NCERT कक्षा 10 विज्ञान – अध्याय 6: नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination)

NCERT कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 6: नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination) – विस्तृत नोट्स

NCERT कक्षा 10 विज्ञान – अध्याय 6: नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination)

(सम्पूर्ण विस्तृत गाइड: अवधारणा, नोट्स, प्रश्नोत्तर और परीक्षा टिप्स)

विषय सूची

  1. परिचय: नियंत्रण और समन्वय की आवश्यकता
  2. जंतु तंत्रिका तंत्र: संरचना और कार्य
  3. तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) और सिनैप्स
  4. प्रतिवर्ती क्रिया और प्रतिवर्ती चाप
  5. मानव मस्तिष्क: संरचना, भाग और कार्य
  6. तंत्रिका ऊतक कैसे क्रिया करता है?
  7. पादपों में समन्वय: तत्काल और वृद्धि आधारित गति
  8. जंतुओं में हार्मोन (अंतःस्रावी तंत्र)
  9. महत्वपूर्ण अंतर (टेबल्स)
  10. बोर्ड परीक्षा विशेष: प्रश्न और रणनीतियाँ

1. परिचय: नियंत्रण और समन्वय की आवश्यकता

सजीवों की एक प्रमुख विशेषता है अपने पर्यावरण में होने वाले परिवर्तनों के प्रति अनुक्रिया (Response) करना। क्या आपने कभी सोचा है कि जब हम बिल्ली को देखते हैं तो चूहा क्यों भाग जाता है? या जब हम झूला झूलते हैं तो हमारा शरीर गिरने से कैसे बचता है?

शरीर में अरबों कोशिकाएं हैं। यदि ये कोशिकाएं अपनी मर्जी से काम करें, तो जीवन असंभव हो जाएगा। इसलिए, एक ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता होती है जो इन कोशिकाओं, ऊतकों और अंगों के कार्यों को एक सूत्र में पिरोए। इसे ही समन्वय (Coordination) कहते हैं। नियंत्रण (Control) वह शक्ति है जिससे इन क्रियाओं को शुरू, धीमा या रोका जाता है।

दैनिक जीवन से उदाहरण:

  • जब हम खाना खाते हैं, तो हमारी आँखें भोजन को देखती हैं, नाक गंध लेती है, हाथ उसे उठाता है, और मुँह में पानी (लार) आता है। यह सब एक साथ (Synchronized) होता है।
  • पौधे की जड़ें हमेशा नीचे (मिट्टी) की ओर और तना ऊपर (प्रकाश) की ओर बढ़ता है।

2. जंतु तंत्रिका तंत्र (Animal Nervous System)

जंतुओं में नियंत्रण और समन्वय मुख्य रूप से दो तंत्रों द्वारा होता है:

  1. तंत्रिका तंत्र (Nervous System): यह तारों (नसों) का एक जाल है जो बिजली की गति से संदेश पहुंचाता है। यह बहुत तेज़ होता है लेकिन इसका प्रभाव अल्पकालिक होता है।
  2. अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System): यह रसायनों (हार्मोन) का उपयोग करता है। यह धीमा होता है लेकिन इसका प्रभाव दीर्घकालिक और व्यापक होता है।

ग्राही (Receptors) – सूचना के द्वार

हमारे शरीर में बाहर की दुनिया से सूचना एकत्र करने के लिए विशेष कोशिकाएं होती हैं, जिन्हें ग्राही कहते हैं। ये हमारी ज्ञानेंद्रियों में स्थित होते हैं। बोर्ड परीक्षा में इनके तकनीकी नाम अक्सर पूछे जाते हैं:

ज्ञानेंद्री (Sense Organ) ग्राही का नाम (Receptor Name) कार्य (Function)
का (Ear) श्रवण ग्राही (Phonoreceptor) ध्वनि सुनना और शरीर का संतुलन बनाना।
आंख (Eye) प्रकाश ग्राही (Photoreceptor) दृश्य (Visual) उद्दीपन को ग्रहण करना।
त्वचा (Skin) ताप ग्राही (Thermoreceptor) स्पर्श, गर्मी, सर्दी और दर्द का अनुभव।
नाक (Nose) घ्राण ग्राही (Olfactory Receptor) गंध (Smell) का पता लगाना।
जीभ (Tongue) रससंवेदी ग्राही (Gustatory Receptor) स्वाद (Taste) का पता लगाना।

(नोट: यदि आपको सर्दी-जुकाम है, तो घ्राण ग्राही अवरुद्ध हो सकते हैं, जिससे भोजन का स्वाद सही नहीं लगता।)


3. तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) और सिनैप्स

न्यूरॉन की संरचना

तंत्रिका तंत्र की सबसे छोटी क्रियात्मक इकाई न्यूरॉन (Neuron) है। यह शरीर की सबसे लंबी कोशिका हो सकती है (कुछ तो 1 मीटर तक लंबी होती हैं)। इसके तीन मुख्य भाग हैं:

  1. द्रुमिका (Dendrites):
    • यह कोशिका काय (Cell body) से निकले हुए छोटे-छोटे धागे जैसी संरचना है।
    • कार्य: यह आस-पास के वातावरण या दूसरे न्यूरॉन से सूचना ग्रहण करती है और एक रासायनिक क्रिया द्वारा ‘विद्युत आवेग’ (Electric Impulse) पैदा करती है।
  2. कोशिका काय (Cell Body / Cyton):
    • यह न्यूरॉन का मुख्य भाग है जिसमें केंद्रक और कोशिका द्रव्य होता है।
    • कार्य: द्रुमिका से आया हुआ विद्युत आवेग यहाँ से होकर तंत्रिकाक्ष तक जाता है।
  3. तंत्रिकाक्ष (Axon):
    • यह एक लंबा बेलनाकार प्रवर्ध है जो संदेश को कोशिका काय से दूर ले जाता है।
    • कार्य: यह विद्युत आवेग को न्यूरॉन के अंतिम सिरे तक पहुँचाता है।

सिग्नल कैसे चलता है? (Mechanism of Impulse Transmission)

यह प्रक्रिया बोर्ड परीक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इसे चरणबद्ध तरीके से समझें:

  1. सूचना द्रुमिका के सिरे द्वारा प्राप्त की जाती है।
  2. एक रासायनिक क्रिया होती है जिससे विद्युत आवेग पैदा होता है।
  3. यह आवेग द्रुमिका से कोशिका काय तक जाता है।
  4. वहाँ से यह तंत्रिकाक्ष (Axon) में होता हुआ इसके अंतिम सिरे तक पहुँचता है।
  5. सिनैप्स (Synapse) – दो न्यूरॉन्स का मिलन

    परिभाषा: दो तंत्रिका कोशिकाओं (न्यूरॉन्स) के बीच के सूक्ष्म रिक्त स्थान (दरार) को सिनैप्स या अंतर्ग्रथन कहते हैं। न्यूरॉन्स आपस में शारीरिक रूप से जुड़े नहीं होते।

    सिनैप्स पर क्या होता है? (अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न):

    • जब विद्युत आवेग तंत्रिकाक्ष के अंतिम सिरे पर पहुँचता है, तो वह सीधे कूदकर अगले न्यूरॉन में नहीं जा सकता।
    • इसलिए, अंतिम सिरा कुछ रसायन छोड़ता है जिन्हें न्यूरोट्रांसमीटर (जैसे एसिटाइलकोलीन) कहते हैं।
    • ये रसायन सिनैप्स (खाली जगह) को तैरकर पार करते हैं।
    • जैसे ही ये रसायन अगली तंत्रिका की द्रुमिका को छूते हैं, वहाँ फिर से एक नया विद्युत आवेग उत्पन्न हो जाता है।
    • इस प्रकार संदेश एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन तक पहुँचता है।

    4. प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action)

    क्या और क्यों?

    परिभाषा: किसी उद्दीपन के प्रति मस्तिष्क के सचेत हस्तक्षेप के बिना, अचानक और अनैच्छिक रूप से होने वाली अनुक्रिया को प्रतिवर्ती क्रिया कहते हैं।

    उदाहरण:

    • गर्म बर्तन छूते ही हाथ का पीछे हटना।
    • तेज रोशनी में आँखों की पलकें झपकना।
    • सुई चुभने पर पैर का हटना।

    आवश्यकता क्यों है?

    सोचने की प्रक्रिया जटिल होती है और इसमें समय लगता है। आपातकालीन स्थितियों (जैसे आग से जलना) में, यदि हम सोचने लगेंगे कि “क्या मुझे हाथ हटाना चाहिए?”, तब तक हाथ जल जाएगा। इसलिए, शरीर ने एक “शॉर्ट-कट” रास्ता अपनाया है जिसे प्रतिवर्ती चाप कहते हैं।

    प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc) का मार्ग

    इस पथ में मस्तिष्क मुख्य भूमिका नहीं निभाता, बल्कि मेरुरज्जु (Spinal Cord) निर्णय लेती है।

    क्रम (Sequence):
    1. ग्राही (Receptor): (जैसे त्वचा) – “गर्मी महसूस हुई”

    2. संवेदी तंत्रिका (Sensory Neuron): संदेश को मेरुरज्जु तक ले जाती है।

    3. मेरुरज्जु (Spinal Cord): निर्णय लेती है और आदेश देती है। (यहाँ रिले न्यूरॉन काम करते हैं)।

    4. प्रेरक तंत्रिका (Motor Neuron): आदेश को पेशी तक ले जाती है।

    5. प्रभावक (Effector): (जैसे हाथ की पेशी) – “हाथ पीछे खींचो”

    नोट: प्रतिवर्ती क्रिया होने के बाद सूचना मस्तिष्क तक भी पहुँचती है ताकि हमें बाद में याद रहे कि क्या हुआ था (दर्द का अनुभव बाद में होता है, हाथ पहले हटता है)।


    5. मानव मस्तिष्क (Human Brain)

    मस्तिष्क हमारे तंत्रिका तंत्र का “कमांड सेंटर” है। इसका वजन लगभग 1.3 से 1.4 किलोग्राम होता है। अध्ययन की सुविधा के लिए इसे तीन भागों में बाँटा गया है:

    (क) अग्र मस्तिष्क (Forebrain) – “सोचने वाला भाग”

    यह मस्तिष्क का सबसे बड़ा और जटिल भाग है। इसका मुख्य हिस्सा प्रमस्तिष्क (Cerebrum) है।

    कार्य:

    • सोचना और तर्क करना: बुद्धिमत्ता, याददाश्त, चेतना और इच्छाशक्ति का केंद्र।
    • संवेदी केंद्र: देखने, सुनने, सूंघने और स्वाद के अलग-अलग क्षेत्र यहाँ होते हैं।
    • ऐच्छिक गतियां: “मैं हाथ उठाना चाहता हूँ” – यह निर्णय यहीं लिया जाता है।
    • तृप्ति केंद्र (Satiety Centre): भूख और पेट भरने का अहसास यहीं से होता है।

    (ख) मध्य मस्तिष्क (Midbrain)

    यह अग्र और पश्च मस्तिष्क के बीच का छोटा भाग है।

    कार्य:

    • सिर, गर्दन और धड़ की प्रतिवर्ती गतियों का नियंत्रण।
    • आँखों की पुतली (Pupil) के आकार का नियंत्रण।
    • दृष्टि और श्रवण उद्दीपनों के लिए प्रतिक्रिया।

    (ग) पश्च मस्तिष्क (Hindbrain)

    यह मस्तिष्क के पिछले भाग में होता है और मेरुदंड से जुड़ता है। इसके तीन अति महत्वपूर्ण भाग हैं:

    1. अनुमस्तिष्क (Cerebellum):
      • यह ऐच्छिक क्रियाओं की परिशुद्धता और शरीर का संतुलन (Balance & Posture) बनाए रखता है।
      • उदाहरण: एक सीधी रेखा में चलना, साइकिल चलाना, पेंसिल उठाना। (शराब पीने पर यही भाग सबसे पहले प्रभावित होता है, जिससे व्यक्ति लड़खड़ाता है)।
    2. मेडुला (Medulla Oblongata):
      • यह सभी अनैच्छिक क्रियाओं (जिन पर हमारा जोर नहीं) को नियंत्रित करता है।
      • उदाहरण: रक्तदाब (Blood Pressure), लार आना, उल्टी (Vomiting), हृदय की धड़कन।
    3. पॉन्स (Pons):
      • यह श्वसन (Respiration) की लय को नियंत्रित करने में मदद करता है।

    मस्तिष्क की सुरक्षा

    • हड्डियाँ: मस्तिष्क एक मजबूत हड्डियों के बॉक्स में बंद होता है जिसे कपाल (Skull/Cranium) कहते हैं।
    • मेनिन्ज (Meninges): मस्तिष्क के चारों ओर तीन झिल्लियाँ होती हैं।
    • मस्तिष्क-मेरु द्रव (Cerebrospinal Fluid – CSF): इन झिल्लियों के बीच एक तरल भरा होता है। यह गद्दे (Cushion) की तरह काम करता है और बाहरी झटकों (Shock) से मस्तिष्क को बचाता है।

    6. तंत्रिका ऊतक कैसे क्रिया करता है? (पेशी गति)

    जब तंत्रिका से आदेश (विद्युत आवेग) पेशी तक पहुँचता है, तो पेशी कैसे हिलती है?

    • पेशी कोशिकाओं में विशेष प्रकार के प्रोटीन (Actin और Myosin) होते हैं।
    • जब विद्युत आवेग आता है, तो ये प्रोटीन अपनी आकृति और व्यवस्था बदल लेते हैं।
    • आकृति बदलने से कोशिका छोटी (सिकुड़) हो जाती है, जिससे गति (Movement) होती है।

    7. पादपों में समन्वय (Coordination in Plants)

    जंतुओं के विपरीत, पौधों में न तो तंत्रिका तंत्र होता है और न ही पेशियाँ। फिर वे कैसे “महसूस” करते हैं और गति करते हैं?

    (क) वृद्धि से मुक्त गति (Nastic Movement)

    यह गति उद्दीपन की दिशा पर निर्भर नहीं करती। यह तत्काल होती है।

    उदाहरण: ‘छुई-मुई’ (Mimosa pudica)

    • जब हम इसकी पत्तियों को छूते हैं, तो वे तुरंत मुड़कर बंद हो जाती हैं।
    • यहाँ स्पर्श की सूचना विद्युत-रसायन (Electro-chemical) माध्यम से एक कोशिका से दूसरी कोशिका तक जाती है।
    • गति का तरीका: पादप कोशिकाएं अपने अंदर जल की मात्रा को परिवर्तित करके अपनी आकृति बदलती हैं। जब पानी बाहर निकलता है, कोशिका सिकुड़ती है और पत्ती झुक जाती है (इसे स्फीति दाब में परिवर्तन कहते हैं)।

    (ख) वृद्धि पर आश्रित गति (Tropic Movement / अनुवर्तन)

    यह गति दिशात्मक होती है। पौधा उद्दीपन की दिशा में या उससे दूर बढ़ता है। चूंकि यह वृद्धि के कारण होती है, इसलिए यह धीमी होती है।

    अनुवर्तन का प्रकार उद्दीपन उदाहरण
    प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) प्रकाश (Light) तने का प्रकाश की ओर मुड़ना (धनात्मक), जड़ का प्रकाश से दूर जाना (ऋणात्मक)।
    गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism) गुरुत्वाकर्षण (Gravity) जड़ों का नीचे जाना (धनात्मक), तने का ऊपर जाना (ऋणात्मक)।
    रसायनानुवर्तन (Chemotropism) रसायन (Chemical) पराग नलिका (Pollen tube) का बीजांड (Ovule) की ओर वृद्धि करना। (अक्सर पूछा जाने वाला उदाहरण)।
    जलानुवर्तन (Hydrotropism) जल (Water) जड़ों का पानी की ओर मुड़ना।
    स्पर्शानुवर्तन (Thigmotropism) स्पर्श (Touch) मटर जैसे पौधों में प्रतान (Tendrils) का सहारे से लिपटना।

    (ग) पादप हार्मोन (Phytohormones)

    पौधे अपनी वृद्धि और प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने के लिए रसायनों का उपयोग करते हैं।

    1. ऑक्सिन (Auxin):
      • यह प्ररोह (Shoot) के अग्रभाग (Tip) में बनता है।
      • कोशिकाओं की लंबाई बढ़ाता है।
      • प्रकाशानुवर्तन में भूमिका: जब प्रकाश एक तरफ से आता है, तो ऑक्सिन छाया वाले भाग (Shady side) में चला जाता है। वहाँ की कोशिकाएं अधिक लंबी हो जाती हैं, जिससे पौधा प्रकाश की ओर मुड़ा हुआ दिखाई देता है।
    2. जिबरेलिन (Gibberellin): तने की वृद्धि (Girth/Height) में सहायक।
    3. साइटोकाइनिन (Cytokinin):
      • कोशिका विभाजन (Cell Division) को तीव्र करता है।
      • यह फलों और बीजों में अधिक मात्रा में पाया जाता है।
    4. एब्सिसिक अम्ल (Abscisic Acid):
      • यह “तनाव हार्मोन” है जो वृद्धि को रोकता है।
      • पत्तियों का मुरझाना और गिरना इसी के कारण होता है।

    8. जंतुओं में हार्मोन (Endocrine System)

    तंत्रिका तंत्र की कुछ सीमाएँ हैं (यह हर कोशिका तक नहीं पहुँच सकता और लगातार काम नहीं कर सकता)। इसलिए रसायनिक समन्वय (हार्मोन) का उपयोग होता है।

    अंतःस्रावी ग्रंथियाँ (Endocrine Glands): ये नलिकाविहीन (Ductless) ग्रंथियाँ होती हैं जो अपना स्राव (हार्मोन) सीधे रक्त में छोड़ती हैं। रक्त के माध्यम से हार्मोन अपने लक्ष्य अंग (Target Organ) तक पहुँचते हैं।

    प्रमुख मानव ग्रंथियाँ और उनके कार्य (विस्तृत)

    1. पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland) – “मास्टर ग्रंथि”

    • स्थान: मस्तिष्क के आधार में।
    • हार्मोन: वृद्धि हार्मोन (Growth Hormone – GH)।
    • कार्य: हड्डियों और मांसपेशियों की वृद्धि नियंत्रित करना।
    • विकार: बचपन में कमी से ‘बौनापन’ (Dwarfism) और अधिकता से ‘विशालकायता’ (Gigantism)।

    2. अवटु ग्रंथि (Thyroid Gland)

    • स्थान: गले में (श्वासनली के पास)।
    • हार्मोन: थायरॉक्सिन (Thyroxin)।
    • कार्य: शरीर में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के उपापचय (Metabolism) का नियंत्रण ताकि वृद्धि के लिए उत्कृष्ट संतुलन मिल सके।
    • महत्वपूर्ण नोट: थायरॉक्सिन बनाने के लिए आयोडीन आवश्यक है। यदि भोजन में आयोडीन की कमी हो, तो यह ग्रंथि फूल जाती है, जिसे घेंघा (Goitre) रोग कहते हैं। इसीलिए आयोडीन युक्त नमक खाने की सलाह दी जाती है।

    3. अग्न्याशय (Pancreas)

    • स्थान: आमाशय के नीचे।
    • हार्मोन: इन्सुलिन (Insulin)।
    • कार्य: रक्त में शर्करा (Glucose) के स्तर को कम करना।
    • मधुमेह (Diabetes): यदि इंसुलिन कम बनता है, तो रक्त में शुगर बढ़ जाती है। उपचार के लिए रोगियों को इंसुलिन के इंजेक्शन लेने पड़ते हैं।

    4. अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal Gland)

    • स्थान: दोनों गुर्दों (Kidneys) के ऊपर टोपी की तरह।
    • हार्मोन: एड्रीनेलिन (Adrenaline)।
    • कार्य: इसे “लड़ो या भागो” (Fight or Flight) हार्मोन कहते हैं।
    • क्रियाविधि: जब हम डरते हैं, तो यह सीधा रक्त में स्रावित होता है → हृदय की धड़कन बढ़ती है → मांसपेशियों को ज्यादा ऑक्सीजन मिलती है → सांस तेज होती है → पाचन तंत्र में रक्त कम हो जाता है। यह शरीर को आपातकाल के लिए तैयार करता है।

    5. जनन ग्रंथियाँ (Gonads)

    • वृषण (Testis) – केवल पुरुषों में: टेस्टोस्टेरोन स्रावित करता है। शुक्राणु निर्माण और यौवनारंभ (Puberty) के लक्षण (दाढ़ी-मूंछ, भारी आवाज) नियंत्रित करता है।
    • अंडाशय (Ovary) – केवल महिलाओं में: एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन। मासिक चक्र, डिंब निर्माण और स्त्री सुलभ लक्षणों का विकास।

    पुनर्निवेश क्रियाविधि (Feedback Mechanism)

    हार्मोन की मात्रा का सटीक होना बहुत जरूरी है। शरीर खुद इसे नियंत्रित करता है।
    उदाहरण:
    रक्त में शुगर बढ़ी → अग्न्याशय ने संसूचित (Detect) किया → अधिक इंसुलिन स्रावित किया → शुगर का स्तर गिरा → अग्न्याशय ने इंसुलिन बनाना बंद/कम कर दिया।
    इसे ही फीडबैक तंत्र कहते हैं।


    9. महत्वपूर्ण अंतर (Difference Tables)

    (क) तंत्रिका तंत्र बनाम अंतःस्रावी तंत्र (Nervous vs Hormonal System)

    गुण तंत्रिका नियंत्रण हार्मोनल नियंत्रण
    माध्यम विद्युत आवेग (Electrical Impulse) रसायन (Chemical Messenger)
    गति अत्यधिक तीव्र धीमी
    प्रसार विशिष्ट कोशिकाओं तक ही सीमित (जहाँ तंत्रिका जुड़ी हो) रक्त के माध्यम से शरीर की सभी कोशिकाओं तक पहुँच सकता है
    अवधि अल्पकालिक (Short-lived) दीर्घकालिक (Long-lasting)

    (ख) प्रतिवर्ती क्रिया बनाम टहलना (Reflex vs Walking)

    प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action) टहलना (Walking)
    यह एक अनैच्छिक क्रिया है। यह एक ऐच्छिक क्रिया है।
    मुख्यतः मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित होती है। मस्तिष्क (अनुमस्तिष्क और प्रमस्तिष्क) द्वारा नियंत्रित होती है।
    यह जन्मजात होती है। यह सीखी जाती है।

    10. बोर्ड परीक्षा विशेष: प्रश्न और रणनीतियाँ

    महत्वपूर्ण आरेख (Diagrams to Practice)

    परीक्षा में केवल साफ-सुथरे (Neat) और नामांकित (Labelled) आरेख के अंक मिलते हैं। इन तीन का अभ्यास अवश्य करें:

    1. न्यूरॉन की संरचना: केंद्रक, द्रुमिका, एक्सॉन, और तंत्रिका सिरा दिखाएं। दिशा (Direction of Impulse) जरूर इंगित करें।
    2. प्रतिवर्ती चाप: संवेदी तंत्रिका, मेरुरज्जु और प्रेरक तंत्रिका का प्रवाह दिखाएं।
    3. मानव मस्तिष्क: प्रमस्तिष्क, अनुमस्तिष्क, मेडुला और पीयूष ग्रंथि की स्थिति।

    पिछले वर्षों के प्रश्न (Topper’s Insights)

    प्रश्न 1: पादप में रसायनानुवर्तन (Chemotropism) क्या है? उदाहरण दीजिए। (2 अंक)

    आदर्श उत्तर: पादप के किसी भाग की रसायनों के उद्दीपन के प्रति होने वाली गति रसायनानुवर्तन कहलाती है।
    उदाहरण: निषेचन के समय पराग नलिका (Pollen tube) का बीजांड (Ovule) की ओर वृद्धि करना। यह बीजांड द्वारा स्रावित रसायनों के कारण होता है।

    प्रश्न 2: जंतुओं में नियंत्रण एवं समन्वय के लिए तंत्रिका तथा हार्मोन क्रियाविधि की तुलना कीजिए। (3 अंक)

    रणनीति: इसका उत्तर हमेशा ऊपर दी गई ‘तंत्रिका तंत्र बनाम अंतःस्रावी तंत्र’ तालिका के रूप में लिखें। पैराग्राफ में लिखने से अंक कट सकते हैं।

    प्रश्न 3: आयोडीन युक्त नमक के उपयोग की सलाह क्यों दी जाती है? (2 अंक)

    आदर्श उत्तर: अवटु ग्रंथि (Thyroid gland) को ‘थायरॉक्सिन’ हार्मोन बनाने के लिए आयोडीन की आवश्यकता होती है। थायरॉक्सिन हमारे शरीर में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के उपापचय को नियंत्रित करता है। आयोडीन की कमी से यह हार्मोन नहीं बन पाता जिससे ‘घेंघा’ (Goitre) रोग हो सकता है। इसलिए स्वास्थ्य रक्षा के लिए आयोडाइज्ड नमक जरूरी है।

    प्रश्न 4: “छुई-मुई” पादप में गति तथा हमारी टांगों में होने वाली गति में क्या अंतर है? (3 अंक)

    आदर्श उत्तर:
    1. नियंत्रण: छुई-मुई में गति रसायनों और जल की मात्रा (Turgor pressure) बदलने से होती है, जबकि टांगों में गति तंत्रिका तंत्र और पेशीय संकुचन (प्रोटीन) द्वारा होती है।
    2. ऊतक: पौधों में विशिष्ट पेशी ऊतक नहीं होते, जंतुओं में होते हैं।
    3. सूचना प्रसारण: पौधों में विद्युत-रसायन माध्यम धीमा है, जंतुओं में तंत्रिका आवेग बहुत तेज है।

    त्वरित पुनरावृत्ति (Quick Revision Points)

    • सिनैप्स: वह स्थान जहाँ विद्युत संकेत रासायनिक संकेत में बदलता है।
    • मस्तिष्क का रक्षक: कपाल (Skull) और मेरु द्रव (CSF)।
    • मेरुरज्जु का रक्षक: कशेरुक दंड (Vertebral Column/Backbone)।
    • डायबिटीज का कारण: अग्न्याशय से इंसुलिन की कमी।
    • सबसे बड़ा मस्तिष्क भाग: प्रमस्तिष्क (Cerebrum)।
    • संतुलन का केंद्र: अनुमस्तिष्क (Cerebellum)।
    • वृद्धि संदमक हार्मोन: एब्सिसिक एसिड।
    • फल पकाने वाला हार्मोन: एथिलीन (Ethylene) – (अतिरिक्त जानकारी)।

    निष्कर्ष

    प्रिय विद्यार्थियों, यह अध्याय जीव विज्ञान का सबसे रोचक अध्याय है। यह न केवल परीक्षा में अच्छे अंक दिलाता है बल्कि हमें यह भी सिखाता है कि हमारा शरीर एक अद्भुत मशीन है।

    सफलता का मूल मंत्र: रटने की जगह ‘फ्लो-चार्ट’ (Flow-chart) बनाकर याद करें। जैसे: उद्दीपन → ग्राही → मस्तिष्क → पेशी → अनुक्रिया। बोर्ड परीक्षा में अपने उत्तरों को बिंदुओं (Points) में लिखें और जहाँ संभव हो, चित्र अवश्य बनाएँ।

    शुभकामनाएं!

Manikant kumar Yadav
Manikant kumar Yadav

नमस्कार! मैं हूँ SelfShiksha का संस्थापक, और मेरा मकसद है शिक्षा को आसान बनाना। इस वेबसाइट के माध्यम से मैं छात्रों को बोर्ड परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा और करियर से जुड़ी सटीक जानकारी प्रदान करता हूँ, ताकि हर छात्र अपनी मंज़िल पा सके।

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