (Infrastructure)

इन नगरों की जल निकासी व्यवस्था (Drainage System) आधुनिक समय को भी टक्कर देती है।

  • घर: घर आमतौर पर एक या दो मंजिल के होते थे। घर के आंगन (Courtyard) के चारों ओर कमरे बने होते थे। अधिकांश घरों में एक अलग स्नानघर होता था और कुछ घरों में कुएँ भी होते थे।
  • नालियाँ: कई नगरों में ढके हुए नाले (Covered Drains) थे। इन्हें सीधी लाइन में बनाया जाता था। हर नाली में हल्की ढलान होती थी ताकि पानी आसानी से बह सके।
  • ग्रिड पैटर्न: सड़कें और नालियां एक-दूसरे को लगभग समकोण (90 डिग्री) पर काटती थीं, जिससे पूरा शहर आयताकार खंडों में बंट जाता था।
  • मैनहोल: नालियों के ढके होने के कारण, उनकी सफाई के लिए जगह-जगह पर ‘मैनहोल’ (Inspection holes) बनाए गए थे।

6. सामाजिक और धार्मिक जीवन (Social and Religious Life)

हड़प्पा समाज सुव्यवस्थित था और यहाँ विभिन्न वर्ग रहते थे।

सामाजिक संरचना:

  1. शासक (Rulers): नगर-दुर्ग में रहने वाले, जो योजनाएँ बनाते थे और बहुमूल्य वस्तुओं का उपभोग करते थे।
  2. शिल्पकार (Craftspersons): मनके बनाने वाले, मुहर बनाने वाले, बुनकर और धातुकर्मी।
  3. श्रमिक/किसान: जो निचले नगर या गांवों में रहते थे और खाद्य आपूर्ति करते थे।

धार्मिक विश्वास (Religious Beliefs):

हड़प्पा के लोग प्रकृति प्रेमी और मूर्ति पूजक थे, हालांकि कोई मंदिर नहीं मिला है।

  • मातृदेवी (Mother Goddess): मिट्टी की कई स्त्री मूर्तियाँ मिली हैं, जो उर्वरता (Fertility) की देवी मानी जाती थीं।
  • पशुपति महादेव (Proto-Shiva): एक मुहर पर एक योगी की आकृति मिली है, जिसके चारों ओर जानवर (हाथी, बाघ, गैंडा, भैंसा) हैं। इसे शिव का प्रारंभिक रूप माना जाता है।
  • प्रकृति पूजा: पीपल का पेड़ और एक सींग वाला जानवर (Unicorn) पवित्र माने जाते थे। कुबड़ वाले सांड (Humped Bull) की मुहरें बहुत आम हैं।

7. नगर के शिल्प और प्रमुख कलाकृतियाँ (Crafts & Artifacts)

पुरातत्वविदों को जो चीजें मिली हैं, उनमें अधिकतर पत्थर, शंख, तांबे, कांसे, सोने और चांदी की बनी हैं।

  • तांबा और कांसा (Copper/Bronze): औजार, हथियार, गहने और बर्तन बनाने के लिए।
  • सोना और चांदी: गहने और बर्तन बनाने के लिए।
  • बांट (Weights): ‘चर्ट’ (Chert) पत्थर से बने सूक्ष्म और सटीक वजन। यह 16 के गुणक (Multiples of 16) में होते थे।
  • मनके (Beads): लाल रंग के ‘कार्नीलियन’ (Carnelian) पत्थर को काटकर सुंदर मनके बनाए गए।
  • मुहरें (Seals): पत्थर (Steatite) की बनी आयताकार मुहरें। इन पर सामान्यतः जानवरों के चित्र मिलते हैं।

तीन प्रसिद्ध कलाकृतियाँ (Three Famous Artifacts):

  • कांस्य नर्तकी (Dancing Girl): मोहनजोदड़ो से मिली कांसे की एक छोटी मूर्ति जो ‘लॉस्ट वैक्स तकनीक’ (Lost Wax Technique) से बनी है।
  • दाढ़ी वाला पुजारी (Priest King): मोहनजोदड़ो से पत्थर (Steatite) की बनी एक मूर्ति, जिसने कढ़ाईदार शॉल ओढ़ी हुई है।
  • पशुपति मुहर: योगी की मुद्रा में बैठा व्यक्ति।

8. कच्चे माल की खोज (Search for Raw Materials)

कुछ कच्चा माल (जैसे मिट्टी, लकड़ी) स्थानीय रूप से मिलता था, लेकिन तांबा, लोहा, सोना, चांदी और बहुमूल्य पत्थरों को दूर-दूर से आयात किया जाता था। UPSC के लिए यह सूची (List) बहुत महत्वपूर्ण है:

पदार्थ (Material) आयात का स्थान (Source Location)
तांबा (Copper) राजस्थान (खेतड़ी) और ओमान (पश्चिमी एशिया)
टिन (Tin) आधुनिक ईरान और अफगानिस्तान (कांसे के लिए जरूरी)
सोना (Gold) आधुनिक कर्नाटक (कोलार क्षेत्र)
लाजवर्द (Lapis Lazuli) अफगानिस्तान (शोर्टुघई)
बहुमूल्य पत्थर गुजरात, ईरान और अफगानिस्तान

9. नगरवासियों का भोजन (Food)

नगरों में रहने वाले लोग भोजन के लिए गाँव के किसानों और चरवाहों पर निर्भर थे।

  • फसलें: गेहूँ, जौ, दालें, मटर, धान, तिल और सरसों।
  • हल (Plough): जमीन जुताई के लिए ‘हल’ का प्रयोग एक नई बात थी। असली हल लकड़ी के थे (जो बच नहीं पाए), लेकिन बनवाली (हरियाणा) से मिट्टी के खिलौना हल मिले हैं।
  • सिंचाई: चूँकि इस क्षेत्र में बारिश कम होती थी, इसलिए सिंचाई के लिए पानी संचय किया जाता था।
  • पशुपालन: गाय, भैंस, भेड़ और बकरियां पा ली जाती थीं। सूखे महीनों में चरवाहे घास-पानी की तलाश में मवेशियों को दूर ले जाते थे।

10. गुजरात में हड़प्पा कालीन नगर (Dholavira & Lothal)

(A) धोलावीरा (Dholavira) – कच्छ

कच्छ के इलाके में ‘खादिर बेत’ के किनारे बसा धोलावीरा एक अनूठा नगर था।

  • तीन भाग: जहाँ अन्य हड़प्पा नगर दो भागों में बंटे थे, धोलावीरा तीन भागों में बंटा था (दुर्ग, मध्य नगर, निचला नगर)।
  • जल प्रबंधन (Water Management): यहाँ विशाल जलाशय (Reservoirs) और बांध मिले हैं, जो जल संरक्षण की उन्नत तकनीक दिखाते हैं।
  • लिपि: यहाँ हड़प्पा लिपि के बड़े-बड़े अक्षरों को पत्थरों में खुदा पाया गया है (Signboard)। यह अनोखा है क्योंकि आमतौर पर मुहरों पर छोटे लेख मिलते हैं।

(B) लोथल (Lothal) – बन्दरगाह

यह गुजरात की खम्भात की खाड़ी में साबरमती की एक उपनदी के किनारे बसा था।

  • उद्योग: यहाँ कीमती पत्थर, शंख और धातुओं से चीजें बनाने का महत्वपूर्ण केंद्र था। यहाँ एक मनके बनाने का कारखाना (Bead factory) मिला है।
  • बन्दरगाह (Dockyard): यहाँ एक बड़ा तालाब (Tank) मिला है जो संभवतः बन्दरगाह (गोदीवाड़ा) था, जहाँ समुद्र के रास्ते आने वाली नावें रुकती थीं।
  • अग्निकुंड: यहाँ अनुष्ठानिक अग्निकुंड भी मिले हैं।
  • युगल शवाधान (Double Burial): यहाँ एक ही कब्र में दो लोगों (स्त्री-पुरुष) को दफनाने के साक्ष्य मिले हैं।

11. सभ्यता का अंत: एक रहस्य (Mystery of the End)

लगभग 3900 साल पहले एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। नगर उजड़ने लगे। लेखन, मुहरों और बांटों का प्रयोग बंद हो गया।

पतन के मुख्य सिद्धांत (Theories of Decline):

  • बाढ़ (Flood): जॉन मार्शल और मैके जैसे विद्वानों का मानना था कि बार-बार आने वाली बाढ़ ने नगरों को नष्ट कर दिया (विशेषकर मोहनजोदड़ो)।
  • नदियों का सूखना/मार्ग बदलना: सरस्वती (घग्घर-हाकरा) नदी का सूखना एक बड़ा कारण माना जाता है।
  • पारिस्थितिक असंतुलन (Ecological Imbalance): ईंट पकाने और मवेशियों के चरने से जंगलों का विनाश हुआ, जिससे जमीन बंजर हो गई।
  • बाहरी आक्रमण (Aryans?): व्हीलर (Wheeler) जैसे विद्वानों ने ऋग्वेद में वर्णित ‘पुरंदर’ (किलों को तोड़ने वाला) के आधार पर आर्यों के आक्रमण की बात कही, हालांकि अब इसे कम स्वीकार किया जाता है।

12. अन्यत्र: मिस्र के पिरामिड (Egypt)

लगभग 5000 साल पहले मिस्र में राजाओं ने पिरामिड बनवाए।

  • राजाओं के मरने पर उनके शवों को इन्हीं पिरामिडों में सुरक्षित रखा जाता था (ममी/Mummy)।
  • शवों के साथ भोजन, पेय, वस्त्र, गहने, बर्तन, वाद्ययंत्र, हथियार और कभी-कभी तो सेवक-सेविकाओं को भी दफना दिया जाता था।
  • यह दुनिया के इतिहास में शवों को दफनाने की परंपरा में सबसे ज्यादा धन-दौलत खर्च करने का उदाहरण है।

13. UPSC / BPSC विशेष विश्लेषण

  • धर्मनिरपेक्ष (Secular) ढांचा: हड़प्पा में कोई विशाल मंदिर (जैसे मेसोपोटामिया या मिस्र में) नहीं मिले। केवल महान स्नानागार और अग्निकुंड (कालीबंगा/लोथल) मिले हैं, जो अनुष्ठानिक (Ritualistic) महत्व दर्शाते हैं, न कि संगठित धर्म।
  • व्यापार संतुलन: लोथल का गोदीवाड़ा और मुहरों का मेसोपोटामिया में मिलना अंतरराष्ट्रीय व्यापार का प्रमाण है।
  • लिपि का रहस्य: हड़प्पा लिपि आज तक पढ़ी नहीं जा सकी है (Undeciphered)। यह चित्राक्षर (Pictographic) थी और संभवतः बूस्ट्रोफेडन (Boustrophedon) शैली (दाएं से बाएं, फिर बाएं से दाएं) में लिखी जाती थी।

14. अभ्यास प्रश्न (20 Practice MCQs – UPSC Prelims Level)

Q1: हड़प्पा सभ्यता के नगरों का निर्माण लगभग कितने वर्ष पूर्व हुआ था?

  • (A) 2500 साल पहले
  • (B) 4700 साल पहले
  • (C) 8000 साल पहले
  • (D) 3900 साल पहले

उत्तर: (B) 4700 साल पहले

Q2: महान स्नानागार (Great Bath) किस नगर में मिला है?

  • (A) हड़प्पा
  • (B) लोथल
  • (C) मोहनजोदड़ो
  • (D) कालीबंगा

उत्तर: (C) मोहनजोदड़ो

Q3: हड़प्पा के लोग तांबे (Copper) का आयात मुख्य रूप से कहाँ से करते थे?

  • (A) कर्नाटक
  • (B) राजस्थान और ओमान
  • (C) अफगानिस्तान
  • (D) ईरान

उत्तर: (B) राजस्थान और ओमान

Q4: ‘अग्निकुंड’ (Fire Altars) कहाँ से मिले हैं?

  • (A) मोहनजोदड़ो
  • (B) कालीबंगा और लोथल
  • (C) हड़प्पा
  • (D) धोलावीरा

उत्तर: (B) कालीबंगा और लोथल

Q5: हड़प्पा सभ्यता का कौन सा नगर तीन भागों में विभाजित था?

  • (A) लोथल
  • (B) धोलावीरा
  • (C) राखीगढ़ी
  • (D) कालीबंगा

उत्तर: (B) धोलावीरा

Q6: ‘गोदीवाड़ा’ (Dockyard) के साक्ष्य कहाँ से मिले हैं?

  • (A) धोलावीरा
  • (B) लोथल
  • (C) सुरकोटदा
  • (D) सोत्काकोह

उत्तर: (B) लोथल

Q7: कांसे (Bronze) के निर्माण के लिए तांबे के साथ कौन सी धातु मिलाई जाती थी?

  • (A) लोहा
  • (B) टिन
  • (C) सोना
  • (D) चांदी

उत्तर: (B) टिन

Q8: टिन का आयात कहाँ से किया जाता था?

  • (A) राजस्थान
  • (B) कर्नाटक
  • (C) ईरान और अफगानिस्तान
  • (D) गुजरात

उत्तर: (C) ईरान और अफगानिस्तान

Q9: हड़प्पा के लोग सोने (Gold) का आयात कहाँ से करते थे?

  • (A) कश्मीर
  • (B) कर्नाटक
  • (C) बिहार
  • (D) केरल

उत्तर: (B) कर्नाटक

Q10: कपास (Cotton) की खेती सबसे पहले कहाँ शुरू हुई (लगभग 7000 साल पहले)?

  • (A) मोहनजोदड़ो
  • (B) हड़प्पा
  • (C) मेहरगढ़
  • (D) लोथल

उत्तर: (C) मेहरगढ़

Q11: हड़प्पा लिपि के बड़े अक्षरों (Signboard) के साक्ष्य कहाँ से मिले हैं?

  • (A) बनवाली
  • (B) धोलावीरा
  • (C) कालीबंगा
  • (D) चन्हुदड़ो

उत्तर: (B) धोलावीरा

Q12: ‘फेयन्स’ (Faience) का संबंध किससे है?

  • (A) एक प्राकृतिक पत्थर
  • (B) कृत्रिम रूप से तैयार पदार्थ
  • (C) एक प्रकार की फसल
  • (D) धातु का मिश्रण

उत्तर: (B) कृत्रिम रूप से तैयार पदार्थ

Q13: हड़प्पा के नगरों के पश्चिमी भाग को क्या कहा जाता था?

  • (A) निचला नगर
  • (B) नगर-दुर्ग (Citadel)
  • (C) महान स्नानागार
  • (D) बाज़ार

उत्तर: (B) नगर-दुर्ग

Q14: हड़प्पा सभ्यता में बांट (Weights) किस पत्थर से बनाए जाते थे?

  • (A) कार्नीलियन
  • (B) चर्ट (Chert)
  • (C) जैस्पर
  • (D) क्वार्ट्ज

उत्तर: (B) चर्ट

Q15: मनके (Beads) बनाने के लिए किस लाल पत्थर का प्रयोग होता था?

  • (A) चर्ट
  • (B) कार्नीलियन
  • (C) लैपिस लाजुली
  • (D) स्टीटाइट

उत्तर: (B) कार्नीलियन

Q16: हड़प्पा सभ्यता के अंत की शुरुआत कब मानी जाती है?

  • (A) 4700 साल पहले
  • (B) 3900 साल पहले
  • (C) 2500 साल पहले
  • (D) 1500 साल पहले

उत्तर: (B) 3900 साल पहले

Q17: पिरामिडों का संबंध किस सभ्यता से है?

  • (A) मेसोपोटामिया
  • (B) चीन
  • (C) मिस्र (Egypt)
  • (D) हड़प्पा

उत्तर: (C) मिस्र

Q18: हड़प्पा सभ्यता में ‘खिलौना हल’ किस सामग्री के बने मिले हैं?

  • (A) लोहा
  • (B) तांबा
  • (C) मिट्टी (Terracotta)
  • (D) लकड़ी

उत्तर: (C) मिट्टी

Q19: हड़प्पा सभ्यता किस नदी के आसपास विकसित हुई?

  • (A) गंगा
  • (B) सिंधु (Indus) और उसकी सहायक नदियाँ
  • (C) नर्मदा
  • (D) ब्रह्मपुत्र

उत्तर: (B) सिंधु और उसकी सहायक नदियाँ

Q20: महान स्नानागार में पानी का रिसाव रोकने के लिए किसका लेप किया गया था?

  • (A) चूना
  • (B) जिप्सम
  • (C) चारकोल (Natural Tar)
  • (D) मोम

उत्तर: (C) चारकोल (Natural Tar)

15. मुख्य परीक्षा प्रश्न (Mains Analytical Question)

प्रश्न: हड़प्पा सभ्यता के नगर नियोजन (Town Planning) की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन करें। यह आज के आधुनिक नगरों से किस प्रकार भिन्न या समान था?
उत्तर संकेत: हड़प्पा का नगर नियोजन ग्रिड प्रणाली (Grid System) पर आधारित था जहाँ सड़के एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं। ढकी हुई नालियाँ, मैनहोल, पक्की ईंटों का प्रयोग और शहर का दो भागों (दुर्ग और निचला नगर) में विभाजन इसकी मुख्य विशेषताएं थीं। समानता: आज भी हम ड्रेनेज और ग्रिड सिस्टम का उपयोग करते हैं। भिन्नता: आज शहरों का वर्गीकरण दुर्ग और निचले नगर जैसा स्पष्ट नहीं है और हम विभिन्न सामग्रियों (कंक्रीट, कांच) का उपयोग करते हैं।

16. अध्याय सारांश (Conclusion)

हड़प्पा सभ्यता भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। 4700 साल पहले, जब दुनिया के कई हिस्से अभी भी आदिम जीवन जी रहे थे, भारत में व्यवस्थित शहर, व्यापार और कला पनप रही थी। धोलावीरा का जल प्रबंधन और लोथल का व्यापार हमें हमारे पूर्वजों की वैज्ञानिक सोच का परिचय देते हैं। भले ही 3900 साल पहले यह सभ्यता रहस्यमयी तरीके से समाप्त हो गई, लेकिन इसकी विरासत आज भी हमारी संस्कृति में जीवित है।

17. परीक्षा के लिए ‘गोल्डन पॉइंट्स’ (Revision Notes)

  • समय काल: 4700 – 3900 साल पहले।
  • नगर विभाजन: पश्चिमी दुर्ग (छोटा/ऊँचा) और पूर्वी निचला नगर (बड़ा/नीचा)।
  • महान स्नानागार: मोहनजोदड़ो (चारकोल की परत)।
  • अग्निकुंड: कालीबंगा और लोथल।
  • गोदीवाड़ा (Dockyard): लोथल (गुजरात)।
  • धोलावीरा: तीन भागों में विभाजित नगर, साइनबोर्ड।
  • कच्चा माल: तांबा (राजस्थान/ओमान), टिन (ईरान/अफगानिस्तान), सोना (कर्नाटक)।
  • फेयन्स: कृत्रिम पदार्थ (मनके/चूड़ियां)।
  • मुहरें: जानवरों के चित्र, अभी तक अपठनीय लिपि।
  • कलाकृतियाँ: कांसे की नर्तकी, दाढ़ी वाला पुजारी, पशुपति मुहर।

© UPSC History Education Blog – अगला अध्याय जल्द आ रहा है!

Manikant kumar Yadav
Manikant kumar Yadav

नमस्कार! मैं हूँ SelfShiksha का संस्थापक, और मेरा मकसद है शिक्षा को आसान बनाना। इस वेबसाइट के माध्यम से मैं छात्रों को बोर्ड परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा और करियर से जुड़ी सटीक जानकारी प्रदान करता हूँ, ताकि हर छात्र अपनी मंज़िल पा सके।

Articles: 47

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *