
कक्षा 6 इतिहास – अध्याय 2: आखेट-खाद्य संग्रह से भोजन उत्पादन तक
(संपूर्ण विस्तृत UPSC/IAS गाइड)
1. अध्याय परिचय: मानव इतिहास की सबसे बड़ी क्रांति
नमस्कार दोस्तों। यह अध्याय मानव सभ्यता के उस निर्णायक मोड़ के बारे में है जिसे इतिहासकार गॉर्डन चाइल्ड ने “नवपाषाण क्रांति” (Neolithic Revolution) कहा है। यह कहानी है कि कैसे इंसान ने प्रकृति पर निर्भर रहने (Parasitic nature) की बजाय प्रकृति को नियंत्रित करना (Controlling nature) सीखा। हम जानेंगे कि कैसे एक शिकारी मानव, जो भोजन के पीछे भागता था, एक किसान बन गया और सभ्यताओं की नींव रखी। UPSC के लिए यह अध्याय ‘संस्कृति के विकास’ को समझने की कुंजी है।
2. आखेटक-खाद्य संग्राहक: जीवन और संघर्ष
इस उपमहाद्वीप में 20 लाख साल पहले रहने वाले लोगों को हम आखेटक-खाद्य संग्राहक (Hunter-Gatherers) कहते हैं। यह नाम उनके भोजन जुटाने के तरीके पर पड़ा है।
- भोजन: वे जंगली जानवरों का शिकार करते थे, मछलियाँ और चिड़ियाँ पकड़ते थे, और जंगल से फल, मूल, दाने, पौधे, पत्तियाँ और अंडे इकट्ठा करते थे।
- सतर्कता: शिकार करने के लिए उन्हें जानवरों से ज्यादा तेज भागना पड़ता था और बहुत सतर्क रहना पड़ता था। पेड़-पौधों से खाना जुटाने के लिए यह जानना जरूरी था कि कौन से फल जहरीले हैं और कौन से खाने योग्य।
घुमंतू जीवन के 4 वैज्ञानिक कारण (UPSC मुख्य परीक्षा बिंदु):
- संसाधन दबाव (Resource Exhaustion): एक ही जगह रुकने पर वहां के पौधे और जानवर समाप्त हो जाते थे।
- पशु प्रवास (Animal Migration): जानवर चारे की तलाश में घूमते थे, तो शिकारी उनके पीछे-पीछे जाते थे।
- मौसमी चक्र (Seasonal Cycle): अलग-अलग मौसम में फल-फूल अलग जगहों पर उगते थे, इसलिए मानव मौसम के अनुसार पलायन (Migration) करता था।
- जल संकट (Water Scarcity): मौसमी नदियों और झीलों के सूखने पर पानी की तलाश में उन्हें जगह बदलनी पड़ती थी।
3. पत्थरों के औजार और निर्माण तकनीक (Technology of Stone Age)
पुरातत्वविदों को मिले पत्थर, लकड़ी और हड्डियों के औजार उस समय की ‘तकनीक’ (Technology) को दर्शाते हैं।
औजारों के उपयोग:
- फल-फूल काटने के लिए।
- हड्डियाँ और मांस काटने के लिए।
- पेड़ों की छाल और जानवरों की खाल उतारने के लिए।
- कुछ औजारों से भाले और बाण बनाए जाते थे।
- लकड़ियाँ काटने (ईंधन और झोपड़ी बनाने) के लिए।
औजार बनाने की दो तकनीकें:
आरंभिक मानव ने पत्थर से पत्थर टकराकर औजार बनाए।
- पत्थर से पत्थर टकराना (Stone on Stone): इसमें एक हाथ में पत्थर (जिससे औजार बनाना है) और दूसरे हाथ में हथौड़ी जैसा पत्थर होता था। चोट मारकर शल्क (Flakes) निकाले जाते थे।
- दबाव शल्क तकनीक (Pressure Flaking): इसमें क्रोड (Core) को एक स्थिर सतह पर टिकाया जाता था और हड्डी या पत्थर की मदद से दबाव डालकर शल्क निकाले जाते थे ताकि बहुत ही तीखे और महीन औजार बन सकें।
पाषाण काल का वर्गीकरण (Classification)
- पुरापाषाण (Palaeolithic): 20 लाख – 12,000 साल पहले। इसके तीन भाग हैं: आरंभिक, मध्य और उत्तर पुरापाषाण। मानव इतिहास की 99% कहानी इसी काल की है।
- मध्यपाषाण (Mesolithic): 12,000 – 10,000 साल पहले। पहचान: छोटे औजार जिन्हें ‘माइक्रोलिथ’ (Microliths) कहा जाता है।
- नवपाषाण (Neolithic): 10,000 साल पहले से शुरू। पहचान: खेती, पशुपालन और पॉलिश वाले औजार।
4. रहने की जगहें: उद्योग और आवास (Sites Classification)
पुरातत्वविद स्थलों को उनके उपयोग के आधार पर वर्गीकृत करते हैं:
- उद्योग स्थल (Factory Sites): वे स्थान जहाँ अच्छी गुणवत्ता वाले पत्थर मिलते थे और लोग वहां जाकर औजार बनाते थे। यहाँ पत्थरों के टुकड़े और कचरा अधिक मिलता है।
- आवास-सह-उद्योग स्थल (Habitation-cum-factory Sites): कभी-कभी लोग इन उद्योग स्थलों पर लंबे समय तक रहते थे। यहाँ रहने के प्रमाण (राख, भोजन अवशेष) और औजार बनाने के प्रमाण दोनों मिलते हैं।
- आवासीय पुरास्थल (Habitation Sites): जैसे गुफाएं और कंदराएं (भीमबेटका)। लोग यहाँ बारिश, धूप और हवा से बचने के लिए रहते थे। ये अक्सर नर्मदा घाटी जैसे नदी तटों के पास मिली हैं।
केस स्टडी: हुंस्गी (Hunsgi) – कर्नाटक
यह एक महत्वपूर्ण पुरापाषाण कालीन स्थल है।
- यहाँ कई प्रकार के औजार मिले हैं जो संभवतः आवास और उद्योग दोनों कार्यों में आते थे।
- महत्वपूर्ण तथ्य: यहाँ के अधिकांश औजार चूना पत्थर (Limestone) से बनाए जाते थे, जो स्थानीय रूप से उपलब्ध था।
5. आग और बदलती जलवायु (Fire & Climate Change)
कुरनूल गुफाओं (Kurnool Caves) में मिली राख बताती है कि मानव ने आग पर नियंत्रण पा लिया था। यह एक क्रांतिकारी खोज थी जिसने रात को दिन में बदल दिया (प्रकाश), भोजन को सुपाच्य बनाया (पकाना) और सुरक्षा प्रदान की।
12,000 वर्ष पूर्व का जलवायु परिवर्तन:
दुनिया गर्म होने लगी। इसके परिणाम दूरगामी थे:
- घास के मैदान (Grasslands): गर्मी से घास वाले क्षेत्र बढ़े।
- शाकाहारी जीवों की वृद्धि: हिरण, बारहसिंगा, भेड़, बकरी, मवेशी जैसे जानवरों की संख्या तेजी से बढ़ी।
- मानव अवलोकन: लोगों ने इन जानवरों के प्रजनन का समय और भोजन की आदतों को समझना शुरू किया, जिससे ‘पशुपालन’ की नींव पड़ी।
- अनाज का उगना: उपमहाद्वीप के भिन्न भागों में प्राकृतिक रूप से गेहूँ, जौ और धान उगने लगे, जिन्हें लोगों ने भोजन के रूप में बटोरना और बाद में उगाना सीखा।
6. बसने की प्रक्रिया (Domestication Process)
कृषि और पशुपालन कोई एक दिन की घटना नहीं थी, यह हजारों वर्षों की प्रक्रिया थी। इसे ‘घरेलूकरण’ (Domestication) कहते हैं।
चयन का विज्ञान (Science of Selection):
- पौधे: लोगों ने उन पौधों को चुना जिनके दाने बड़े हों, तने मजबूत हों (ताकि पके दानों का भार संभाल सकें) और जिनमें रोग न लगें। बीजों को संभालकर रखा गया ताकि अगली फसल में भी वे ही गुण मिलें।
- जानवर: केवल उन जानवरों को प्रजनन के लिए चुना गया जो अहिंसक (Gentle) थे। यही कारण है कि जंगली जानवर और पालतू जानवरों (जैसे जंगली सुअर vs पालतू सुअर) के दाँतों और सींगों में भारी अंतर होता है।
- क्रम: सबसे पहले कुत्ते को पाला गया, फिर भेड़ और बकरी को। कृषि में सबसे पहले गेहूँ और जौ उगाए गए।
7. एक नवीन जीवन शैली (Storage & Stability)
खेती ने मानव को ‘भविष्य की चिंता’ करना और ‘योजना बनाना’ सिखाया।
- भंडारण (Storage): अनाज को भोजन और बीज दोनों के लिए बचाकर रखना पड़ता था। इसलिए लोगों ने:
- मिट्टी के बड़े बर्तन (Pottery) बनाए।
- टोककरियाँ (Baskets) बुनीं।
- ज़मीन में गड्ढे खोदे।
- पशु: चलते-फिरते खाद्य भंडार: जानवरों की देखभाल करने से दूध मिलता था (महत्वपूर्ण भोजन)। जरूरत पड़ने पर उनसे मांस भी मिल सकता था। इसलिए पशुपालन एक तरह का ‘खाद्य भंडारण’ था।
8. महत्वपूर्ण पुरास्थल और वहां मिले साक्ष्य (UPSC Prelims Special)
नीचे दी गई तालिका UPSC प्रीलिम्स में “Match the Following” प्रश्नों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है:
| पुरास्थल (स्थान) | अनाज और हड्डियाँ (साक्ष्य) |
|---|---|
| मेहरगढ़ (पाकिस्तान) | गेहूँ, जौ, भेड़, बकरी, मवेशी |
| कोल्डीहवा (उत्तर प्रदेश) | चावल, जानवरों की हड्डियों के टुकड़े |
| महागढ़ा (उत्तर प्रदेश) | चावल, मवेशी (खुरों के निशान) |
| गुफकराल (कश्मीर) | गेहूँ और दलहन |
| बुर्ज़होम (कश्मीर) | गेहूँ, दलहन, कुत्ता, मवेशी, भेड़, बकरी |
| चिरांद (बिहार) | गेहूँ, हरे चने, जौ, भैंस, बैल |
| हल्लूर (आंध्र/कर्नाटक) | ज्वार-बाजरा, मवेशी, भेड़, बकरी, सूअर |
| पैयाम्पल्ली (तमिलनाडु) | काला चना, ज्वार-बाजरा, मवेशी, भेड़, सूअर |
9. स्थायी जीवन के साक्ष्य (Archaeological Evidence)
(A) मेहरगढ़ (पाकिस्तान) – सबसे प्राचीन गाँव
बोलन दर्रे के पास स्थित मेहरगढ़ संभवतः वह स्थान है जहाँ स्त्री-पुरुषों ने इस इलाके में सबसे पहले जौ-गेहूँ उगाना सीखा।
- वास्तुकला: यहाँ चौकोर और आयताकार घरों के अवशेष मिले हैं। प्रत्येक घर में 4 या उससे अधिक कमरे थे। कुछ कमरे संभवतः अनाज भंडारण (Storage) के लिए उपयोग होते थे।
- मृत्यु संस्कार: यहाँ के लोग मृत्यु के बाद के जीवन में विश्वास करते थे। कब्रों में मृतकों के साथ सामान रखा जाता था। एक प्रसिद्ध कब्र में मृतक के साथ एक बकरी को दफनाया गया था (संभवतः परलोक में भोजन के लिए)।
(B) बुर्ज़होम (कश्मीर) – गर्तवास
यहाँ के लोग गड्ढे के नीचे घर (Pit-houses) बनाकर रहते थे।
- इनमें उतरने के लिए सीढ़ियाँ होती थीं। ये ठंड और हवा से सुरक्षा देते थे।
- चूल्हे: पुरातत्वविदों को झोपड़ियों के अंदर और बाहर दोनों जगह आग जलाने की जगहें मिली हैं। यह दर्शाता है कि लोग मौसम के अनुसार खाना घर के अंदर या बाहर पकाते थे।
(C) दाओजली हेडिम (असम) – पूर्वोत्तर का साक्ष्य
ब्रह्मपुत्र घाटी की एक पहाड़ी पर स्थित यह पुरास्थल चीन और म्यांमार जाने वाले रास्ते पर है।
- उपकरण: यहाँ खरल और मूसल (Mortar and Pestle) जैसे पत्थर के उपकरण मिले हैं, जो बताते हैं कि लोग अनाज पीसकर खाना बनाते थे।
- जेडाइट (Jadeite): यहाँ एक अति-कठोर पत्थर ‘जेडाइट’ मिला है, जो संभवतः चीन से आया होगा।
- काष्ठाश्म (Fossil Wood): प्राचीन लकड़ी जो सख्त होकर पत्थर बन गई है, उसके औजार भी यहाँ मिले हैं।
10. जनजातीय जीवन और अन्यत्र (Tribal Life & Elsewhere)
जनजाति (Tribe) क्या है?
प्रायः कृषक और पशुपालक समूह में रहते थे जिन्हें ‘जनजाति’ कहते हैं।
- श्रम विभाजन: महिलाएं खेती का अधिकांश काम करती थीं। बच्चे पौधों की रखवाली करते थे। पुरुष जानवरों के बड़े झुंड चराते थे।
- नेतृत्व: अनुभवी वृद्ध व्यक्ति, नौजवान योद्धा या पुरोहित को नेता माना जाता था।
- सांस्कृतिक समृद्धि: इनकी अपनी भाषा, संगीत, कहानियाँ और चित्रकारी होती थी। देवी-देवताओं में अटूट विश्वास था।
अन्यत्र: तुर्की (Çatalhöyük)
नवपाषाण युग का एक प्रसिद्ध पुरास्थल चताल ह्यूक तुर्की में है। यहाँ दूर-दराज से चीजें लाई जाती थीं: सीरिया से चकमक पत्थर, लाल सागर से कौड़ियाँ और भूमध्य सागर से सीपियाँ। ध्यान दें कि उस समय पहिये वाले वाहन नहीं थे।
11. UPSC / BPSC विशेष विश्लेषण (Critical Analysis)
सिविल सेवा परीक्षा के लिए ‘कनेक्टिंग द डॉट्स’ (Connecting the dots) महत्वपूर्ण है:
- सामाजिक संरचना का उदय: जब लोग एक जगह बसने लगे (Settled Life), तो सहयोग की आवश्यकता बढ़ी। इसी से ‘जनजाति’ (Tribes) और बाद में ‘समाज’ का निर्माण हुआ। मेहरगढ़ के घर और कब्रें एक संगठित समाज का संकेत देती हैं।
- अर्थव्यवस्था की शुरुआत: ‘अधिशेष उत्पादन’ (Surplus Production) – यानी जरूरत से ज्यादा अनाज उगाना और उसे स्टोर करना – यही भविष्य के व्यापार और वाणिज्य की नींव थी।
- तकनीकी विकास: पुरापाषाण (खुरदरे औजार) से नवपाषाण (पॉलिशदार और पैने औजार) तक का सफर केवल औजारों का नहीं, बल्कि मानव मस्तिष्क की दक्षता (Efficiency) का विकास है। ओखली-मूसल का प्रयोग आज हजारों साल बाद भी जारी है, जो इसकी उपयोगिता सिद्ध करता है।
12. अभ्यास प्रश्न (20 Practice MCQs – UPSC Prelims Level)
प्रश्न 1: चावल (Rice) के प्राचीनतम साक्ष्य कहाँ से मिले हैं?
- (A) मेहरगढ़
- (B) कोल्डीहवा और महागढ़ा
- (C) बुर्ज़होम
- (D) चिरांद
उत्तर: (B) कोल्डीहवा और महागढ़ा (उत्तर प्रदेश)
प्रश्न 2: ‘गर्तवास’ (Pit-houses) का संबंध किस पुरास्थल से है?
- (A) बुर्ज़होम
- (B) मेहरगढ़
- (C) हल्लूर
- (D) पैयाम्पल्ली
उत्तर: (A) बुर्ज़होम (कश्मीर)
प्रश्न 3: राख के अवशेष (Ash remains) कहाँ मिले हैं, जो आग के उपयोग को दर्शाते हैं?
- (A) भीमबेटका
- (B) हुंस्गी
- (C) कुरनूल गुफाएं
- (D) दाओजली हेडिम
उत्तर: (C) कुरनूल गुफाएं (आंध्र प्रदेश)
प्रश्न 4: मध्यपाषाण काल (Mesolithic) के छोटे औजारों को क्या कहा जाता था?
- (A) मैक्रोलिथ
- (B) माइक्रोलिथ (लघुपाषाण)
- (C) मेगालिथ
- (D) नियोलिथ
उत्तर: (B) माइक्रोलिथ
प्रश्न 5: मेहरगढ़ में किस आकार के घरों के अवशेष मिले हैं?
- (A) गोलाकार
- (B) त्रिभुजाकार
- (C) चौकोर और आयताकार
- (D) पंचभुजाकार
उत्तर: (C) चौकोर और आयताकार
प्रश्न 6: हुंस्गी (कर्नाटक) में औजार किस सामग्री से बनाए जाते थे?
- (A) ग्रेनाइट
- (B) चूना पत्थर (Limestone)
- (C) बलुआ पत्थर
- (D) स्फटिक
उत्तर: (B) चूना पत्थर (Limestone)
प्रश्न 7: मनुष्य द्वारा पालतू बनाया गया सबसे पहला जानवर कौन था?
- (A) भेड़
- (B) बकरी
- (C) कुत्ता
- (D) गाय
उत्तर: (C) कुत्ता
प्रश्न 8: अति-कठोर ‘जेडाइट’ पत्थर कहाँ से मिला है?
- (A) मेहरगढ़
- (B) दाओजली हेडिम
- (C) चिरांद
- (D) पैयाम्पल्ली
उत्तर: (B) दाओजली हेडिम (असम)
प्रश्न 9: मेहरगढ़ की एक कब्र में मृतक के साथ किस जानवर को दफनाया गया था?
- (A) कुत्ता
- (B) भेड़
- (C) बकरी
- (D) सूअर
उत्तर: (C) बकरी
प्रश्न 10: भीमबेटका की गुफाएं किस राज्य में स्थित हैं?
- (A) उत्तर प्रदेश
- (B) मध्य प्रदेश
- (C) महाराष्ट्र
- (D) गुजरात
उत्तर: (B) मध्य प्रदेश
प्रश्न 11: दुनिया की जलवायु में बड़े बदलाव (गर्मी बढ़ना) कब आए?
- (A) 20 लाख साल पहले
- (B) 12,000 साल पहले
- (C) 10,000 साल पहले
- (D) 4,700 साल पहले
उत्तर: (B) 12,000 साल पहले
प्रश्न 12: नवपाषाण युग (Neolithic Age) की शुरुआत कब से मानी जाती है?
- (A) 12,000 साल पहले
- (B) 10,000 साल पहले
- (C) 8,000 साल पहले
- (D) 2,500 साल पहले
उत्तर: (B) 10,000 साल पहले
प्रश्न 13: खरल और मूसल (Mortar and Pestle) जैसे उपकरण कहाँ मिले हैं?
- (A) भीमबेटका
- (B) दाओजली हेडिम
- (C) कुरनूल
- (D) इनामगाँव
उत्तर: (B) दाओजली हेडिम
प्रश्न 14: चिरांद (Chirand) पुरास्थल किस राज्य में स्थित है?
- (A) झारखंड
- (B) पश्चिम बंगाल
- (C) बिहार
- (D) ओडिशा
उत्तर: (C) बिहार
प्रश्न 15: काला चना और ज्वार-बाजरा के साक्ष्य कहाँ से मिले हैं?
- (A) गुफकराल
- (B) पैयाम्पल्ली (तमिलनाडु)
- (C) मेहरगढ़
- (D) कोल्डीहवा
उत्तर: (B) पैयाम्पल्ली
प्रश्न 16: प्रसिद्ध नवपाषाणिक पुरास्थल ‘चताल ह्यूक’ (Çatalhöyük) किस देश में है?
- (A) ईरान
- (B) इराक
- (C) तुर्की (Turkey)
- (D) मिस्र
उत्तर: (C) तुर्की
प्रश्न 17: भीमबेटका की गुफाएं किसके लिए प्रसिद्ध हैं?
- (A) बौद्ध स्तूप
- (B) विष्णु मंदिर
- (C) शैल चित्रकला (Rock Paintings)
- (D) लौह स्तंभ
उत्तर: (C) शैल चित्रकला
प्रश्न 18: गुफकराल (Gufkral) पुरास्थल भारत में कहाँ स्थित है?
- (A) हिमाचल प्रदेश
- (B) कश्मीर
- (C) उत्तराखंड
- (D) पंजाब
उत्तर: (B) कश्मीर
प्रश्न 19: ‘पुरापाषाण’ (Palaeolithic) शब्द का शाब्दिक अर्थ क्या है?
- (A) नया पत्थर
- (B) मध्य पत्थर
- (C) प्राचीन पत्थर (Old Stone)
- (D) छोटा पत्थर
उत्तर: (C) प्राचीन पत्थर
प्रश्न 20: ‘उद्योग स्थल’ (Factory Sites) का क्या अर्थ था?
- (A) जहाँ अनाज उगाया जाता था
- (B) जहाँ औजार बनाए जाते थे
- (C) जहाँ जानवर पाले जाते थे
- (D) जहाँ बाजार लगता था
उत्तर: (B) जहाँ औजार बनाए जाते थे
13. मुख्य परीक्षा प्रश्न (Mains Analytical Questions)
प्रश्न: नवपाषाण क्रांति ने मानव जीवन को किस प्रकार बदला? ‘घरेलूकरण’ की प्रक्रिया को समझाते हुए उत्तर दें।
उत्तर संकेत: नवपाषाण क्रांति ने मनुष्य को ‘खाद्य संग्राहक’ से ‘खाद्य उत्पादक’ बनाया। घरेलूकरण (Domestication) वह प्रक्रिया थी जिसके तहत मानव ने पौधों और जानवरों को अपनी जरूरतों के अनुसार ढालना शुरू किया (चयन प्रक्रिया)। इसके परिणाम स्वरूप स्थायी निवास (गाँव), अन्न भंडारण (Pottery), और नए कौशल (बुनाई, बर्तन बनाना) का विकास हुआ। यह केवल भोजन का बदलाव नहीं, बल्कि पूरी जीवन शैली का बदलाव था।
14. अध्याय सारांश (Comprehensive Conclusion)
संक्षेप में, यह अध्याय मानव की “अस्थिरता से स्थिरता” की यात्रा है। 20 लाख वर्षों तक भटकने के बाद, पिछले 10,000 वर्षों में मानव ने एक जगह टिकना सीखा। भीमबेटका की गुफाओं से निकलकर मनुष्य मेहरगढ़ के ईंटों वाले घरों तक पहुंचा। आग, पहिया (अप्रत्यक्ष रूप से), और खेती इस यात्रा के तीन सबसे बड़े साथी थे। आज हम जिस समाज में रहते हैं, उसकी पहली ईंट इसी काल में रखी गई थी।
15. परीक्षा के लिए ‘गोल्डन पॉइंट्स’ (Golden Points for Revision)
- पुरापाषाण (Palaeolithic): 20 लाख – 12,000 साल पहले (आग की खोज, बड़े औजार)।
- मध्यपाषाण (Mesolithic): 12,000 – 10,000 साल पहले (जलवायु गर्म हुई, माइक्रोलिथ औजार)।
- नवपाषाण (Neolithic): 10,000 साल पहले से (खेती, पहिया, पॉलिश वाले औजार, स्थायी जीवन)।
- पहला पालतू पशु: कुत्ता (शिकार और सुरक्षा के लिए)।
- पहली फसलें: गेहूँ और जौ।
- मेहरगढ़: आयताकार घर, बकरी के साथ दफन।
- बुर्ज़होम: गर्तवास (Pit-houses), राख (अंदर/बाहर)।
- हुंस्गी: चूना पत्थर के औजार।
- दाओजली हेडिम: जेडाइट पत्थर, खरल-मूसल।



