NCERT कक्षा 10 विज्ञान – अध्याय 9: प्रकाश – परावर्तन तथा अपवर्तन (Light – Reflection and Refraction)
(सम्पूर्ण विस्तृत गाइड: किरण आरेख, संख्यात्मक प्रश्न, सूत्र और परीक्षा टिप्स)
विषय सूची
- परिचय: प्रकाश क्या है?
- प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light)
- गोलीय दर्पण (Spherical Mirrors): अवतल और उत्तल
- गोलीय दर्पणों द्वारा प्रतिबिंब बनना (किरण आरेख)
- दर्पण सूत्र और आवर्धन
- प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light)
- काँच के आयताकार स्लैब से अपवर्तन
- अपवर्तनांक (Refractive Index)
- गोलीय लेंस (Spherical Lenses)
- लेंस सूत्र, आवर्धन और लेंस की क्षमता
- बोर्ड परीक्षा विशेष: प्रश्न और रणनीतियाँ
1. परिचय: प्रकाश क्या है?
नमस्ते प्रिय विद्यार्थियों! कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 9 ‘प्रकाश – परावर्तन तथा अपवर्तन’ भौतिक विज्ञान (Physics) की नींव है। बोर्ड परीक्षा में इस अध्याय से सबसे अधिक संख्यात्मक प्रश्न (Numericals) और आरेख (Diagrams) पूछे जाते हैं।
प्रकाश (Light) ऊर्जा का वह रूप है जो हमें वस्तुओं को देखने की संवेदनना प्रदान करता है। हम वस्तुओं को तभी देख पाते हैं जब प्रकाश वस्तु से टकराकर हमारी आँखों तक पहुँचता है।
प्रकाश के गुण:
- प्रकाश सदैव सरल रेखा (Straight Line) में गमन करता है।
- इसे गमन करने के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती (यह निर्वात/Vacuum में भी चल सकता है)।
- निर्वात में प्रकाश की चाल सबसे अधिक होती है: 3 × 108 m/s।
- प्रकाश जब किसी सतह पर पड़ता है, तो उसका परावर्तन, अपवर्तन या अवशोषण हो सकता है।
2. प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light)
जब प्रकाश किसी पॉलिश की हुई चमकदार सतह (जैसे दर्पण) से टकराकर वापस उसी माध्यम में लौट आता है, तो इसे प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।
परावर्तन के नियम (Laws of Reflection)
ये नियम सभी प्रकार की परावर्तक सतहों (समतल या गोलीय) पर लागू होते हैं:
- प्रथम नियम: आपतन कोण (∠i) सदैव परावर्तन कोण (∠r) के बराबर होता है।
(∠i = ∠r) - द्वितीय नियम: आपतित किरण, दर्पण के आपतन बिंदु पर अभिलंब तथा परावर्तित किरण, सभी एक ही तल में होते हैं।
3. गोलीय दर्पण (Spherical Mirrors)
ऐसा दर्पण जिसका परावर्तक पृष्ठ किसी खोखले गोले का भाग होता है, गोलीय दर्पण कहलाता है। ये दो प्रकार के होते हैं:
- अवतल दर्पण (Concave Mirror): इसका परावर्तक पृष्ठ अंदर की ओर धंसा होता है (चम्मच का भीतरी भाग)। यह प्रकाश किरणों को एक बिंदु पर इकट्ठा करता है, इसलिए इसे अभिसारी दर्पण (Converging Mirror) भी कहते हैं।
- उत्तल दर्पण (Convex Mirror): इसका परावर्तक पृष्ठ बाहर की ओर उभरा होता है (चम्मच का बाहरी भाग)। यह प्रकाश किरणों को फैला देता है, इसलिए इसे अपसारी दर्पण (Diverging Mirror) कहते हैं।
दर्पण से संबंधित मुख्य शब्दावली
- ध्रुव (Pole – P): परावर्तक पृष्ठ का केंद्र बिंदु।
- वक्रता केंद्र (Centre of Curvature – C): उस गोले का केंद्र जिसका दर्पण एक भाग है।
- वक्रता त्रिज्या (Radius of Curvature – R): ध्रुव और वक्रता केंद्र के बीच की दूरी।
- मुख्य अक्ष (Principal Axis): ध्रुव (P) और वक्रता केंद्र (C) को मिलाने वाली सीधी रेखा।
- मुख्य फोकस (Principal Focus – F):
- अवतल दर्पण: मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली किरणें परावर्तन के बाद जिस बिंदु पर वास्तव में मिलती हैं।
- उत्तल दर्पण: मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली किरणें परावर्तन के बाद जिस बिंदु से आती हुई प्रतीत होती हैं।
- फोकस दूरी (Focal Length – f): ध्रुव (P) और फोकस (F) के बीच की दूरी।
महत्वपूर्ण संबंध: R = 2f (वक्रता त्रिज्या, फोकस दूरी की दोगुनी होती है)।
4. गोलीय दर्पणों द्वारा प्रतिबिंब बनना (किरण आरेख)
प्रतिबिंब की स्थिति और प्रकृति ज्ञात करने के लिए हमें कम से कम दो परावर्तित किरणों के प्रतिच्छेदन (Intersection) की आवश्यकता होती है।
(क) अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब (6 स्थितियाँ)
यह भाग परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
| बिंब (वस्तु) की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | प्रतिबिंब का आकार | प्रतिबिंब की प्रकृति |
|---|---|---|---|
| 1. अनंत पर (At Infinity) | फोकस (F) पर | अत्यधिक छोटा (बिंदु आकार) | वास्तविक एवं उल्टा |
| 2. C से परे (Beyond C) | F तथा C के बीच | छोटा | वास्तविक एवं उल्टा |
| 3. C पर (At C) | C पर | समान आकार | वास्तविक एवं उल्टा |
| 4. C तथा F के बीच | C से परे | बड़ा (आवर्धित) | वास्तविक एवं उल्टा |
| 5. F पर (At F) | अनंत पर | अत्यधिक बड़ा | वास्तविक एवं उल्टा |
| 6. P तथा F के बीच (विशेष स्थिति) | दर्पण के पीछे | बड़ा | आभासी एवं सीधा |
(नोट: छठी स्थिति का प्रयोग हजामती दर्पण/शेविंग मिरर और दाँतों के डॉक्टर द्वारा किया जाता है।)
(ख) उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब (2 स्थितियाँ)
उत्तल दर्पण सदैव आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है।
| बिंब की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | आकार | प्रकृति |
|---|---|---|---|
| 1. अनंत पर | दर्पण के पीछे F पर | अत्यधिक छोटा | आभासी एवं सीधा |
| 2. अनंत तथा P के बीच कहीं भी | दर्पण के पीछे P तथा F के बीच | छोटा | आभासी एवं सीधा |
दर्पणों के उपयोग (Uses)
- अवतल दर्पण: टॉर्च, सर्चलाइट, गाड़ियों की हेडलाइट (किरणों को समांतर करने के लिए), शेविंग मिरर, सौर भट्ठी (सूर्य के प्रकाश को केंद्रित करने के लिए)।
- उत्तल दर्पण: वाहनों के पश्च-दृश्य दर्पण (Rear-view mirror) के रूप में।
कारण: यह सदैव सीधा प्रतिबिंब बनाता है और इसका दृष्टि-क्षेत्र (Field of view) बहुत विस्तृत होता है (बाहर की ओर वक्रित होने के कारण)।
5. दर्पण सूत्र और आवर्धन
चिह्न परिपाटी (Sign Convention) – अत्यंत महत्वपूर्ण
संख्यात्मक प्रश्न हल करते समय गलतियाँ यहीं होती हैं। इसे ध्यान से समझें:
- सभी दूरियाँ ध्रुव (P) से मापी जाती हैं।
- आपतित प्रकाश की दिशा (बाएँ से दाएँ) में मापी गई दूरियाँ धनात्मक (+) होती हैं।
- आपतित प्रकाश की विपरीत दिशा (दाएँ से बाएँ) में मापी गई दूरियाँ ऋणात्मक (-) होती हैं।
- मुख्य अक्ष के ऊपर की ऊँचाई (+) और नीचे की ऊँचाई (-) होती है।
- बिंब दूरी (u): सदैव ऋणात्मक (-)।
- फोकस दूरी (f): अवतल दर्पण के लिए (-), उत्तल दर्पण के लिए (+)।
सूत्र
1. दर्पण सूत्र (Mirror Formula):
1/v + 1/u = 1/f
(यहाँ v = प्रतिबिंब दूरी, u = बिंब दूरी, f = फोकस दूरी)
2. आवर्धन (Magnification – m):
m = प्रतिबिंब की ऊँचाई (h’) / बिंब की ऊँचाई (h)
या
m = -v / u
‘m’ के मान का अर्थ:
- यदि m ऋणात्मक (-) है: प्रतिबिंब वास्तविक और उल्टा है।
- यदि m धनात्मक (+) है: प्रतिबिंब आभासी और सीधा है।
- |m| > 1 : प्रतिबिंब बिंब से बड़ा है।
- |m| = 1 : प्रतिबिंब बिंब के बराबर है।
- |m| < 1 : प्रतिबिंब बिंब से छोटा है।
6. प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light)
जब प्रकाश की किरण एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में प्रवेश करती है, तो वह अपने मार्ग से विचलित हो जाती है (मुड़ जाती है)। इस घटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।
कारण: अलग-अलग माध्यमों में प्रकाश की चाल (Speed) अलग-अलग होती है।
- विरल से सघन माध्यम (Rarer to Denser): जैसे हवा से काँच। प्रकाश की चाल कम हो जाती है और किरण अभिलंब की ओर झुक जाती है।
- सघन से विरल माध्यम (Denser to Rarer): जैसे काँच से हवा। प्रकाश की चाल बढ़ जाती है और किरण अभिलंब से दूर हट जाती है।
काँच के आयताकार स्लैब से अपवर्तन
इसमें प्रकाश का दो बार अपवर्तन होता है।
1. वायु → काँच (अभिलंब की ओर)।
2. काँच → वायु (अभिलंब से दूर)।
परिणाम: निर्गत किरण (Emergent ray), आपतित किरण के समांतर होती है, लेकिन थोड़ी खिसक जाती है। इस खिसकाव को पार्श्विक विस्थापन (Lateral Displacement) कहते हैं।
अपवर्तन के नियम (Laws of Refraction)
- आपतित किरण, अपवर्तित किरण और अभिलंब तीनों एक ही तल में होते हैं।
- स्नेल का नियम (Snell’s Law): प्रकाश के किसी निश्चित रंग और माध्यमों के युग्म के लिए, आपतन कोण की ज्या (sin i) और अपवर्तन कोण की ज्या (sin r) का अनुपात एक स्थिरांक होता है।
sin i / sin r = स्थिरांक (n)
7. अपवर्तनांक (Refractive Index)
यह वह मान है जो बताता है कि किसी माध्यम में प्रकाश की चाल कितनी कम हुई है या प्रकाश कितना मुड़ा है।
- निरपेक्ष अपवर्तनांक (nm):
nm = (वायु या निर्वात में प्रकाश की चाल, c) / (माध्यम में प्रकाश की चाल, v)
nm = c / v - जिस माध्यम का अपवर्तनांक अधिक होता है, वह प्रकाशतः सघन (Optically Denser) होता है और उसमें प्रकाश की चाल कम होती है।
- हीरे का अपवर्तनांक सबसे अधिक (2.42) होता है, इसलिए इसमें प्रकाश की चाल बहुत कम होती है और यह अधिक चमकता है।
8. गोलीय लेंस (Spherical Lenses)
दो पृष्ठों से घिरा हुआ कोई पारदर्शी माध्यम, जिसका कम से कम एक पृष्ठ गोलीय हो, लेंस कहलाता है।
- उत्तल लेंस (Convex Lens): किनारों पर पतला और बीच में मोटा। यह किरणों को एक बिंदु पर मिलाता है (अभिसारी)।
- अवतल लेंस (Concave Lens): किनारों पर मोटा और बीच में पतला। यह किरणों को फैलाता है (अपसारी)।
लेंस द्वारा प्रतिबिंब बनना (महत्वपूर्ण तुलना)
याद रखें: उत्तल लेंस का व्यवहार अवतल दर्पण जैसा होता है, और अवतल लेंस का व्यवहार उत्तल दर्पण जैसा होता है।
(क) उत्तल लेंस (6 स्थितियाँ)
- F तक वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब बनाता है।
- विशेष स्थिति (F और प्रकाशिक केंद्र O के बीच): बिंब को लेंस के बहुत पास रखने पर प्रतिबिंब आभासी, सीधा और बड़ा बनता है। (इसी गुण का उपयोग आवर्धक लेंस/Magnifying glass में होता है)।
(ख) अवतल लेंस (2 स्थितियाँ)
- यह सदैव आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है।
9. लेंस सूत्र, आवर्धन और क्षमता
सूत्र
1. लेंस सूत्र (Lens Formula):
1/v – 1/u = 1/f
(ध्यान दें: दर्पण सूत्र में + होता है, लेंस सूत्र में – होता है)
2. आवर्धन (Magnification):
m = h’ / h = v / u
(ध्यान दें: दर्पण में -v/u होता है, लेंस में केवल v/u होता है)
लेंस की क्षमता (Power of Lens – P)
लेंस द्वारा प्रकाश किरणों को अभिसरित या अपसरित करने की मात्रा को उसकी क्षमता कहते हैं। यह फोकस दूरी का व्युत्क्रम होती है।
सूत्र: P = 1 / f (मीटर में)
- SI मात्रक: डायोप्टर (D)।
- 1 D उस लेंस की क्षमता है जिसकी फोकस दूरी 1 मीटर हो।
- उत्तल लेंस की क्षमता: धनात्मक (+)।
- अवतल लेंस की क्षमता: ऋणात्मक (-)।
- उदाहरण: यदि चश्मे का नंबर +2.0D है, तो वह उत्तल लेंस है। यदि -2.5D है, तो वह अवतल लेंस है।
- संयोजन: यदि कई लेंस संपर्क में रखे हों, तो कुल क्षमता P = P1 + P2 + P3… होती है।
10. बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
| अंक | प्रश्न का प्रकार |
|---|---|
| 1 अंक (MCQ) |
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| 2-3 अंक (लघु/आंकिक) |
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| 5 अंक (दीर्घ) |
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न्यूमेरिकल प्रश्न (Numericals) हल करने की विशेष रणनीति
- प्रश्न पढ़ते ही सबसे पहले लिखें: दिया है (Given) – u, f, R आदि।
- चिह्न (Sign) तुरंत लगाएँ: u हमेशा (-) होता है। अवतल की f (-), उत्तल की f (+)।
- दर्पण है या लेंस, यह ध्यान से देखें और सही सूत्र चुनें (1/v + 1/u या 1/v – 1/u)।
- गणना करने के बाद ‘m’ निकालें और अंत में एक लाइन में निष्कर्ष लिखें: “अतः प्रतिबिंब दर्पण के सामने 15cm दूर, वास्तविक और उल्टा बनेगा।”
पिछले वर्षों के प्रश्नों का फोकस
- वाहनों में उत्तल दर्पण क्यों? (छोटा प्रतिबिंब, बड़ा दृश्य क्षेत्र)।
- हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है, इस कथन का क्या अर्थ है? (अर्थात हीरे में प्रकाश की चाल निर्वात की चाल का 1/2.42 गुना है)।
- आंकिक प्रश्न: “एक 5cm लंबी वस्तु 10cm फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस से 25cm दूर रखी है…” (प्रतिबिंब की स्थिति, आकार और प्रकृति)।
- लेंस का आधा भाग काला करने पर क्या होगा? (प्रतिबिंब पूरा बनेगा, लेकिन उसकी तीव्रता/चमक कम हो जाएगी)।
त्वरित पुनरावृत्ति नोट्स (Quick Revision)
- प्रकाश की चाल: निर्वात > गैस > द्रव > ठोस।
- अवतल दर्पण: वास्तविक और आभासी दोनों प्रतिबिंब (आभासी केवल एक केस में)।
- उत्तल दर्पण: हमेशा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब।
- उत्तल लेंस: वास्तविक और आभासी दोनों प्रतिबिंब (आभासी केवल एक केस में – मैग्नीफाइंग ग्लास)।
- अवतल लेंस: हमेशा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब।
- अपवर्तनांक: n21 = v1 / v2
- क्षमता (P): P = 100/f (यदि f, cm में हो)।
निष्कर्ष
प्रिय विद्यार्थियों, ‘प्रकाश’ अध्याय विज्ञान का वह भाग है जहाँ आप पूरे अंक (Full Marks) ला सकते हैं क्योंकि यहाँ उत्तर गणित की तरह सटीक होते हैं। बस आपको चिह्न परिपाटी (Plus/Minus) का ध्यान रखना है और किरण आरेख (Ray Diagrams) बनाने का अभ्यास स्केल और पेंसिल से करना है।
सफलता का मूल मंत्र: “आरेख साफ़ बनाएँ, सूत्र सही चुनें और Plus-Minus की गलती से बचें।” आपकी बोर्ड परीक्षा के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ!



