भारतीय संविधान की 12 अनुसूचियाँ | Complete Notes | UPSC BPSC NCERT Explained

भारतीय संविधान की 12 अनुसूचियां – संपूर्ण और विस्तृत ब्लॉग

भारतीय संविधान की 12 अनुसूचियां: संपूर्ण और विस्तृत विश्लेषण (12 Schedules of Indian Constitution)

“क्या आप जानते हैं कि जब हमारा संविधान बनकर तैयार हुआ था, तब इसमें सिर्फ 8 अनुसूचियां थीं? आज इनकी संख्या बढ़कर 12 हो चुकी है। आइए इस मेगा-गाइड में आसान भाषा, संबंधित अनुच्छेदों (Articles) और याद रखने की ज़बरदस्त ट्रिक के साथ इन 12 अनुसूचियों का ‘पोस्टमॉर्टम’ करते हैं।”

भारतीय संविधान दुनिया का सबसे लंबा और लिखित संविधान है। संविधान के अनुच्छेदों (Articles) में मुख्य कानून और नियम लिखे गए हैं, लेकिन कई बार उन नियमों की विस्तृत सूचियां (Lists) या अतिरिक्त जानकारी बहुत लंबी होती है। अगर उन्हें अनुच्छेदों के बीच में लिखा जाता, तो संविधान बहुत जटिल हो जाता। इसी अतिरिक्त और विस्तृत जानकारी को संविधान के अंत में अनुसूचियों (Schedules) के रूप में जोड़ा गया है। (यह विचार ‘भारत सरकार अधिनियम 1935’ से लिया गया था, जिसमें 10 अनुसूचियां थीं)।

जब 26 नवंबर 1949 को संविधान अपनाया गया था, तब इसमें 395 अनुच्छेद, 22 भाग और सिर्फ 8 अनुसूचियां थीं। लेकिन वक्त और ज़रूरत के हिसाब से संविधान संशोधनों (Amendments) के माध्यम से 4 नई अनुसूचियां जोड़ी गईं, जिससे आज इनकी कुल संख्या 12 (बारह) हो गई है।


याद रखने की मास्टर ट्रिक: “TEARS OF OLD PM”

इन 12 अनुसूचियों को क्रम से (Sequence) याद रखने के लिए छात्रों के बीच एक बहुत ही प्रसिद्ध और आसान इंग्लिश ट्रिक है—TEARS OF OLD PM। इसका हर एक अक्षर एक अनुसूची को दर्शाता है:

  • T – Territories (राज्य और केंद्र शासित प्रदेश)
  • E – Emoluments (वेतन और भत्ते)
  • A – Affirmations (शपथ और प्रतिज्ञान)
  • R – Rajya Sabha (राज्यसभा में सीटों का बंटवारा)
  • S – Scheduled Areas (अनुसूचित क्षेत्र)
  • O – Other Tribal Areas (AMTM राज्यों के जनजातीय क्षेत्र)
  • F – Federal Provisions (संघ और राज्य के बीच शक्तियां – 3 सूचियां)
  • O – Official Languages (मान्यता प्राप्त भाषाएं)
  • L – Land Reforms (भूमि सुधार और ज़मींदारी उन्मूलन)
  • D – Defection (दल-बदल विरोधी कानून)
  • P – Panchayats (पंचायती राज)
  • M – Municipalities (नगरपालिका)

अब आइए इन सभी 12 अनुसूचियों को उनके संवैधानिक अनुच्छेदों (Articles) और ऐतिहासिक तथ्यों के साथ विस्तार से समझते हैं।


1. पहली अनुसूची (First Schedule) – T: Territories

संबंधित अनुच्छेद: 1 और 4

संविधान की पहली अनुसूची में भारत के सभी राज्यों (States) और केंद्र शासित प्रदेशों (Union Territories) के नाम और उनकी सीमाओं (Territorial jurisdiction) का पूरा ज़िक्र दिया गया है।

  • अगर भारत कल को किसी नए देश की ज़मीन को अपने में मिलाता है (जैसे 1975 में सिक्किम को), या किसी राज्य को तोड़कर 2 नए राज्य बनाता है (जैसे 2014 में आंध्र प्रदेश से तेलंगाना), तो अनुच्छेद 4 के तहत पहली अनुसूची में बदलाव (संशोधन) करना अनिवार्य होता है।
  • 69वें संविधान संशोधन (1991) द्वारा दिल्ली को ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र’ (NCR) का विशेष दर्ज़ा दिया गया, जिसका उल्लेख यहीं मिलता है।
  • वर्तमान में भारत में 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं। (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पुनर्गठन के बाद)।

2. दूसरी अनुसूची (Second Schedule) – E: Emoluments

संबंधित अनुच्छेद: 59, 65, 75, 97, 125, 148, 158, 164, 186, 221

भारत के बड़े-बड़े संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों को कितनी सैलरी (वेतन), भत्ते (Allowances), विशेषाधिकार और पेंशन मिलेगी, इसकी पूरी लिस्ट दूसरी अनुसूची में लिखी हुई है। यह वेतन ‘भारत की संचित निधि’ (Consolidated Fund of India) पर भारित होता है। इसमें इन लोगों का ज़िक्र है:

  • भारत के राष्ट्रपति (President) और राज्यों के राज्यपाल (Governors)।
  • लोकसभा और राज्यसभा के स्पीकर/सभापति और डिप्टी स्पीकर/उपसभापति।
  • राज्य विधानसभाओं और विधान परिषदों के स्पीकर/सभापति।
  • सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के सभी जजेस।
  • नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG)

यूपीएससी का ट्रिकी सवाल: ध्यान रहे, इसमें प्रधानमंत्री (PM), मुख्यमंत्री (CM) या आम सांसदों/विधायकों की सैलरी का सीधा ज़िक्र इस अनुसूची में अलग से नहीं होता। वे सांसद/विधायक के रूप में वेतन प्राप्त करते हैं, जिसे संसद/विधानमंडल समय-समय पर तय करता है।

3. तीसरी अनुसूची (Third Schedule) – A: Affirmations

संबंधित अनुच्छेद: 75, 84, 99, 124, 146, 173, 188, 219

जब कोई बड़ा नेता, सांसद या जज अपना पद संभालता है, तो उसे पद और गोपनीयता या संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ (Oath/Affirmation) लेनी पड़ती है। वह शपथ पढ़ते वक्त क्या बोलेगा, उसके सटीक शब्द (Format) तीसरी अनुसूची में लिखे गए हैं। इसमें शामिल हैं:

  • संघ (केंद्र) के मंत्री और राज्य के मंत्री।
  • संसद और राज्य विधान मंडल के चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार (Candidates) और चुने गए सदस्य (MP/MLA)।
  • सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजेस।
  • नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG)।

परीक्षाओं के लिए सुपर महत्वपूर्ण तथ्य: राष्ट्रपति (अनुच्छेद 60), उपराष्ट्रपति (अनुच्छेद 69) और राज्यपाल (अनुच्छेद 159) की शपथ का प्रारूप इस तीसरी अनुसूची में नहीं है। उनकी शपथ संविधान के संबंधित अनुच्छेदों में ही दी गई है।

4. चौथी अनुसूची (Fourth Schedule) – R: Rajya Sabha

संबंधित अनुच्छेद: 4 और 80

हमारी संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा (Council of States) में किस राज्य और किस केंद्र शासित प्रदेश (दिल्ली, पुडुचेरी, जम्मू और कश्मीर) से कितने प्रतिनिधि (MP) आएंगे, इसका आवंटन चौथी अनुसूची में तय किया गया है।

  • अमेरिका की सीनेट में हर राज्य को 2 सीटें मिलती हैं (चाहे राज्य छोटा हो या बड़ा)। लेकिन भारत में यह बंटवारा उस राज्य की जनसंख्या (Population) के आधार पर होता है (वर्तमान में 1971 की जनगणना के आधार पर)।
  • यही कारण है कि उत्तर प्रदेश (UP) के पास सबसे ज़्यादा 31 राज्यसभा सीटें हैं, जबकि पूर्वोत्तर के राज्यों, गोवा या सिक्किम के पास सिर्फ 1-1 सीट है।

5. पांचवीं अनुसूची (Fifth Schedule) – S: Scheduled Areas

संबंधित अनुच्छेद: 244(1)

भारत में कई ऐसे इलाके हैं जहाँ अनुसूचित जनजातियों (ST) की आबादी ज़्यादा है और उनकी संस्कृति, ज़मीन तथा रहन-सहन अलग है। ऐसे इलाकों को ‘अनुसूचित क्षेत्र’ (Scheduled Areas) घोषित किया जाता है (असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिज़ोरम को छोड़कर)। इन इलाकों के प्रशासन (Administration) और नियंत्रण के विशेष नियम पांचवीं अनुसूची में दिए गए हैं।

  • राष्ट्रपति के पास किसी भी क्षेत्र को ‘अनुसूचित क्षेत्र’ घोषित करने, बढ़ाने या घटाने की शक्ति होती है।
  • इन क्षेत्रों में राज्य के राज्यपाल की विशेष ज़िम्मेदारी होती है और वह हर साल राष्ट्रपति को रिपोर्ट सौंपता है।
  • यहाँ आदिवासियों की ज़मीन छिनने से बचाने और उनके कल्याण के लिए जनजातीय सलाहकार परिषद (Tribes Advisory Council – TAC) बनाई जाती है, जिसमें अधिकतम 20 सदस्य होते हैं (जिनमें से तीन-चौथाई एसटी विधायक होने चाहिए)।

6. छठी अनुसूची (Sixth Schedule) – O: Other Tribal Areas

संबंधित अनुच्छेद: 244(2) और 275(1)

यह अनुसूची पांचवीं अनुसूची के जैसी ही है, लेकिन यह सिर्फ और सिर्फ पूर्वोत्तर भारत (North-East) के 4 विशेष राज्यों के जनजातीय क्षेत्रों पर लागू होती है। इसे याद रखने की ट्रिक है AMTM:

  • A – असम (Assam) (उदा: बोडोलैंड, कार्बी आंगलोंग)
  • M – मेघालय (Meghalaya) (उदा: खासी, जयंतिया हिल्स)
  • T – त्रिपुरा (Tripura)
  • M – मिज़ोरम (Mizoram) – (ध्यान रखें, इसमें मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश या नगालैंड शामिल नहीं हैं)।

इन 4 राज्यों के जनजातीय क्षेत्रों को पांचवीं अनुसूची से भी बहुत ज़्यादा स्वायत्तता (Autonomy) दी गई है। यहाँ ‘स्वायत्त ज़िला परिषदें’ (Autonomous District Councils – ADCs) बनती हैं। ये परिषदें अपने क्षेत्र के लिए भूमि, जंगल, नहर के पानी, और विवाह जैसे मुद्दों पर अपने खुद के कानून बना सकती हैं और न्याय भी कर सकती हैं।


7. सातवीं अनुसूची (Seventh Schedule) – F: Federal Provisions

संबंधित अनुच्छेद: 246

भारत एक संघीय (Federal) देश है, जहाँ केंद्र सरकार और राज्य सरकारें मिलकर काम करती हैं। किस विषय पर केंद्र सरकार (संसद) कानून बनाएगी और किस पर राज्य सरकार (विधान मंडल)? इस शक्तियों के बंटवारे को स्पष्ट करने के लिए सातवीं अनुसूची में 3 सूचियां (Lists) दी गई हैं:

  1. संघ सूची (Union List): इसमें मूल रूप से 97 विषय थे (अब 100 हैं) जैसे रक्षा (Defence), रेलवे, बैंकिंग, डाक-तार, मुद्रा (Currency) और विदेशी मामले। इन पर सिर्फ केंद्र सरकार (संसद) कानून बना सकती है।
  2. राज्य सूची (State List): इसमें मूल रूप से 66 विषय थे (अब 61 हैं) जैसे पुलिस, स्थानीय शासन, कृषि (Agriculture), और सार्वजनिक स्वास्थ्य। इन पर सामान्य स्थिति में सिर्फ राज्य सरकार कानून बनाती है।
  3. समवर्ती सूची (Concurrent List): इसमें मूल रूप से 47 विषय थे (अब 52 हैं)। 42वें संशोधन (1976) द्वारा 5 विषय (जैसे शिक्षा, वन, वन्य जीवों का संरक्षण) राज्य सूची से निकालकर इसमें डाले गए। इस सूची पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं। पर अगर दोनों के कानूनों में टकराव (Clash) हुआ, तो केंद्र का कानून मान्य होगा।

अवशिष्ट शक्तियां (Residuary Powers – अनुच्छेद 248): जो विषय इन तीनों सूचियों में नहीं हैं (जैसे साइबर क्राइम, सॉफ्टवेयर), उन पर कानून बनाने का अधिकार केवल केंद्र (संसद) के पास है।

8. आठवीं अनुसूची (Eighth Schedule) – O: Official Languages

संबंधित अनुच्छेद: 344(1) और 351

भारत में हज़ारों भाषाएं हैं, पर संविधान की आठवीं अनुसूची में देश की आधिकारिक/मान्यता प्राप्त भाषाओं (Official Languages) की लिस्ट दी गई है। केंद्र सरकार का दायित्व है कि वह इन भाषाओं का विकास करे।

  • जब संविधान बना था, तब इसमें सिर्फ 14 भाषाएं थीं। लेकिन अलग-अलग संविधान संशोधन करके आज इसमें 22 भाषाएं हो चुकी हैं।
  • 21वें संशोधन (1967) से: सिंधी।
  • 71वें संशोधन (1992) से: कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली (ट्रिक: K-M-N या ‘नमक’)।
  • 92वें संशोधन (2003) से: बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली (ट्रिक: BDMS)।
  • महत्वपूर्ण तथ्य: अंग्रेज़ी (English), राजस्थानी और भोजपुरी इन 22 भाषाओं की लिस्ट में शामिल नहीं हैं, हालाँकि इन्हें शामिल करने की मांग लगातार उठती रहती है।

नई जोड़ी गई अनुसूचियां (संविधान संशोधन द्वारा)

ऊपर दी गई 8 अनुसूचियां मूल संविधान (1949) में थीं। नीचे दी गई 4 अनुसूचियां बाद में बदलते वक्त और समाज की ज़रूरतों के साथ जोड़ी गईं:

9. नौवीं अनुसूची (Ninth Schedule) – L: Land Reforms

संबंधित अनुच्छेद: 31B (प्रथम संविधान संशोधन, 1951 द्वारा जोड़ी गई)

आज़ादी के तुरंत बाद सरकार को ज़मींदारी प्रथा खत्म करनी थी और गरीब किसानों को ज़मीन बांटनी थी (भूमि सुधार)। पर जब सरकार ज़मींदारों की ज़मीन लेती थी, तो वे अपने ‘संपत्ति के अधिकार’ (Right to Property – जो तब एक मौलिक अधिकार था) का उल्लंघन बताकर सीधे सुप्रीम कोर्ट चले जाते थे, जिससे सारे विकास कार्य रुक जाते थे।

  • इस समस्या को सुलझाने के लिए जवाहरलाल नेहरू सरकार ने पहला संविधान संशोधन (1951) पास किया और नौवीं अनुसूची जोड़ी।
  • सरकार ने नियम बनाया कि जो भी कानून (जैसे भूमि सुधार कानून) इस नौवीं अनुसूची रूपी ‘तिजोरी’ के अंदर डाल दिया जाएगा, उसे न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती। यानी उस पर न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) नहीं हो सकती।
  • ऐतिहासिक बदलाव (I.R. Coelho Case – 2007): नेताओं ने इसका दुरुपयोग करना शुरू कर दिया। अंततः 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला दिया कि यह अनुसूची कोई ‘ब्लैक होल’ नहीं है। 24 अप्रैल 1973 (केशवानंद भारती केस का दिन) के बाद इस अनुसूची में डाले गए किसी भी कानून का न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) हो सकता है, यदि वह ‘संविधान के मूल ढांचे’ (Basic Structure) का उल्लंघन करता है। इसमें वर्तमान में लगभग 284 कानून हैं।

10. दसवीं अनुसूची (Tenth Schedule) – D: Defection

संबंधित अनुच्छेद: 102(2) और 191(2) (52वां संविधान संशोधन, 1985)

1960 और 70 के दशक में भारतीय राजनीति में एक बीमारी फैल गई थी—”आया राम, गया राम”। नेता पैसों और मंत्री पद के लालच में जीतने के बाद अपनी पार्टी बदल लेते थे, जिससे सरकारें गिर जाती थीं। इसे रोकने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) बनाया।

  • इसे 52वें संविधान संशोधन (1985) के ज़रिए दसवीं अनुसूची के रूप में जोड़ा गया।
  • इसके तहत अगर कोई सांसद (MP) या विधायक (MLA) स्वेच्छा से अपनी पार्टी छोड़ता है, या सदन में पार्टी व्हिप (Whip) के खिलाफ वोट करता है, या कोई निर्दलीय सदस्य किसी पार्टी में शामिल हो जाता है, तो उसकी सदस्यता रद्द की जा सकती है।
  • अपवाद (Exceptions): यदि किसी पार्टी के 2/3 (दो-तिहाई) सदस्य टूटकर किसी अन्य पार्टी में विलय (Merge) कर लेते हैं, तो उन पर यह कानून लागू नहीं होता। (पहले यह सीमा 1/3 थी, जिसे 91वें संशोधन 2003 द्वारा बढ़ाकर 2/3 कर दिया गया ताकि दल-बदल और मुश्किल हो जाए)।
  • सदस्यता रद्द करने का अंतिम फैसला सदन का स्पीकर/सभापति करता है (जिसे बाद में कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है)।

11. ग्यारहवीं अनुसूची (Eleventh Schedule) – P: Panchayats

संबंधित अनुच्छेद: 243G (73वां संविधान संशोधन, 1992)

महात्मा गांधी का सपना था ‘ग्राम स्वराज’ (गांवों का अपना शासन)। भारत के गांवों को आत्मनिर्भर बनाने और सत्ता के विकेंद्रीकरण (Decentralization) के लिए पंचायती राज सिस्टम को संवैधानिक (Constitutional) दर्ज़ा दिया गया।

  • इसे पी.वी. नरसिम्हा राव सरकार के दौरान 73वें संविधान संशोधन (1992) के द्वारा जोड़ा गया (जो 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ, इसीलिए 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाते हैं)।
  • इस अनुसूची में गांव की पंचायतों को काम करने, टैक्स लगाने और विकास योजनाएं बनाने के लिए 29 विषय (29 Subjects) दिए गए हैं। इनमें कृषि, लघु सिंचाई, पशुपालन, ग्रामीण आवास, पीने का पानी, सड़कें, और गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम आदि शामिल हैं।

12. बारहवीं अनुसूची (Twelfth Schedule) – M: Municipalities

संबंधित अनुच्छेद: 243W (74वां संविधान संशोधन, 1992)

जिस प्रकार गांवों के प्रशासन के लिए पंचायतें बनाई गईं, ठीक वैसे ही तेजी से बढ़ते शहरों (Cities and Towns) के सुनियोजित विकास और स्थानीय प्रशासन के लिए नगरपालिकाओं (Municipalities / Municipal Corporations) को संवैधानिक दर्ज़ा दिया गया।

  • इसे भी 74वें संविधान संशोधन (1992) के द्वारा 11वीं अनुसूची के साथ ही जोड़ा गया (लागू 1 जून 1993 से हुआ)।
  • इस अनुसूची में शहरी स्थानीय निकायों (Urban Local Bodies) को काम करने के लिए 18 विषय (18 Subjects) दिए गए हैं। इनमें शहरी योजना (Urban Planning), भूमि उपयोग का नियमन, सड़कें और पुल, स्लम सुधार, फायर ब्रिगेड (अग्निशमन सेवाएं), और पर्यावरण संरक्षण आदि शामिल हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

संविधान की ये 12 अनुसूचियां कोई साधारण लिस्ट नहीं हैं; ये दरअसल भारत के विशाल और जटिल शासन-प्रशासन की एक ‘मास्टर की’ (Master Key) हैं। ये अनुसूचियां अनुच्छेदों के साथ मिलकर स्पष्ट करती हैं कि भारत का भूगोल क्या है, राजनेताओं का वेतन और शपथ क्या है, केंद्र-राज्यों की शक्तियां क्या हैं, और एक आदिवासी क्षेत्र या गांव की पंचायत का अधिकार क्या है।

शुरुआती 8 अनुसूचियां हमारे संविधान निर्माताओं (डॉ. बी.आर. अंबेडकर, बी.एन. राव आदि) की दूर-दृष्टि को दिखाती हैं। वहीं, बाद में जोड़ी गई 4 अनुसूचियां (भूमि सुधार से लेकर पंचायती राज तक) यह सिद्ध करती हैं कि भारतीय संविधान कोई पत्थर की लकीर नहीं, बल्कि एक ‘जीवंत दस्तावेज़’ (Living Document) है, जो बदलते वक्त, नई चुनौतियों और समाज की आधुनिक ज़रूरतों के हिसाब से खुद को ढालना और बेहतर करना जानता है।

“परीक्षाएं क्लियर करने के लिए हमेशा याद रखें: TEARS OF OLD PM. यह एक सिंपल लाइन आपको संविधान की 12 अनुसूचियों पर पकड़ बनाने में ज़िंदगी भर मदद करेगी!”