कक्षा -10 : कार्बन एवं उसके यौगिक

Carbon and Its Compounds का रंगीन शैक्षणिक इन्फोग्राफिक, जिसमें कार्बन परमाणु, अणु संरचना और रासायनिक यौगिक दिखाए गए हैं
कक्षा 10वीं रसायन विज्ञान – Carbon and Its Compounds का विज़ुअल इन्फोग्राफिक

भाग 1: कार्बन एवं उसके यौगिक (मूलभूत सिद्धांत)

कक्षा: 10वीं विज्ञान | अध्याय: 4

नमस्ते दोस्तों! यह नोट्स का पहला भाग है। इसमें हम कार्बन की “ABCD” सीखेंगे। यानी कार्बन क्या है, वह बॉन्ड कैसे बनाता है, और उसके यौगिकों के नाम कैसे रखे जाते हैं। यह नींव (foundation) है, इसे पक्का कर लिया तो आगे का चैप्टर बहुत आसान हो जाएगा।

1. कार्बन: एक जादुई तत्व

कार्बन एक ऐसा तत्व है जो सर्वव्यापी है। ‘Carbon’ शब्द लैटिन शब्द ‘Carbo’ से बना है जिसका अर्थ है ‘कोयला’।

  • उपस्थिति: भूपर्पटी में (खनिज के रूप में) केवल 0.02% और वायुमंडल में (CO2 के रूप में) 0.03% है।
  • महत्व: सभी सजीवों (पौधे, जंतु) का शरीर कार्बन यौगिकों से बना है। हमारा भोजन, कपड़े, दवाइयां, किताबें – सब कार्बन पर आधारित हैं।

2. कार्बन में आबंध (Bonding): सहसंयोजी आबंध

कार्बन का परमाणु क्रमांक 6 है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास K=2, L=4 है। अपना अष्टक (Octet) पूरा करने के लिए इसे 4 इलेक्ट्रॉनों की जरूरत होती है।

कार्बन आयनिक बॉन्ड (Ionic Bond) क्यों नहीं बनाता?

आयनिक बॉन्ड में इलेक्ट्रॉन या तो पूरी तरह दे दिए जाते हैं या ले लिए जाते हैं। लेकिन कार्बन के लिए यह संभव नहीं है:

  • 4 इलेक्ट्रॉन खोना (C4+): इसके लिए बहुत अधिक ऊर्जा की जरूरत होगी, जो संभव नहीं है।
  • 4 इलेक्ट्रॉन लेना (C4-): 6 प्रोटॉन वाले छोटे नाभिक के लिए 10 इलेक्ट्रॉनों को संभालना मुश्किल हो जाएगा और परमाणु अस्थिर हो जाएगा।

समाधान: सहसंयोजी आबंध (Covalent Bond)

कार्बन अपनी समस्या को “साझेदारी” (Sharing) से सुलझाता है। जब दो परमाणु अपने इलेक्ट्रॉनों को आपस में बांट लेते हैं, तो इसे सहसंयोजी आबंध कहते हैं।

  • H2 का बनना: हाइड्रोजन के पास 1 इलेक्ट्रॉन है। दो हाइड्रोजन परमाणु अपने 1-1 इलेक्ट्रॉन की साझेदारी करते हैं। (एकल आबंध)
  • O2 का बनना: ऑक्सीजन को 2 इलेक्ट्रॉन चाहिए। दो ऑक्सीजन परमाणु 2-2 इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करते हैं। (द्वि आबंध)
  • N2 का बनना: नाइट्रोजन को 3 इलेक्ट्रॉन चाहिए। दो नाइट्रोजन परमाणु 3-3 इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करते हैं। (त्रि आबंध)

3. कार्बन के अपररूप (Allotropes)

प्रकृति में कार्बन शुद्ध रूप में तीन अलग-अलग भौतिक अवस्थाओं में मिलता है:

गुण हीरा (Diamond) ग्रेफाइट (Graphite)
संरचना दृढ़ त्रिआयामी (3D) संरचना। एक कार्बन 4 अन्य कार्बन से जुड़ा होता है। षट्कोणीय तल (Hexagonal Arrays)। एक कार्बन 3 अन्य कार्बन से जुड़ा होता है। परतों के बीच कमजोर बल होता है।
कठोरता सर्वाधिक कठोर प्राकृतिक पदार्थ। मुलायम और चिकना (फिसलनदार)।
चालकता बिजली का कुचालक (Insulator)। बिजली का सुचालक (Conductor) क्योंकि इसमें एक ‘मुक्त इलेक्ट्रॉन’ होता है।
उपयोग गहने, कांच काटने के औजार। पेंसिल की लीड, स्नेहक (Lubricant)।

तीसरा अपररूप: फुलरीन (C-60), जिसकी संरचना फुटबॉल जैसी होती है।

4. कार्बन की सर्वतोमुखी प्रकृति (Versatile Nature)

कार्बन के इतने सारे यौगिक क्यों हैं? इसके दो मुख्य कारण हैं:

  1. श्रृंखलन (Catenation): कार्बन में कार्बन के ही परमाणुओं के साथ जुड़ने का अनोखा गुण है। यह लंबी चेन, शाखाएं और रिंग बना सकता है। सिलिकॉन भी चेन बनाता है लेकिन वह 7-8 परमाणुओं तक ही सीमित और अस्थिर होती है, जबकि कार्बन की चेन बहुत स्थिर और लंबी होती है।
  2. चतुर्षंयोजकता (Tetravalency): कार्बन की संयोजकता 4 है। यह ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, सल्फर और हैलोजन के साथ भी बॉन्ड बना सकता है।

5. संतृप्त और असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (विस्तृत)

(क) संतृप्त हाइड्रोकार्बन (Saturated Hydrocarbons)

  • इन्हें एल्केन (Alkanes) कहते हैं।
  • सभी कार्बन परमाणुओं के बीच एकल आबंध (Single Bond) होता है।
  • सामान्य सूत्र: CnH2n+2
  • उदाहरण:
    • n=1: मीथेन (CH4)
    • n=2: एथेन (C2H6)
    • n=3: प्रोपेन (C3H8)

(ख) असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (Unsaturated Hydrocarbons)

  • एल्कीन (Alkenes): कार्बन-कार्बन के बीच कम से कम एक द्वि आबंध (=)। सूत्र: CnH2n (उदा: एथीन C2H4)
  • एल्काइन (Alkynes): कार्बन-कार्बन के बीच कम से कम एक त्रि आबंध (≡)। सूत्र: CnH2n-2 (उदा: एथाइन C2H2)

6. नामकरण (Nomenclature) के नियम

IUPAC नाम लिखने के लिए कार्बन परमाणुओं की संख्या गिनें:

  • 1 कार्बन = मेथ (Meth)
  • 2 कार्बन = एथ (Eth)
  • 3 कार्बन = प्रोप (Prop)
  • 4 कार्बन = ब्यूट (But)
  • 5 कार्बन = पेंट (Pent)
  • 6 कार्बन = हेक्स (Hex)

पीछे क्या लगाएं (Suffix)?

  • Single Bond है तो: -एन (-ane) (जैसे: मेथ + एन = मीथेन)
  • Double Bond है तो: -ईन (-ene) (जैसे: एथ + ईन = एथीन)
  • Triple Bond है तो: -आइन (-yne) (जैसे: एथ + आइन = एथाइन)

7. समावयवता (Isomerism)

कल्पना करें आपके पास लेगो (Lego) के कुछ टुकड़े हैं। आप उनसे एक मीनार बना सकते हैं या एक घर। टुकड़े वही हैं, लेकिन संरचना अलग है।

वैसे ही, जब यौगिकों का आणविक सूत्र समान हो लेकिन संरचना अलग-अलग हो, तो उन्हें ‘संरचनात्मक समावयवी’ कहते हैं।

उदाहरण: पेंटेन (C5H12) के 3 समावयवी हैं:

  1. n-पेंटेन (सीधी चेन)
  2. आइसो-पेंटेन (एक कार्बन की शाखा)
  3. निओ-पेंटेन (दो कार्बन की शाखाएं)

अगले भाग (Part 2) में हम रासायनिक अभिक्रियाओं और साबुन के बारे में पढ़ेंगे।

भाग 2: कार्बन यौगिक – रासायनिक गुण और महत्वपूर्ण पदार्थ

कक्षा: 10वीं विज्ञान | अध्याय: 4

स्वागत है भाग 2 में! अब हम रसायन विज्ञान की असली प्रयोगशाला में चलेंगे। यहाँ हम देखेंगे कि कार्बन के यौगिक आग के साथ कैसे खेलते हैं, शराब (Alcohol) और सिरका (Vinegar) कैसे बनता है, और साबुन मैल को कैसे मार भगाता है। यह हिस्सा परीक्षा के लिए ‘Very Important’ है।

1. कार्बन यौगिकों के रासायनिक गुणधर्म

(क) दहन (Combustion – जलना)

सभी कार्बन यौगिक ऑक्सीजन में जलकर तीन चीजें देते हैं: CO2 + पानी + ऊष्मा/प्रकाश

ज्वाला का रंग क्यों बदलता है?

  • साफ़ नीली ज्वाला: जब ‘संतृप्त हाइड्रोकार्बन’ (जैसे LPG गैस) को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है, तो उसका पूरा दहन होता है।
  • पीली धुआं वाली ज्वाला: जब ‘असंतृप्त हाइड्रोकार्बन’ जलते हैं या ऑक्सीजन कम होती है, तो बिना जले कार्बन कण निकलते हैं जो पीले रंग के साथ चमकते हैं और कालिख (soot) बनाते हैं।

(ख) ऑक्सीकरण (Oxidation)

कार्बन यौगिकों को ऑक्सीजन जोड़कर दूसरे यौगिकों में बदला जा सकता है।

अभिक्रिया: एथेनॉल → एथेनोइक अम्ल

इस काम के लिए हमें ‘ऑक्सीकारक’ (Oxidizing Agents) की जरूरत पड़ती है जो ऑक्सीजन दे सकें।
मुख्य ऑक्सीकारक: क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट (Alk. KMnO4) या अम्लीय पोटैशियम डाइक्रोमेट (Acidified K2Cr2O7)।

(ग) संकलन अभिक्रिया (Addition Reaction)

यह केवल ‘असंतृप्त’ हाइड्रोकार्बन (Double/Triple bond) में होती है।

उपयोग: वनस्पति तेल (Unsaturated) को वनस्पति घी (Saturated) में बदलना।

इसमें निकैल (Ni) या पैलेडियम (Pd) उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन जोड़ा जाता है। इसे हाइड्रोजनीकरण कहते हैं।

स्वास्थ्य नोट: जंतु वसा (जैसे देसी घी) में संतृप्त वसा होती है जो हानिकारक हो सकती है। वनस्पति तेल स्वास्थ्य के लिए बेहतर होते हैं।

(घ) प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Substitution Reaction)

संतृप्त हाइड्रोकार्बन बहुत शांत होते हैं, लेकिन सूर्य के प्रकाश में क्लोरीन तेजी से हाइड्रोजन को हटाकर उसकी जगह ले लेता है।

CH4 + Cl2 → CH3Cl + HCl (सूर्य के प्रकाश में)

2. कुछ महत्वपूर्ण कार्बन यौगिक

(A) एथेनॉल (Ethanol – C2H5OH)

गुण: रंगहीन, अच्छी गंध, पानी में घुलनशील। इसे ‘अल्कोहल’ कहा जाता है।

उपयोग:

  • पीने वाले पेय पदार्थों में (व्हिस्की, बीयर आदि)।
  • दवाइयों में (टिंचर आयोडीन, कफ सिरप, टॉनिक)।
  • ईंधन के रूप में (गन्ने के रस से इसे बनाकर पेट्रोल में मिलाया जाता है – Power Alcohol)।

हानिकारक प्रभाव: इसका सेवन केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) को धीमा कर देता है, जिससे निर्णय लेने की क्षमता कम हो जाती है। मेथेनॉल (जहरीली शराब) पीने से अंधापन या मौत भी हो सकती है क्योंकि यह लिवर में जाकर जम जाता है।

(B) एथेनोइक अम्ल (Ethanoic Acid – CH3COOH)

गुण: इसे एसिटिक एसिड कहते हैं। इसका गलनांक बहुत कम (290K) होता है, इसलिए सर्दियों में यह जम जाता है, जिसे ‘ग्लेशियल एसिटिक एसिड’ कहते हैं।

सिरका (Vinegar): पानी में 5-8% एसिटिक एसिड का विलयन सिरका कहलाता है (अचार संरक्षक)।

महत्वपूर्ण अभिक्रियाएं (Exam Special):

  1. एस्टरीकरण (Esterification): अम्ल + अल्कोहल → एस्टर। (एस्टर का उपयोग इत्र/Perfume बनाने में होता है)।
  2. साबुनीकरण (Saponification): एस्टर + क्षार (NaOH) → साबुन + अल्कोहल।
  3. बुदबुदाहट (Effervescence): जब यह बेकिंग सोडा (NaHCO3) से मिलता है, तो तेजी से CO2 गैस निकलती है। यह इसकी पहचान है।

3. साबुन और अपमार्जक (Soaps and Detergents)

साबुन (Soap)

यह लंबी श्रृंखला वाले कार्बोक्सिलिक अम्लों का सोडियम या पोटैशियम लवण है।

सफाई की क्रियाविधि (Mechanism):

  • साबुन के अणु के दो भाग होते हैं:
    1. जलरागी (Hydrophilic) सिर: पानी में घुलता है।
    2. जलविरागी (Hydrophobic) पूंछ: तेल/मैल में घुलता है।
  • मिसेल (Micelle) निर्माण: पानी में साबुन के अणु एक गोलाकार गुच्छा बनाते हैं। तेल/मैल बीच में फंस जाता है (पूंछ की तरफ) और बाहरी हिस्सा (सिर) पानी में रहता है। पानी खंगालने पर मिसेल के साथ मैल बह जाती है।

कठोर जल (Hard Water) की समस्या

कुएं या हैंडपंप के पानी में कैल्शियम (Ca) और मैग्नीशियम (Mg) लवण होते हैं। साबुन इनके साथ अभिक्रिया करके एक अघुलनशील पदार्थ ‘स्कम’ (Scum) बनाता है (फटा हुआ दूध जैसा)। इसलिए झाग नहीं बनता और सफाई नहीं होती।

अपमार्जक (Detergents)

ये सल्फोनिक अम्लों के लवण होते हैं।

विशेषता: ये कठोर जल के कैल्शियम/मैग्नीशियम के साथ अघुलनशील अवक्षेप नहीं बनाते। इसलिए ये खारे पानी में भी खूब झाग देते हैं। शैम्पू और कपड़े धोने के पाउडर डिटर्जेंट ही होते हैं।

साबुन अपमार्जक (Detergent)
वसीय अम्लों के सोडियम लवण। सल्फोनिक अम्लों के लवण।
कठोर जल में काम नहीं करते। कठोर जल में भी अच्छा काम करते हैं।
जैव-निम्नीकरणीय (Biodegradable) – पर्यावरण मित्र। कुछ अजैव-निम्नीकरणीय होते हैं – प्रदूषण करते हैं।

निष्कर्ष और परीक्षा की तैयारी (Conclusion & Exam Prep)

मेरे प्यारे दोस्तों, इसी के साथ हमारा ‘कार्बन और उसके यौगिक’ का सफर यहाँ पूरा होता है। यह अध्याय थोड़ा लंबा ज़रूर था, लेकिन अगर आपने इसे ध्यान से समझा है, तो यह रसायन विज्ञान का सबसे मजेदार हिस्सा है।

परीक्षा के लिए अंतिम सुझाव (Final Exam Tips):

  • 📝 लिखकर याद करें: रासायनिक अभिक्रियाएं (खासकर एस्टरीकरण और साबुनीकरण) सिर्फ़ पढ़ने से याद नहीं होंगी। उन्हें कम से कम 5 बार अपनी कॉपी में लिखें और संतुलित (Balance) करें।
  • 🧼 साबुन vs अपमार्जक: कठोर जल में साबुन क्यों फेल हो जाता है और डिटर्जेंट क्यों पास हो जाता है, इसका कारण (स्कम बनना) स्पष्ट रूप से समझें। मिसेल का चित्र बनाना न भूलें।
  • 🔥 दहन और ऑक्सीकरण: नीली और पीली ज्वाला का अंतर, और ऑक्सीकारक का कार्य – ये छोटे प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
  • 🧪 अंतर पहचानें: एथेनॉल और एथेनोइक अम्ल के भौतिक और रासायनिक गुणों में अंतर की एक तालिका (Table) बनाकर याद करें।

याद रखिये, विज्ञान रटने का नहीं, ‘क्यों’ और ‘कैसे’ पूछने का नाम है। जब आप कॉन्सेप्ट को समझ लेते हैं, तो कोई भी प्रश्न कठिन नहीं लगता। अपनी मेहनत पर भरोसा रखें, रिविज़न करते रहें, और परीक्षा में अपना सर्वश्रेष्ठ दें।

“सफलता उन्हीं को मिलती है जो तैयारी करते हैं। आप सक्षम हैं, आप कर सकते हैं! शुभकामनाएँ!”

पाठ 4: कार्बन एवं उसके यौगिक (Part 1)

लक्ष्य: बिहार बोर्ड मैट्रिक (Science)
नोट्स टाइप: हस्तलिखित (Handwritten Style)


1. कार्बन: एक परिचय (Introduction)

कार्बन एक ऐसा तत्व है जो हर जीवित चीज़ में मौजूद है। इसे रसायन विज्ञान का ‘राजा’ कह सकते हैं।

  • संकेत (Symbol): C
  • परमाणु संख्या: 6
  • विन्यास: 2, 4 (K=2, L=4)
  • संयोजकता: 4 (Tetravalency)

👉 VVI: भूपर्पटी में कार्बन 0.02% और वायुमंडल में 0.03% (CO2) है।


2. कार्बन में आबंध (Bonding)

कार्बन न इलेक्ट्रॉन देता है, न लेता है। यह सिर्फ साझेदारी (Sharing) करता है। इसे ‘सहसंयोजी आबंध’ कहते हैं।

Q. कार्बन C4+ या C4- क्यों नहीं बनाता?

  1. C4- (4 इलेक्ट्रॉन लेना): 6 प्रोटॉन वाले छोटे नाभिक के लिए 10 इलेक्ट्रॉन संभालना मुश्किल है। (परमाणु फट सकता है!)
  2. C4+ (4 इलेक्ट्रॉन देना): 4 इलेक्ट्रॉन निकालने में बहुत ज्यादा ऊर्जा खर्च होगी।

निष्कर्ष: इसलिए कार्बन “साझेदारी” से काम चलाता है।

सहसंयोजी आबंध के प्रकार

  • एकल आबंध (Single Bond): 1-1 इलेक्ट्रॉन की साझेदारी। (उदा: H-H, CH4)
  • द्वि आबंध (Double Bond): 2-2 इलेक्ट्रॉन की साझेदारी। (उदा: O=O, CO2)
  • त्रि आबंध (Triple Bond): 3-3 इलेक्ट्रॉन की साझेदारी। (उदा: N≡N)

3. कार्बन की जादुई शक्ति (Versatile Nature)

इसके दो मुख्य हथियार (गुण) हैं:

(क) श्रृंखलन (Catenation):
कार्बन खुद के साथ जुड़कर लंबी-लंबी चेन बना सकता है। सीधी चेन, शाखित चेन, या रिंग।

(ख) चतुर्षंयोजकता (Tetravalency):
इसके 4 हाथ हैं। यह ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, सल्फर, क्लोरीन… किसी से भी दोस्ती कर सकता है।


4. कार्बन के अपररूप (Allotropes)

गुण हीरा (Diamond) ग्रेफाइट (Graphite)
बनावट कठोर 3D जाली परतदार (फिसलन वाली)
बिजली कुचालक (No Current) सुचालक (Current Pass)
कठोरता सबसे कठोर मुलायम (पेंसिल लीड)

(Part 1 समाप्त। पन्ना पलटें…)

पाठ 4: हाइड्रोकार्बन (Part 2)

टॉपिक: फार्मूला और नामकरण (IUPAC)


1. हाइड्रोकार्बन के प्रकार

कार्बन + हाइड्रोजन की जोड़ी को हाइड्रोकार्बन कहते हैं।

(A) संतृप्त (Saturated) = एल्केन

  • इनमें कार्बन के बीच सिंगल बॉन्ड (-) होता है।
  • सूत्र: CnH2n+2 (दोगुने से 2 ज्यादा)
  • उदा: मीथेन (CH4), एथेन (C2H6)

(B) असंतृप्त (Unsaturated)

ये दो तरह के होते हैं:

  • 1. एल्कीन (Double Bond =):
    सूत्र: CnH2n (ठीक दोगुना)
    उदा: एथीन (C2H4)
  • 2. एल्काइन (Triple Bond ≡):
    सूत्र: CnH2n-2 (दोगुने से 2 कम)
    उदा: एथाइन (C2H2)

2. प्रकार्यात्मक समूह (Functional Groups)

ये वो समूह हैं जो जुड़ते ही यौगिक का गुण बदल देते हैं।

समूह पहचान नाम में जुड़ता है
हैलो -Cl, -Br क्लोरो, ब्रोमो (आगे)
एल्कोहॉल -OH -ऑल (ol)
एल्डिहाइड -CHO -अल (al)
कीटोन -CO- -ओन (one)
अम्ल -COOH -ओइक अम्ल

3. VVI परिभाषाएं

★ समजातीय श्रेणी (Homologous Series):
यौगिकों का ऐसा परिवार जहाँ सबके गुण समान हों और दो सदस्यों के बीच -CH2 का अंतर हो।
(द्रव्यमान में 14u का अंतर होता है।)

★ समावयवता (Isomerism):
जिनका फार्मूला समान हो, लेकिन दिखावट (संरचना) अलग हो।
उदा: नार्मल ब्यूटेन और आइसो-ब्यूटेन।

(Part 2 समाप्त। अगले पन्ने पर रिएक्शन देखें…)

पाठ 4: अभिक्रियाएं और साबुन (Part 3)

महत्वपूर्ण: 5 अंक वाले प्रश्न (Long Questions) यहाँ से आते हैं।


1. रासायनिक गुण (Chemical Properties)

(क) दहन (जलना):
कार्बन + ऑक्सीजन → CO2 + पानी + ऊष्मा
• नीली ज्वाला: जब पूरा जलता है (LPG)।
• पीली ज्वाला: जब धुआं निकलता है (मोमबत्ती)।

(ख) ऑक्सीकरण (Oxidation):
शराब (Ethanol) को सिरका (Acid) बनाना।
एथेनॉल → एथेनोइक अम्ल (KMnO4 की मदद से)

(ग) संकलन (Addition) – VVI:
वनस्पति तेल (Unsaturated) में हाइड्रोजन जोड़कर ‘घी’ बनाना।
तेल + H2 → घी (Ni उत्प्रेरक)


2. एथेनॉल vs एथेनोइक अम्ल

एथेनॉल (दारू) एथेनोइक अम्ल (सिरका)
मीठी गंध तीखी खट्टी गंध
उदासीन (Neutral) अम्लीय (Acidic)
सोडियम से H2 गैस निकलती है सोडा से CO2 (बुदबुदाहट) निकलती है

👉 रट लें (Reactions):
1. एस्टरीकरण: एसिड + अल्कोहल → एस्टर (इत्र जैसी खुशबू)।
2. साबुनीकरण: एस्टर + क्षार → साबुन।


3. साबुन और सर्फ़ (Soap & Detergent)

साबुन (Soap):

  • यह ‘कठोर जल’ (Hard Water) में झाग नहीं देता।
  • यह मैल के साथ ‘मिसेल’ (Micelle) बनाता है और सफाई करता है।
  • कठोर पानी में यह फट जाता है (स्कम बनाता है)।

अपमार्जक (Detergent):

  • यह खारे पानी में भी खूब झाग देता है।
  • शैम्पू और सर्फ़ इसी से बनते हैं।

“मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचा दे!”
शुभकामनाएँ! 👍

Manikant kumar Yadav
Manikant kumar Yadav

नमस्कार! मैं हूँ SelfShiksha का संस्थापक, और मेरा मकसद है शिक्षा को आसान बनाना। इस वेबसाइट के माध्यम से मैं छात्रों को बोर्ड परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा और करियर से जुड़ी सटीक जानकारी प्रदान करता हूँ, ताकि हर छात्र अपनी मंज़िल पा सके।

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