Class 6 History Chapter 1: क्या, कहाँ, कैसे और कब?

Class 6 History Chapter 1 What Where How and When UPSC Foundation Notes in Hindi
कक्षा 6 इतिहास अध्याय 1 – क्या, कहाँ, कैसे और कब? | UPSC फाउंडेशन के लिए सरल और विस्तृत नोट्स
Class 6 History Chapter 1 – UPSC Detailed Guide

कक्षा 6 इतिहास – अध्याय 1: क्या, कब, कहाँ और कैसे?
(विस्तृत UPSC/IAS फाउंडेशन गाइड)

1. अध्याय परिचय और UPSC के लिए महत्व

नमस्कार दोस्तों। आज हम इतिहास की नींव को और गहराई से समझेंगे। कक्षा 6 की NCERT पुस्तक “हमारे अतीत – I” (Our Pasts – I) का पहला अध्याय केवल एक पाठ नहीं, बल्कि इतिहास को देखने का एक नजरिया है। UPSC, BPSC और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं में ‘Ancient History’ (प्राचीन इतिहास) को समझने के लिए यह अध्याय “Gateway” (प्रवेश द्वार) की तरह है।

UPSC Aspirants के लिए विशेष नोट:
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में भौगोलिक स्थानों (Map Locations) और प्राचीन शब्दावली (Terminology) से सीधे प्रश्न आते हैं। मुख्य परीक्षा (Mains) में, यह अध्याय आपको यह समझने में मदद करता है कि भारतीय संस्कृति और समाज का विकास क्रमिक रूप से कैसे हुआ।

2. इतिहास क्या है? (What is History?)

इतिहास को अक्सर “बीती हुई बातों का अध्ययन” कहा जाता है, लेकिन एक प्रशासक (Administrator) के रूप में आपको इसे अलग तरह से देखना होगा। इतिहास ‘बदलाव’ (Change) और ‘निरंतरता’ (Continuity) का अध्ययन है।

  • सामाजिक विकास: यह हमें बताता है कि मानव समाज ‘शिकारी-संग्राहक’ (Hunter-Gatherer) से ‘आधुनिक नागरिक’ कैसे बना।
  • अतीत बनाम वर्तमान: इतिहास हमें यह समझने में मदद करता है कि हमारी वर्तमान भाषाएँ, खान-पान, और रीति-रिवाज कैसे विकसित हुए। उदाहरण के लिए, आज हम जो चाय पीते हैं या ट्रेन में सफर करते हैं, उसका अपना एक इतिहास है।
  • आम लोगों की कहानी: इतिहास सिर्फ राजाओं और युद्धों की तारीखें नहीं हैं; यह उस समय के बच्चे, महिलाएं, किसान और व्यापारियों की जीवन शैली को समझने का साधन है।

3. हम अतीत के बारे में क्या जान सकते हैं?

इतिहास के माध्यम से हम मानव जीवन के हर पहलू को उजागर कर सकते हैं। इसे हम तीन मुख्य श्रेणियों में बाँट सकते हैं:

  1. बुनियादी ज़रूरतें (Basic Needs):
    • भोजन: क्या लोग कच्चा मांस खाते थे या पका हुआ? कंद-मूल फल खाते थे या अनाज? (जैसे- सुलेमान पहाड़ियों में गेहूँ और जौ)।
    • वस्त्र: क्या उन्होंने कपास (Cotton) उगाना सीखा था या वे जानवरों की खाल और पेड़ों की छाल पहनते थे?
    • आवास: वे गुफाओं (Caves) में रहते थे, गड्ढे वाले घरों (Pit-houses) में, या पक्की ईंटों के मकानों में?
  2. सामाजिक वर्ग (Social Classes): हम अलग-अलग पेशों के बारे में जान सकते हैं – जैसे शिकारी (Hunters), पशुपालक (Herders), कृषक (Farmers), शासक (Rulers), व्यापारी (Merchants), पुरोहित (Priests), शिल्पकार (Craftspersons)।
  3. सांस्कृतिक जीवन: बच्चे कौन से खेल खेलते थे (जैसे – गिल्ली-डंडा या चौपड़), कौन सी लोरी सुनते थे, और कौन से नाटक देखते थे। यह ‘सांस्कृतिक इतिहास’ का हिस्सा है।

4. लोग कहाँ रहते थे? (भौगोलिक विश्लेषण)

इतिहास और भूगोल का गहरा संबंध है। लोग हमेशा नदियों के किनारे ही क्यों बसे? क्योंकि नदी पानी, मछली (भोजन) और परिवहन का साधन थी। आइए मानचित्र के प्रमुख स्थानों को विस्तार से समझें:

(A) नर्मदा नदी घाटी (जीवन का आरंभ)

नर्मदा घाटी (मध्य प्रदेश) मानव सभ्यता के सबसे पुराने साक्ष्यों में से एक है।

  • लाखों वर्ष पुराना इतिहास: यहाँ लोग लाखों वर्षों से रह रहे हैं। भीमबेटका (Bhimbetka) की गुफाएं इसका प्रमाण हैं।
  • संग्राहक (Gatherers): यहाँ के लोग ‘आखेटक-खाद्य संग्राहक’ (Hunter-Gatherers) थे। वे भोजन खुद नहीं उगाते थे, बल्कि जंगल से कंद, मूल और फल इकट्ठा करते थे।
  • संपदा का ज्ञान: उन्हें पता था कि जंगल में कौन सा पौधा विषैला है और कौन सा औषधीय। यह ज्ञान पीढ़ी-दर-पीढ़ी सौंपा जाता था।

(B) सुलेमान और किरथर पहाड़ियाँ (कृषि की शुरुआत)

यह क्षेत्र वर्तमान पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर है। यह एक ‘संक्रमण क्षेत्र’ (Transition Zone) था।

  • नवपाषाण क्रांति (Neolithic Revolution): लगभग 8000 वर्ष पूर्व यहाँ मानव ने सबसे पहले खेती करना शुरू किया।
  • मुख्य फसलें: गेहूँ (Wheat) और जौ (Barley)। ध्यान दें, चावल यहाँ नहीं उगाया गया था।
  • पशुपालन: शिकार के बजाय, उन्होंने भेड़, बकरी और गाय-बैल को पालना शुरू किया, जो दूध और मांस दोनों देते थे।
  • स्थायी निवास: खेती के कारण लोगों को एक जगह टिक कर रहना पड़ा, जिससे ‘गाँव’ (Villages) का निर्माण हुआ। मेहरगढ़ (Mehrgarh) इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है।

(C) गारो और विंध्य पहाड़ियाँ (चावल का क्षेत्र)

गारो (मेघालय, उत्तर-पूर्व) और विंध्य (मध्य भारत) में कृषि का स्वतंत्र विकास हुआ।

  • विंध्य के उत्तर में: यह वह स्थान है जहाँ सबसे पहले चावल (Rice) उगाया गया। यह इलाका इलाहाबाद (प्रयागराज) के आसपास का (कोल्डीहवा क्षेत्र) माना जाता है।
  • यह प्रमाण देता है कि भारत में कृषि का विकास केवल एक जगह नहीं, बल्कि अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग समय में हुआ।

(D) सिंधु और सहायक नदियाँ (प्रथम नगरीकरण)

इसे ‘प्रथम नगरीकरण’ (First Urbanisation) कहा जाता है।

  • 4700 वर्ष पूर्व: जब दुनिया के कई हिस्से अभी भी आदिम अवस्था में थे, सिंधु घाटी में पक्के मकानों वाले शहर (जैसे हड़प्पा और मोहनजोदड़ो) बन चुके थे।
  • ये शहर अपनी जल निकासी व्यवस्था (Drainage System) और व्यापार के लिए प्रसिद्ध थे।

(E) गंगा घाटी और मगध (द्वितीय नगरीकरण)

गंगा के मैदानों में शहरों का विकास सिंधु घाटी के काफी बाद (लगभग 2500 वर्ष पूर्व) हुआ।

  • मगध का उदय: गंगा और सोन नदी के संगम पर स्थित मगध (आधुनिक बिहार) सबसे शक्तिशाली जनपद बना।
  • कारण:
    1. नदियों से व्यापार और यातायात आसान था।
    2. उपजाऊ मिट्टी से अच्छी फसल होती थी (कर/Tax ज्यादा मिलता था)।
    3. पास के जंगलों (झारखंड) से हाथी मिलते थे (सेना के लिए) और लोहा मिलता था (हथियार के लिए)।

7. देश के नाम: भारत और इंडिया (व्युत्पत्ति विज्ञान)

देश के नामकरण की प्रक्रिया भाषाई बदलाव का एक बेहतरीन उदाहरण है।

  • ‘इंडिया’ का सफर:
    संस्कृत: सिंधु (Sindhu) → ईरानी/फ़ारसी: हिंदोस (Hindos) → यूनानी: इंडोस (Indos) → अंग्रेजी: इंडिया (India)।
    ईरानियों और यूनानियों ने सिंधु नदी के पूर्व (East) में स्थित पूरे भूमि भाग को ‘इंडिया’ कहा।
  • ‘भारत’ का सफर:
    ऋग्वेद (1500 BC) में ‘भरत’ नाम का एक कबीला (जन) था जो उत्तर-पश्चिम भारत में रहता था। धीरे-धीरे इस कबीले के नाम पर पूरे देश का नाम ‘भारतवर्ष’ या ‘भारत’ पड़ गया।

इतिहास के स्रोत (Detailed Sources of History)

इतिहासकार और पुरातत्वविद् जासूसों की तरह काम करते हैं। वे तीन मुख्य स्रोतों का उपयोग करते हैं:

(A) पाण्डुलिपियाँ (Manuscripts) – लिखित साक्ष्य

‘Manu’ (हाथ) + ‘Script’ (लेखन)। यह अतीत की हस्तलिखित पुस्तकें हैं।

  • निर्माण: ताड़ के पत्तों (Palm leaves) को काटकर और एक साथ बांधकर किताब बनाई जाती थी। या फिर हिमालय में मिलने वाले ‘भूर्ज’ पेड़ की छाल (Birch bark) पर लिखा जाता था।
  • संरक्षण: ये बहुत नाजुक होती थीं। कीड़ों ने कई को नष्ट कर दिया, लेकिन मंदिरों और बौद्ध विहारों में कई सुरक्षित बची रहीं।
  • विषय विविधता: विज्ञान, दवाइयां, धार्मिक मान्यताएं, राजाओं का जीवन, कविताएं और नाटक।
  • भाषा:
    • संस्कृत: विद्वानों और ब्राह्मणों की भाषा।
    • प्राकृत: आम जनता की भाषा (महावीर और बुद्ध ने इसी में उपदेश दिए)।
    • तमिल: दक्षिण भारत का प्राचीन साहित्य (संगम साहित्य)।

(B) अभिलेख (Inscriptions) – अमिट साक्ष्य

पत्थर या धातु जैसी कठोर सतहों पर उकेरे गए लेख।

  • उद्देश्य:
    1. राजकीय आदेश: राजा चाहते थे कि लोग उनके नियमों को पढ़ें और पालन करें (जैसे अशोक के धम्म)।
    2. प्रशस्ति (Prashasti): राजाओं की प्रशंसा और उपलब्धियों का वर्णन (जैसे समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति)।
    3. दान रिकॉर्ड: मंदिरों या ब्राह्मणों को दी गई भूमि का विवरण।
  • केस स्टडी – अशोक का कांधार अभिलेख: यह लगभग 2250 वर्ष पुराना है। यह द्विभाषी (Bilingual) है – यूनानी (Greek) और अरामाइक (Aramaic)। यह दिखाता है कि उस समय अफगानिस्तान में ये दोनों भाषाएँ बोली/समझी जाती थीं।

(C) पुरातत्व (Archaeology) – भौतिक साक्ष्य

पुरातत्वविद् जमीन के अंदर दबे इतिहास को बाहर निकालते हैं।

  • उत्खनन (Excavation): टीलों (Mounds) की खुदाई करना।
  • स्तर-विन्यास (Stratigraphy): खुदाई में जो वस्तु जितनी गहराई में मिलती है, वह उतनी ही पुरानी मानी जाती है (सामान्यतः)।
  • क्या मिलता है?: औजार (Tools), हथियार (Weapons), बर्तन (Pots), आभूषण (Ornaments), सिक्के (Coins), और इमारतों के अवशेष।
  • जैविक अवशेष: जानवरों, पक्षियों और मछलियों की हड्डियाँ बताती हैं कि लोग क्या खाते थे। जली हुई लकड़ी या अनाज के दाने (Carbonized grains) कार्बन डेटिंग के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।

एक अतीत या अनेक? (One Past or Many?)

क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी किताब का नाम “हमारे अतीत” (बहुवचन) क्यों है? “हमारा अतीत” क्यों नहीं?

  • विविधता का सम्मान: भारत में अलग-अलग समूहों का इतिहास अलग-अलग था।
  • अंडमान द्वीप के लोगों का इतिहास (मछली पकड़ना, शिकार करना) शहर में रहने वाले लोगों (आपूर्ति पर निर्भर) से बिल्कुल अलग था।
  • राजाओं का जीवन (जो रिकॉर्ड रखते थे) किसानों के जीवन (जो रिकॉर्ड नहीं रखते थे) से अलग था।
  • इसलिए, हम केवल एक इतिहास नहीं, बल्कि ‘अनेक इतिहास’ (Many Pasts) पढ़ते हैं।

इतिहास का अन्य विषयों से संबंध (Interdisciplinary Connection)

UPSC की तैयारी में विषयों को जोड़ना (Connecting the dots) बहुत जरूरी है।

  • इतिहास + भूगोल: हिमालय ने भारत को मध्य एशिया के आक्रमणों से बचाया, लेकिन खैबर और बोलन दर्रों (Passes) ने व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का रास्ता दिया। बिना भूगोल के इतिहास अधूरा है।
  • इतिहास + राजनीति विज्ञान (Polity): ‘जनपद’ से ‘महाजनपद’ और फिर ‘साम्राज्य’ (Empire) का बनना हमें राज्य निर्माण (State Formation) की प्रक्रिया सिखाता है।
  • इतिहास + अर्थशास्त्र (Economy): कृषि अधिशेष (Surplus Agriculture) ने व्यापार को जन्म दिया, व्यापार ने सिक्कों (Coins) को जन्म दिया, और सिक्कों ने बाज़ार और शहरों को जन्म दिया।

11. तिथियों का मतलब (Detailed Timeline & Chronology)

इतिहास में समय की गणना ईसाई धर्म प्रवर्तक ईसा मसीह (Jesus Christ) के जन्म को आधार मानकर की जाती है। इसे ‘शून्य’ बिंदु (Zero Point) मान लें।

शब्दावली पूर्ण रूप हिंदी अर्थ व विवरण
BC Before Christ ईसा पूर्व। यह उल्टी गिनती है। (जैसे 500 BC, 200 BC से पुराना है)।
AD Anno Domini ‘ईश्वर का वर्ष’। ईसा मसीह के जन्म के बाद। (जैसे 2023 AD)।
CE Common Era यह AD का धर्मनिरपेक्ष (Secular) विकल्प है। आजकल यही प्रयोग होता है।
BCE Before Common Era यह BC का धर्मनिरपेक्ष विकल्प है।
BP Before Present ‘वर्तमान से पहले’। वैज्ञानिक डेटिंग में इसका प्रयोग होता है।

18. अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs – UPSC Foundation)

प्रश्न 1: निम्नलिखित में से किस स्थान पर सबसे पहले चावल (Rice) उपजाया गया?

  • (A) सुलेमान और किरथर पहाड़ियाँ
  • (B) गारो पहाड़ियाँ
  • (C) विंध्य पहाड़ियों के उत्तर में (कोल्डीहवा)
  • (D) सिंधु नदी के किनारे

उत्तर: (C) विंध्य पहाड़ियों के उत्तर में

प्रश्न 2: ‘पाण्डुलिपि’ (Manuscript) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. ये आमतौर पर ताड़पत्रों या भूर्ज पेड़ की छाल पर लिखी जाती थीं।
  2. ये पत्थर और धातु जैसी कठोर सतहों पर लिखी जाती थीं।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सत्य है/हैं?

  • (A) केवल 1
  • (B) केवल 2
  • (C) 1 और 2 दोनों
  • (D) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (A) केवल 1 (कठोर सतह पर अभिलेख होते थे, पाण्डुलिपि नहीं)

प्रश्न 3: ‘इंडिया’ शब्द की उत्पत्ति किस नदी से हुई है?

  • (A) गंगा
  • (B) सिंधु (Indus)
  • (C) ब्रह्मपुत्र
  • (D) नर्मदा

उत्तर: (B) सिंधु (Indus)

प्रश्न 4: मगध साम्राज्य का उत्कर्ष किस नदी के किनारे हुआ?

  • (A) सिंधु
  • (B) नर्मदा
  • (C) गंगा और सोन
  • (D) कावेरी

उत्तर: (C) गंगा और सोन

प्रश्न 5: अशोक का कांधार अभिलेख किन दो लिपियों में लिखा गया था?

  • (A) ब्राह्मी और खरोष्ठी
  • (B) यूनानी और अरामाइक
  • (C) संस्कृत और तमिल
  • (D) देवनागरी और प्राकृत

उत्तर: (B) यूनानी और अरामाइक

19. मुख्य परीक्षा के लिए प्रश्न (Mains Descriptive Questions)

प्रश्न 1: साधारण स्त्री और पुरुष अपने कार्यों का विवरण क्यों नहीं रखते थे?
उत्तर संकेत: उस समय आम लोग (शिकारी, मछुआरे, संग्राहक, कृषक) अपने दैनिक जीवन के संघर्षों, भोजन जुटाने और खेती में व्यस्त रहते थे। संभवतः वे पढ़ना-लिखना नहीं जानते थे। उनके पास राजाओं की तरह अभिलेख लिखवाने के संसाधन (धन) भी नहीं थे, और न ही वे अपनी उपलब्धियों को इतना महत्वपूर्ण मानते थे कि उसे पत्थरों पर उकेरा जाए। इसलिए इतिहास में उनका लिखित रिकॉर्ड कम मिलता है।

प्रश्न 2: पुरातत्वविदों को अतीत की जानकारी कैसे मिलती है? स्रोतों का महत्व समझाएं।
उत्तर संकेत: पुरातत्वविदों को खुदाई में मिले बर्तनों, औजारों, आभूषणों, हड्डियों, सिक्कों और इमारतों के अवशेषों से जानकारी मिलती है। ये भौतिक साक्ष्य ‘निष्पक्ष’ होते हैं। उदाहरण के लिए, एक राजा का अभिलेख झूठ बोल सकता है (अतिशयोक्ति), लेकिन खुदाई में मिली एक आम आदमी की झोपड़ी या अनाज के दाने उस समय की वास्तविक आर्थिक स्थिति बयां करते हैं।

20. विस्तृत अध्याय निष्कर्ष (Comprehensive Conclusion)

इस अध्याय की समाप्ति पर, एक सिविल सेवा अभ्यर्थी (UPSC Aspirant) के रूप में हमें यह समझना होगा कि इतिहास केवल ‘तथ्यों का संग्रह’ नहीं, बल्कि ‘मानव विकास की यात्रा’ का विश्लेषण है। इस अध्याय का विस्तृत निष्कर्ष निम्नलिखित 4 मुख्य स्तंभों पर आधारित है:

  • 1. भौगोलिक नियतिवाद (Geographical Context): हमने देखा कि प्रारंभिक सभ्यताएँ यादृच्छिक (random) स्थानों पर नहीं, बल्कि विशिष्ट भौगोलिक कारणों से पनपीं। नर्मदा में भोजन की उपलब्धता ने ‘संग्रहण’ सिखाया, तो उपजाऊ सुलेमान पहाड़ियों ने ‘कृषि’ और सिंधु की विशालता ने ‘नगरीकरण’ (Urbanisation) को जन्म दिया। भूगोल ही इतिहास का मंच तैयार करता है।
  • 2. साक्ष्यों का संतुलन (Balance of Sources): इतिहास को जानने के लिए केवल एक स्रोत पर्याप्त नहीं है। जहाँ पाण्डुलिपियां हमें धार्मिक और सामाजिक मान्यताओं का ‘सॉफ्ट डेटा’ देती हैं, वहीं अभिलेख और पुरातत्व (सिक्के, औजार) हमें राजनीतिक विस्तार और आर्थिक स्थिति का ‘हार्ड डेटा’ प्रदान करते हैं। एक निष्पक्ष इतिहासकार इन सभी को मिलाकर सत्य का निर्माण करता है।
  • 3. ‘अतीत’ की बहुलता (Plurality of Pasts): NCERT का शीर्षक “हमारे अतीत” (बहुवचन) यह याद दिलाता है कि भारत का इतिहास एकरूपी (Monolithic) नहीं है। एक अंडमान के आदिवासी, एक मगध के किसान और एक हस्तिनापुर के राजा का इतिहास अलग-अलग चला है। भारतीय समाज की इस विविधता को समझना ही प्रशासन की कुंजी है।
  • 4. कालक्रम की समझ (Chronology): ईसा मसीह के जन्म को केंद्र मानकर (BC/AD) हमने समय की एक वैश्विक भाषा सीखी, जो हमें भारतीय घटनाओं को विश्व इतिहास (जैसे मेसोपोटामिया या मिस्र) के साथ तुलना करने में सक्षम बनाती है।

अंतिम विचार: यह अध्याय वह नींव है जिस पर प्राचीन भारत का पूरा ढांचा खड़ा है। सिंधु घाटी सभ्यता, वैदिक काल और महाजनपदों को समझने के लिए, ‘क्या, कब, कहाँ और कैसे’ का यह ढांचा हमेशा आपके दिमाग में रहना चाहिए।

21. परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • 8000 वर्ष पूर्व: कृषि का आरंभ (गेहूँ/जौ) – सुलेमान और किरथर (पाकिस्तान)।
  • चावल का साक्ष्य: विंध्य पहाड़ियों के उत्तर में (कोल्डीहवा/इलाहाबाद)।
  • 4700 वर्ष पूर्व: सिंधु नदी के किनारे प्रथम नगर (हड़प्पा सभ्यता)।
  • 2500 वर्ष पूर्व: गंगा घाटी में द्वितीय नगरीकरण और मगध साम्राज्य।
  • पाण्डुलिपि (Manuscript): ताड़पत्र/भूर्ज छाल (नरम)।
  • अभिलेख (Inscription): पत्थर/धातु (कठोर)।
  • इंडिया: इंडस (सिंधु) से निकला।
  • भारत: ऋग्वेद में उल्लेखित लोगों के समूह (कबीले) के नाम से।

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Manikant kumar Yadav
Manikant kumar Yadav

नमस्कार! मैं हूँ SelfShiksha का संस्थापक, और मेरा मकसद है शिक्षा को आसान बनाना। इस वेबसाइट के माध्यम से मैं छात्रों को बोर्ड परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा और करियर से जुड़ी सटीक जानकारी प्रदान करता हूँ, ताकि हर छात्र अपनी मंज़िल पा सके।

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