आधुनिक भारत का इतिहास : संघर्ष ,सुधार और स्वतंत्रता की महागाथा

Modern History of India Poster - Aadhunik Bharat Ka Itihas - SelfShiksha
आधुनिक भारत का इतिहास: संघर्ष और स्वतंत्रता की कहानी।

आधुनिक भारत: गुलामी की जंजीरों से आजादी के सूर्योदय तक की महागाथा

एक विस्तृत ऐतिहासिक दस्तावेज: रक्त, पसीने और आंसुओं से लिखी गई दास्तान

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का दृश्य
ये वो दास्तान है जो हर भारतीय की रगों में दौड़ती है।

आधुनिक भारत का इतिहास केवल राजाओं और गवर्नरों की सूची नहीं है। यह कहानी है उस भारत माँ की, जिसके हाथों में पहले सोने के कंगन थे, फिर लोहे की हथकड़ियाँ पहना दी गईं, और अंत में उसके बेटों ने अपने खून से उन हथकड़ियों को गला दिया। मुगलों के पतन से लेकर 1947 की उस ऐतिहासिक रात तक, आइए इस सफर के हर मोड़, हर आंसू और हर बलिदान को गहराई से जानते हैं।


अध्याय 1: समुद्र के रास्ते आई ‘गुलामी’ (1498 – 1757)

कल्पना कीजिए उस दौर की जब भारत दुनिया की कुल जीडीपी का एक चौथाई हिस्सा था। हमारी समृद्धि ही हमारी दुश्मन बन गई।

व्यापारी या लुटेरे?

20 मई 1498 को वास्को डी गामा कालीकट (केरल) के तट पर उतरा। जमोरिन राजा ने उसका स्वागत किया, यह न जानते हुए कि वह एक मेहमान नहीं, बल्कि आने वाले तूफान का संकेत है। पुर्तगाली आए, फिर डच, अंग्रेज और फ्रांसीसी। शुरू में उन्होंने हाथ जोड़कर व्यापार की भीख मांगी, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने हमारी आपसी फूट को भांप लिया।

प्लासी का विश्वासघात (1757)

बंगाल, जो उस समय भारत का सबसे अमीर प्रांत था, अंग्रेजों की आँखों में खटक रहा था। नवाब सिराजुद्दौला ने अंग्रेजों की मनमानी रोकने की कोशिश की। लेकिन क्लाइव ने युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि महलों के अंदर साजिश रची। सिराजुद्दौला के सेनापति मीर जाफर ने चंद सिक्कों और गद्दी के लालच में देश बेच दिया। प्लासी के आम के बागों में उस दिन युद्ध नहीं हुआ, बल्कि भारत की आजादी का सौदा हुआ।

अध्याय 2: कंपनी का क्रूर शासन और आर्थिक लूट (1757 – 1857)

प्लासी के बाद बक्सर (1764) के युद्ध ने अंग्रेजों को वैधानिकता दे दी। अब वे ‘व्यापारी’ से ‘शासक’ बन गए थे।

  • धन की निकासी (Drain of Wealth): दादाभाई नौरोजी ने बाद में बताया कि कैसे अंग्रेज स्पंज की तरह गंगा के किनारे से धन सोखते थे और टेम्स नदी (लंदन) में निचोड़ देते थे। भारतीय बुनकरों के अंगूठे काट दिए गए ताकि मैनचेस्टर का कपड़ा बिक सके।
  • लॉर्ड वेलेजली की सहायक संधि: भारतीय राजाओं को सुरक्षा के नाम पर अपनी सेना खत्म करनी पड़ी और अंग्रेजों के टुकड़े पर पलना पड़ा।
  • डलहौजी की हड़प नीति: जिस राजा का बेटा नहीं होता, उसका राज्य अंग्रेज छीन लेते। झाँसी, सतारा, उदयपुर—सब इस भूख का शिकार हुए।

अध्याय 3: 1857 की महाक्रांति – ‘मारो फिरंगी को!’

सौ साल के अपमान का बदला लेने के लिए 1857 में भारत जाग उठा। यह केवल सैनिकों का विद्रोह नहीं था, यह किसान, मजदूर और रानियों का संयुक्त हुंकार था।

मंगल पांडे की ललकार

29 मार्च 1857, बैरकपुर। मंगल पांडे ने जब ‘चर्बी वाले कारतूस’ का विरोध करते हुए सार्जेंट पर गोली चलाई, तो वह गोली सीधे ब्रिटिश साम्राज्य के सीने में लगी। उन्हें फांसी दी गई, लेकिन उनकी आत्मा हर सैनिक में समा गई।

रक्त रंजित संघर्ष

  • दिल्ली: विद्रोही सैनिकों ने लाल किले में घुसकर बूढ़े बादशाह बहादुर शाह जफर को अपना नेता चुना।
  • झाँसी: रानी लक्ष्मीबाई ने अपने दत्तक पुत्र को पीठ पर बांधकर, घोड़े की लगाम मुँह में दबाकर, दोनों हाथों से तलवार चलाई। ह्यू रोज (अंग्रेज जनरल) ने कहा था, “यहाँ सोए हुए विद्रोहियों में वह अकेली मर्द थी।”
  • कानपुर: नाना साहेब और तात्या टोपे ने अंग्रेजों को नाकों चने चबवा दिए।

अंग्रेजों ने दिल्ली को कसाईखाना बना दिया। पेड़ों पर लाशें लटकी थीं। क्रांति कुचल दी गई, लेकिन इसने ईस्ट इंडिया कंपनी का अंत कर दिया।

अध्याय 4: नवजागरण और राष्ट्रवाद का उदय (1858 – 1905)

तलवार टूटी थी, हौसला नहीं। भारत के बुद्धिजीवियों ने कलम उठाई। राजा राममोहन राय ने सती प्रथा के खिलाफ, ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने विधवा विवाह के लिए, और दयानंद सरस्वती ने “स्वराज्य” शब्द का पहली बार प्रयोग करते हुए समाज को जगाया।

1885 में कांग्रेस का जन्म: ए.ओ. ह्यूम ने एक ‘सेफ्टी वाल्व’ के रूप में कांग्रेस बनाई, लेकिन दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता और गोपाल कृष्ण गोखले ने इसे राष्ट्रवाद का मंच बना दिया।

अध्याय 5: “बंग-भंग” और गरम दल का तूफान (1905 – 1919)

1905 में लॉर्ड कर्जन ने हिंदू और मुसलमानों को बांटने के लिए बंगाल का विभाजन कर दिया। पूरा बंगाल रो पड़ा। रवींद्रनाथ टैगोर के आह्वान पर हिंदुओं और मुसलमानों ने एक-दूसरे को राखी बांधी। सड़कों पर “वंदे मातरम” के नारे गूंज उठे।

लाल-बाल-पाल का दौर

अब लोग भीख मांगना नहीं, छीनना जानते थे। तिलक ने गर्जना की—“स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।” अरविंद घोष और बिपिन चंद्र पाल ने निष्क्रिय प्रतिरोध का रास्ता दिखाया।

अध्याय 6: गांधी युग – सत्य और अहिंसा का प्रयोग (1919 – 1942)

1915 में, एक बैरिस्टर, मोहनदास करमचंद गांधी, भारत लौटे। उन्होंने सूट-बूट त्यागकर धोती अपनाई ताकि वे गरीब किसान का दर्द समझ सकें।

जलियांवाला बाग: एक गहरा जख्म (13 अप्रैल 1919)

बैसाखी का दिन था। अमृतसर के जलियांवाला बाग में हजारों निहत्थे लोग जमा थे। जनरल डायर ने बिना चेतावनी के गोलियां चलवाईं। 10 मिनट तक मौत का तांडव चला। कुआं लाशों से भर गया। इस घटना ने भगत सिंह जैसे बच्चों को क्रांतिकारी बना दिया और टैगोर ने अपनी ‘नाइटहुड’ की उपाधि लौटा दी।

गांधीजी के तीन बड़े आंदोलन

  1. असहयोग आंदोलन (1920): विदेशी कपड़ों की होली जलाई गई। छात्र स्कूल छोड़े, वकील अदालतें। भारत ने अंग्रेजों का सहयोग करना बंद कर दिया।
  2. सविनय अवज्ञा (1930): दांडी यात्रा। 78 अनुयायियों के साथ गांधीजी 240 मील चले और समुद्र तट पर नमक उठाकर अंग्रेजी कानून को तोड़ा।
  3. भारत छोड़ो आंदोलन (1942): “करो या मरो”। अब बात आर-पार की थी।

अध्याय 7: इंकलाब जिंदाबाद – क्रांतिकारियों की शहादत

एक तरफ बापू का अहिंसक मार्ग था, तो दूसरी तरफ वो नौजवान थे जो देश के लिए जान देने और लेने को तैयार थे।

भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव
हँसते-हँसते फाँसी चढ़ने वाले भारत माँ के लाल।
  • काकोरी के नायक: राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान। बिस्मिल ने फाँसी के फंदे को चूमते हुए कहा था, “अब न अगले वलवले हैं और न अरमानों की भीड़…”
  • भगत सिंह का दर्शन: उन्होंने असेंबली में बम किसी को मारने के लिए नहीं, बल्कि सोई हुई सरकार को जगाने के लिए फेंका था। जेल में 116 दिन की भूख हड़ताल ने अंग्रेजी हुकूमत को हिला दिया।
  • सुभाष चंद्र बोस: “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।” विदेश जाकर, हिटलर से मिलकर, जापान के सहयोग से आजाद हिंद फौज बनाई और भारत की सीमा पर तिरंगा फहराया।

अध्याय 8: स्वतंत्रता की वो खूनी सुबह (1947)

द्वितीय विश्व युद्ध ने ब्रिटेन को कंगाल कर दिया था। रॉयल नेवी में विद्रोह हो चुका था। अंग्रेज समझ गए थे कि अब जाना ही होगा। लेकिन जाते-जाते उन्होंने भारत के टुकड़े कर दिए।

विभाजन का दर्द

रेडक्लिफ लाइन ने केवल जमीन नहीं, दिलों को बांट दिया। पंजाब और बंगाल में नफरत की आग लग गई। ट्रेनें लाशों से भरकर आ रही थीं। जिस वक्त दिल्ली में आजादी का जश्न मन रहा था, गांधीजी नोआखली में दंगों की आग बुझा रहे थे।

15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि… शंखनाद हुआ। भारत आजाद हुआ। सैकड़ों सालों की गुलामी का अंत हुआ, लेकिन इसकी कीमत लाखों लोगों ने अपनी जान और घर-बार खोकर चुकाई।


निष्कर्ष: वो मशाल जो हमें थमाई गई है

इस इतिहास को पढ़ते हुए अगर आपकी आँखों में नमी और दिल में गर्व नहीं आया, तो शायद हम इसे समझ नहीं पाए। यह आजादी किसी कागज पर किए गए हस्ताक्षर से नहीं मिली है। यह उस 18 साल के खुदीराम बोस की फांसी, जलियांवाला बाग की खूनी मिट्टी, और काला पानी की जेल में घुट-घुट कर मरे उन अनगिनत कैदियों की बदौलत मिली है।

आज के आधुनिक भारत में जब हम अपने अधिकारों की बात करते हैं, तो हमें अपने कर्तव्यों को भी याद रखना होगा। उन शहीदों ने हमें एक आजाद देश दिया, अब इसे एक महान देश बनाना हमारी जिम्मेदारी है।

वंदे मातरम! जय हिन्द!


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UPSC Master Notes: Modern History – Handwritten

आधुनिक भारत का इतिहास

(UPSC Civil Services Master Notes)

1707 – 1947

विषय सूची (Index)

  • 1. मुगलों का पतन और यूरोपीय आगमन (Pg. 1-2)
  • 2. ब्रिटिश विजय (प्लासी, बक्सर, मैसूर, मराठा) (Pg. 3-4)
  • 3. आर्थिक नीतियां और प्रभाव (Pg. 5)
  • 4. 1857 का महाविद्रोह (Pg. 6)
  • 5. सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन (Pg. 7)
  • 6. राष्ट्रवाद का उदय और कांग्रेस (1885-1905) (Pg. 8)
  • 7. उग्रवाद और क्रांतिकारी चरण-I (Pg. 9)
  • 8. गांधी युग का आरंभ (1915-1922) (Pg. 10)
  • 9. सविनय अवज्ञा से भारत छोड़ो तक (Pg. 11-12)
  • 10. विभाजन और स्वतंत्रता (Pg. 13)
  • 11. संवैधानिक विकास (Important Acts) (Pg. 14)
  • 12. गवर्नर जनरल और वायसराय (List) (Pg. 15)

“History is a dialogue between the past and the present.”


Unit 1: यूरोपीय कंपनियों का आगमन

क्रम (Sequence): Portuguese → Dutch → English → Danish → French

1. पुर्तगाली (Portuguese – 1498)

  • वास्को डी गामा: 17 मई 1498 को कालीकट (केरल) पहुंचा। राजा जमोरिन ने स्वागत किया।
  • फ्र्रांसिस्को डी अल्मीडा (1505-09): प्रथम गवर्नर। ‘Blue Water Policy’ (शांत जल की नीति) अपनाई – हिंद महासागर पर नियंत्रण।
  • अल्बुकर्क (1509-15): पुर्तगाली शक्ति का वास्तविक संस्थापक। 1510 में बीजापुर से गोवा छीना। सती प्रथा पर रोक लगाई।
  • योगदान: तंबाकू की खेती, प्रिंटिंग प्रेस (1556), जहाज निर्माण।

2. डच (Dutch – 1602)

  • नीदरलैंड (हॉलैंड) से। मुख्य रुचि: मसाला व्यापार (इंडोनेशिया)।
  • भारत में वस्त्र व्यापार को बढ़ावा दिया।
  • वेदरा का युद्ध (1759): अंग्रेजों ने डचों को हराकर भारत से बाहर किया।

3. अंग्रेज (British EIC – 1600)

  • 31 Dec 1600: महारानी एलिजाबेथ I ने चार्टर दिया।
  • 1608: कैप्टन हॉकिंस जहांगीर के दरबार आया।
  • 1613: सूरत में पहली स्थायी फैक्ट्री।
  • मैग्नाकार्टा (1717): फर्रुखसियर का फरमान – बंगाल में शुल्क मुक्त व्यापार (Dastak)।

4. फ्रांसीसी (French – 1664)

  • लुई XIV के मंत्री कोलबर्ट द्वारा स्थापित (सरकारी कंपनी)।
  • पहली फैक्ट्री: सूरत (1668, फ्रैंकोइस कैरन)।

Mains Point: एंग्लो-फ्रेंच प्रतिद्वंद्विता (Carnatic Wars)

  • प्रथम युद्ध (1746-48): ऑस्ट्रिया के उत्तराधिकार युद्ध का विस्तार। (एक्स-ला-चैपल संधि)।
  • द्वितीय युद्ध (1749-54): हैदराबाद और कर्नाटक की गद्दी के लिए। डुप्ले की वापसी।
  • तृतीय युद्ध (1758-63): पेरिस की संधि। वांडीवाश के युद्ध (1760) में आयरकूट ने फ्रांसीसियों को पूरी तरह हराया।

Unit 2: ब्रिटिश साम्राज्य का विस्तार

A. बंगाल विजय (Conquest of Bengal)

बंगाल मुगल साम्राज्य का सबसे समृद्ध प्रांत था।

1. प्लासी का युद्ध (23 जून 1757)

  • कारण: सिराज-उद-दौला द्वारा अंग्रेजों की किलेबंदी रोकना, दस्तक का दुरुपयोग, ब्लैक होल त्रासदी।
  • षड्यंत्र: क्लाइव ने मीर जाफर (सेनापति), राय दुर्लभ और जगत सेठ को अपनी ओर मिलाया।
  • परिणाम: यह एक ‘सशस्त्र झड़प’ मात्र थी। मीर जाफर कठपुतली नवाब बना। अंग्रेजों को ’24 परगना’ की जागीर मिली।

2. बक्सर का युद्ध (22 अक्टूबर 1764)

  • महत्व: प्लासी ने पैर जमाए, बक्सर ने उसे कानूनी बना दिया।
  • पक्ष: हेक्टर मुनरो (ब्रिटिश) Vs. मीर कासिम + शुजा-उद-दौला (अवध) + शाह आलम II (मुगल)।
  • अंग्रेजों की सैन्य श्रेष्ठता सिद्ध हुई।

Treaty Analysis: इलाहाबाद की संधि (1765)

  • मुगल बादशाह से: बंगाल, बिहार, उड़ीसा की दीवानी (राजस्व अधिकार) कंपनी को मिली।
  • अवध से: कड़ा और इलाहाबाद बादशाह को दिया। युद्ध हर्जाना दिया।
  • बंगाल में द्वैध शासन (1765-72): “अधिकार बिना उत्तरदायित्व” (कंपनी) और “उत्तरदायित्व बिना अधिकार” (नवाब)। के.एम. पणिक्कर ने इसे “डाकू राज्य” कहा।

B. आंग्ल-मैसूर युद्ध (Anglo-Mysore Wars)

युद्ध गवर्नर परिणाम / संधि
प्रथम (1767-69) वेरेल्स्ट मद्रास की संधि: हैदर अली भारी पड़ा।
द्वितीय (1780-84) वारेन हेस्टिंग्स मैंगलोर की संधि: पोर्टो नोवो युद्ध में हैदर की मृत्यु (1782), टीपू ने जारी रखा।
तृतीय (1790-92) कॉर्नवॉलिस श्रीरंगपट्टनम की संधि: टीपू का आधा राज्य छिन गया। “हमने अपने मित्रों को मजबूत किए बिना शत्रु को पंगु बना दिया।”
चतुर्थ (1799) वेलेजली टीपू की मृत्यु: मैसूर सहायक संधि स्वीकार। वाडियार वंश पुनर्स्थापित।

C. आंग्ल-मराठा संघर्ष (Anglo-Maratha)

मराठा संघ (Confederacy): पेशवा (पुणे), भोंसले (नागपुर), सिंधिया (ग्वालियर), होल्कर (इंदौर), गायकवाड़ (बड़ौदा)।

युद्ध का क्रम

  • प्रथम युद्ध (1775-82): सूरत की संधि से शुरू। सालबाई की संधि (1782) से समाप्त। 20 साल शांति रही।
  • द्वितीय युद्ध (1803-05): बेसिन की संधि (1802) – पेशवा बाजीराव II ने सहायक संधि स्वीकार की। सिंधिया और भोंसले ने चुनौती दी।
  • तृतीय युद्ध (1817-18): पिंडारियों का दमन मुद्दा बना। पेशवा पद समाप्त। मराठा संघ भंग।

D. पंजाब और सिख राज्य

  • महाराजा रणजीत सिंह (1792-1839): सुकरचकिया मिसल। अमृतसर की संधि (1809) अंग्रेजों के साथ (सतलुज सीमा बनी)।
  • प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध (1845-46): लाहौर की संधि।
  • द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध (1848-49): लॉर्ड डलहौजी ने पंजाब का विलय किया। कोहिनूर हीरा महारानी विक्टोरिया को भेजा गया।

Dalhousie’s Policy: व्यपगत का सिद्धांत (Doctrine of Lapse)

  • यदि राजा का प्राकृतिक उत्तराधिकारी नहीं है, तो गोद लिया बेटा वारिस नहीं होगा।
  • विलय किए गए राज्य: सतारा (1848 – प्रथम), जैतपुर, संबलपुर, बघाट, उदयपुर, झाँसी (1853), नागपुर (1854)।
  • अवध (1856): ‘कुशासन’ (Maladministration) के आरोप पर विलय (आउट्रम रिपोर्ट)।

Unit 3: औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था

1. भू-राजस्व प्रणालियाँ (Land Revenue)

स्थायी बंदोबस्त (Zamindari) – 1793

  • लॉर्ड कॉर्नवॉलिस। क्षेत्र: बंगाल, बिहार, उड़ीसा, बनारस (19% भारत)।
  • ज़मींदार को भूमि का मालिक माना गया। लगान निश्चित (Fixed)।
  • कंपनी = 10/11, ज़मींदार = 1/11। सूर्यास्त कानून (Sunset Law) लागू।

रैयतवाड़ी (Ryotwari) – 1820

  • मुनरो और रीड। क्षेत्र: मद्रास, बॉम्बे, असम (51% – सर्वाधिक)।
  • किसान (रैयत) सीधे सरकार को कर देगा। बिचौलिए नहीं।
  • कर की दर बहुत ऊँची थी (33% से 55%)।

महालवाड़ी (Mahalwari) – 1822

  • होल्ट मैकेंजी। क्षेत्र: प. यूपी, पंजाब, मध्य प्रांत (30%)।
  • कर इकाई: पूरा गाँव (महाल)। मुखिया वसूली करता था।

2. कृषि का वाणिज्यीकरण (Commercialization)

खाद्यान्न की जगह नकदी फसलों (नील, कपास, जूट, चाय) पर जोर।
परिणाम: अकाल की बारंबारता बढ़ी, किसान कर्ज में डूबा।

3. विऔद्योगीकरण (De-industrialization)

  • भारतीय हस्तशिल्प का पतन। 1813 के चार्टर से ‘एकतरफा मुक्त व्यापार’।
  • भारत ‘कच्चे माल का निर्यातक’ और ‘तैयार माल का आयातक’ बन गया।

4. आधुनिक उद्योग & रेलवे

  • रेलवे (1853): डलहौजी के समय (बॉम्बे से ठाणे)। उद्देश्य: कच्चा माल बंदरगाह तक लाना और सेना भेजना।
  • पहली जूट मिल: 1855 (रिशरा, बंगाल)। पहली कॉटन मिल: 1853 (बॉम्बे)।

धन का निष्कासन (Drain of Wealth):
दादाभाई नौरोजी (Grand Old Man of India) ने ‘Poverty and Un-British Rule in India’ में सिद्धांत दिया।
घटक: गृह प्रभार (Home Charges), वेतन, पेंशन, लाभांश।


Unit 4: 1857 का विद्रोह

प्रतीक: कमल और रोटी। गवर्नर जनरल: कैनिंग।

विद्रोह के कारण

  • राजनीतिक: डलहौजी की हड़प नीति, मुगलों का अपमान, अवध का विलय।
  • सैनिक: ‘सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम’ (समुद्र पार जाना), वेतन में भेदभाव, दाढ़ी-पगड़ी पर रोक।
  • धार्मिक: 1850 का ‘लेक्स लोकी एक्ट’ (धर्म परिवर्तन करने पर ही पैतृक संपत्ति मिलेगी)।
  • तात्कालिक: एनफील्ड राइफल (चर्बी वाला कारतूस)।

घटनाक्रम

  • मंगल पांडे: 29 मार्च 1857 (बैरकपुर, बंगाल) – सार्जेंट ह्यूसन को गोली मारी।
  • शुरुआत: 10 मई 1857 (मेरठ)। सैनिकों ने ‘दिल्ली चलो’ का नारा दिया।
केंद्र भारतीय नेतृत्व दमनकर्ता
दिल्ली बहादुर शाह II (सांकेतिक), बख्त खान निकोलसन (मारा गया), हडसन
लखनऊ बेगम हजरत महल कैम्पबेल
कानपुर नाना साहेब (धोंदू पंत), तात्या टोपे कैम्पबेल
झाँसी रानी लक्ष्मीबाई (गंगाधर राव की विधवा) ह्यूरोज
बिहार (जगदीशपुर) कुंवर सिंह (80 वर्षीय जमींदार) विलियम टेलर
फैजाबाद मौलवी अहमदुल्लाह (जिहाद का नारा) रेनार्ड

असफलता के कारण

  • सीमित क्षेत्र (दक्षिण भारत, पंजाब अछूता रहा)।
  • संगठन और केंद्रीय नेतृत्व का अभाव।
  • शिक्षित वर्ग और जमींदारों की उदासीनता।

Prelims Fact: विद्रोह पर पुस्तकें

  • The First Indian War of Independence – वी.डी. सावरकर
  • The Sepoy Mutiny and the Rebellion of 1857 – आर.सी. मजूमदार (“न प्रथम, न राष्ट्रीय, न स्वतंत्रता संग्राम”)
  • 1857 – एस.एन. सेन (सरकारी इतिहासकार)

Unit 5: सुधार आंदोलन

A. हिंदू सुधार आंदोलन

संस्था संस्थापक & तथ्य
आत्मीय सभा (1815)
ब्रह्म समाज (1828)
राजा राम मोहन राय
• सती प्रथा (1829), बहुविवाद विरोध।
• एकेश्वरवाद (Gift to Monotheists पुस्तक)।
संवाद कौमुदी (बंगाली), मिरात-उल-अखबार (फारसी)।
तत्वबोधिनी सभा (1839) देवेंद्रनाथ टैगोर। राजा राममोहन राय के विचारों का प्रचार।
प्रार्थना समाज (1867) आत्माराम पांडुरंग (बम्बई)। एम.जी. रानाडे जुड़े। विधवा विवाह और स्त्री शिक्षा पर जोर।
आर्य समाज (1875) दयानंद सरस्वती
• नारा: “वेदों की ओर लौटो”।
• शुद्धि आंदोलन (हिंदू धर्म में वापसी)।
सत्यार्थ प्रकाश पुस्तक। गौरक्षा आंदोलन।
रामकृष्ण मिशन (1897) स्वामी विवेकानंद
• 1893 शिकागो विश्व धर्म संसद।
• नव-हिंदूवाद (Neo-Hinduism)। “दरिद्र नारायण” की सेवा।
थियोसोफिकल सोसायटी मैडम ब्लवात्सकी & कर्नल ऑलकॉट। भारत में एनी बेसेंट (अड्यार, मद्रास) ने लोकप्रिय बनाया।
यंग बंगाल (1826) हेनरी विवियन डेरोजियो। फ्रांसीसी क्रांति से प्रभावित। अति-उग्रवादी।

B. मुस्लिम सुधार

  • अलीगढ़ आंदोलन: सर सैयद अहमद खान। आधुनिक शिक्षा और अंग्रेजी पर जोर। 1875 में एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज (बाद में AMU) की स्थापना। पत्रिका: तहजीब-उल-अखलाक
  • देवबंद आंदोलन (1866): रूढ़िवादी/पुनरुत्थानवादी। रशीद अहमद गंगोही और कासिम नानौतवी। कांग्रेस का समर्थन किया।

C. जाति विरोधी / दलित सुधार

  • सत्यशोधक समाज (1873): ज्योतिबा फुले (पुणे)। पुस्तक: गुलामगिरी
  • आत्म-सम्मान आंदोलन (1920s): ई.वी. रामास्वामी नायकर (पेरियार)। तमिलनाडु।
  • श्री नारायण धर्म परिपालन (SNDP): केरल। “एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर” (नारायण गुरु)।
  • अंबेडकर: बहिष्कृत हितकारिणी सभा (1924), ऑल इंडिया डिप्रेस्ड क्लास फेडरेशन।

Unit 6: राष्ट्रवाद & कांग्रेस (1885-1905)

कांग्रेस से पूर्व संस्थाएं (Pre-Congress Associations)

  • लैंडहोल्डर्स सोसायटी (1838) – द्वारकानाथ टैगोर (पहली राजनीतिक संस्था)।
  • इंडियन एसोसिएशन (1876) – सुरेंद्रनाथ बनर्जी और आनंद मोहन बोस (सिविल सेवा आयु मुद्दे पर)।
  • पूना सार्वजनिक सभा (1870) – एम.जी. रानाडे।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) – 1885

  • संस्थापक: ए.ओ. ह्यूम (A.O. Hume)।
  • स्थान: गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज, बॉम्बे।
  • प्रथम अध्यक्ष: व्योमेश चंद्र बनर्जी (72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया)।
  • सिद्धांत: लाला लाजपत राय ने ‘सेफ्टी वॉल्व’ (Safety Valve) सिद्धांत दिया।

उदारवादी चरण (Moderates) 1885-1905

  • नेता: दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता, गोखले, एस.एन. बनर्जी, दिनशा वाचा।
  • उद्देश्य: औपनिवेशिक शासन में सुधार, सिविल सेवा का भारतीयकरण।
  • तरीका: 3P (Prayer, Petition, Protest) – संवैधानिक दायरे में।
  • उपलब्धि: 1892 का काउंसिल एक्ट, धन के निष्कासन सिद्धांत का प्रचार।

बंगाल विभाजन (Partition of Bengal – 1905)

  • घोषणा: लॉर्ड कर्जन (जुलाई 1905)। लागू: 16 अक्टूबर 1905 (शोक दिवस)।
  • कारण: बताया गया ‘प्रशासनिक’, असली कारण ‘हिंदू-मुस्लिम विभाजन’।

स्वदेशी आंदोलन (1905-08)

  • बनारस अधिवेशन (1905, गोखले) में समर्थन मिला।
  • विदेशी वस्तुओं की होली जलाई गई। ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रीय गीत बना।
  • शिक्षा: नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन (NCE) की स्थापना।
  • अंत: 1907 में कांग्रेस का सूरत विभाजन और 1908 में तिलक की गिरफ्तारी।

Unit 7: उग्रवाद और क्रांतिकारी (Phase I)

उग्रवादी चरण (Extremists)

नेता: लाल-बाल-पाल (लाजपत राय, तिलक, बिपिन चंद्र पाल) और अरबिंदो घोष。
विचारधारा: “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।” – तिलक。
तरीका: निष्क्रिय प्रतिरोध (Passive Resistance), बहिष्कार, राष्ट्रीय शिक्षा。

Important Events

  • सूरत विभाजन (1907): रासबिहारी घोष अध्यक्ष बने। नरम दल और गरम दल अलग हुए।
  • मुस्लिम लीग (1906): ढाका में नवाब सलीमुल्लाह और आगा खान द्वारा।
  • मार्ले-मिंटो सुधार (1909): मुस्लिमों को ‘पृथक निर्वाचक मंडल’ (Separate Electorate) मिला।

क्रांतिकारी आतंकवाद (Phase I)

जब खुले आंदोलन बंद हो गए, तो युवाओं ने भूमिगत होकर हथियार उठाए।

1. बंगाल

  • अनुशीलन समिति: प्रथम गुप्त संस्था। वरिंद्र घोष और भूपेंद्र दत्त।
  • अलीपुर षड्यंत्र (1908): खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी ने मुजफ्फरपुर के जज किंग्सफोर्ड पर बम फेंका। खुदीराम को फाँसी (सबसे कम उम्र)।

2. महाराष्ट्र

  • अभिनव भारत (1904): वी.डी. सावरकर (नासिक)।
  • नासिक षड्यंत्र: जैक्सन की हत्या (अनंत लक्ष्मण कान्हेरे)।

3. पंजाब

  • अजीत सिंह (पगड़ी संभाल जट्टा), लाला लाजपत राय।
  • दिल्ली षड्यंत्र (1912): रासबिहारी बोस ने वायसराय हार्डिंग पर बम फेंका (चांदनी चौक)।

4. विदेश में

  • गदर पार्टी (1913): सैन फ्रांसिस्को (USA)। लाला हरदयाल और सोहन सिंह भाकना। अखबार: ‘गदर’।
  • कामागाटामारू प्रकरण (1914): कनाडा जाने वाला जापानी जहाज जिसे वापस लौटा दिया गया। बजबज (कलकत्ता) में फायरिंग हुई।

Unit 8: गांधी युग (1915-1922)

आगमन: 9 जनवरी 1915 (दक्षिण अफ्रीका से)। साबरमती आश्रम की स्थापना。
गुरु: गोपाल कृष्ण गोखले。

प्रारंभिक सत्याग्रह (प्रयोगशाला)

  1. चंपारण (1917, बिहार): राजकुमार शुक्ल के बुलावे पर। तिनकठिया पद्धति (3/20 भाग पर नील) समाप्त करवाई। (प्रथम सविनय अवज्ञा)।
  2. अहमदाबाद मिल हड़ताल (1918): प्लेग बोनस (35% वृद्धि) दिलवाया। (प्रथम भूख हड़ताल)।
  3. खेड़ा सत्याग्रह (1918, गुजरात): फसल बर्बाद होने पर राजस्व माफी। सरदार पटेल साथ आए। (प्रथम असहयोग)।

रॉलेट एक्ट (1919)

“बिना वकील, बिना अपील, बिना दलील” का काला कानून। शक के आधार पर गिरफ्तारी।

जलियांवाला बाग (13 अप्रैल 1919)

  • डॉ. सैफुद्दीन किचलू और सत्यपाल की गिरफ्तारी के विरोध में अमृतसर में सभा।
  • जनरल डायर ने गोली चलवाई। 1000+ मरे।
  • उधम सिंह ने 1940 में लंदन जाकर डायर (माइकल ओ डायर) को मारा।

असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation) 1920-22

  • कारण: जलियांवाला बाग, रोलेट एक्ट, खिलाफत मुद्दा।
  • नागपुर अधिवेशन (1920): कांग्रेस ने अहिंसक असहयोग का प्रस्ताव पास किया।
  • विशेषता: हिंदू-मुस्लिम एकता (गांधीजी खिलाफत कमेटी के अध्यक्ष थे)। शिक्षण संस्थाओं और न्यायालयों का बहिष्कार।
  • वापसी: 5 फरवरी 1922 (चौरी-चौरा) – उग्र भीड़ ने पुलिस स्टेशन जलाया। गांधीजी ने आंदोलन वापस लिया (“हिमालय जैसी भूल”)।

स्वराज पार्टी (1923)

आंदोलन वापसी से नाराज सी.आर. दास और मोतीलाल नेहरू ने बनाई。
उद्देश्य: काउंसिल में प्रवेश कर सरकार के काम में अड़ंगा डालना (Pro-changers)。


Unit 9: सविनय अवज्ञा से भारत छोड़ो

साइमन कमीशन (1927)

  • 1919 एक्ट की समीक्षा हेतु। सभी 7 सदस्य श्वेत।
  • विरोध: “साइमन गो बैक”। लाहौर में लाठीचार्ज में लाला लाजपत राय की मृत्यु (“मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश ताबूत की कील साबित होगी”)।
  • नेहरू रिपोर्ट (1928): मोतीलाल नेहरू द्वारा पहला संविधान मसौदा (डोमिनियन स्टेटस की मांग)।

पूर्ण स्वराज (1929 लाहौर अधिवेशन)

अध्यक्ष: जवाहरलाल नेहरू। रावी तट पर तिरंगा फहराया। 26 जनवरी 1930 को प्रथम स्वतंत्रता दिवस मनाने की घोषणा।

सविनय अवज्ञा आंदोलन (CDM) – 1930

  • दांडी मार्च: 12 मार्च – 6 अप्रैल 1930। साबरमती से दांडी (385 किमी)। 78 अनुयायी।
  • नमक कानून तोड़ा। महिलाओं की भागीदारी (सरोजिनी नायडू – दर्शना साल्ट वर्क्स)।
  • पेशावर में गढ़वाल राइफल्स (चंद्र सिंह गढ़वाली) ने निहत्थों पर गोली चलाने से मना किया।

गोलमेज सम्मेलन (Round Table Conferences)

  • प्रथम (1930): कांग्रेस ने बहिष्कार किया।
  • गांधी-इरविन पैक्ट (1931): ‘दिल्ली समझौता’। गांधीजी दूसरे सम्मेलन के लिए राजी। सविनय अवज्ञा स्थगित।
  • द्वितीय (1931): गांधीजी लंदन गए (SS राजपूताना जहाज)। सांप्रदायिक मुद्दे पर विफलता।
  • सांप्रदायिक पंचाट (1932): रेमजे मैकडोनाल्ड ने दलितों को ‘पृथक निर्वाचन’ दिया।
  • पूना पैक्ट (1932): गांधी (यरवदा जेल) और अंबेडकर के बीच। पृथक निर्वाचन त्यागा, आरक्षण बढ़ा।

प्रांतीय चुनाव (1937)

1935 एक्ट के तहत। कांग्रेस ने 11 में से 8 प्रांतों में सरकार बनाई। 28 महीने शासन किया। 1939 में युद्ध (WWII) में भारत को शामिल करने के विरोध में इस्तीफा।


क्रांतिकारी चरण-II (Socialist Era)

  • HRA (1924): कानपुर। शचींद्र सान्याल, रामप्रसाद बिस्मिल。
    काकोरी कांड (1925): ट्रेन डकैती। बिस्मिल, अशफाक उल्ला, रोशन सिंह, राजेंद्र लाहिड़ी को फाँसी।
  • HSRA (1928): फिरोजशाह कोटला (दिल्ली)। चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह। समाजवाद अपनाया。
    सांडर्स हत्या (1928): लालाजी की मौत का बदला。
    संसद बम कांड (1929): भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त (“बहरो को सुनाने के लिए धमाके की जरूरत है”)।
  • फाँसी: 23 मार्च 1931 (भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव)।
  • चटगांव शस्त्रागार (1930): मास्टर दा (सूर्य सेन)। महिलाओं (प्रीतिलता, कल्पना दत्त) की भागीदारी।

भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India) – 1942

  • पृष्ठभूमि: क्रिप्स मिशन (1942) की विफलता। जापानी आक्रमण का खतरा।
  • प्रस्ताव: 8 अगस्त 1942, बॉम्बे (ग्वालिया टैंक)। गांधीजी का नारा: “करो या मरो” (Do or Die)。
  • दमन: ‘ऑपरेशन जीरो आवर’ – 9 अगस्त की सुबह सभी नेता गिरफ्तार।
  • नेतृत्व: अरुणा आसफ अली (झंडा फहराया), उषा मेहता (रेडियो)। जयप्रकाश नारायण (हजारीबाग जेल से भागे)।
  • समानांतर सरकारें: बलिया (चित्तू पांडेय), तामलुक (जातीय सरकार), सतारा (प्रति सरकार – नाना पाटिल)।

Unit 10: विभाजन और स्वतंत्रता

आजाद हिंद फौज (INA)

  • विचार: कैप्टन मोहन सिंह। गठन: रासबिहारी बोस।
  • पुनर्गठन: सुभाष चंद्र बोस (1943, सिंगापुर)। “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा”।
  • ब्रिगेड: गांधी, नेहरू, आजाद, झांसी रानी (लक्ष्मी सहगल)।
  • लाल किला मुकदमा (1945): सहगल, ढिल्लों, शाहनवाज पर। बचाव वकील: भूलाभाई देसाई।

स्वतंत्रता की ओर (1945-47)

  1. नौसेना विद्रोह (Feb 1946): बॉम्बे में INS तलवार के सैनिकों ने हड़ताल की। पटेल के समझाने पर समर्पण।
  2. कैबिनेट मिशन (1946): पैथिक लॉरेंस, क्रिप्स, एलेक्जेंडर。
    • पाकिस्तान की मांग खारिज。
    • संविधान सभा का गठन। (अंतरिम सरकार: 2 Sep 1946)।
  3. प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस (16 Aug 1946): जिन्ना का आह्वान। कलकत्ता में भीषण दंगे (Great Calcutta Killings)।
  4. एटली की घोषणा (Feb 1947): जून 1948 तक अंग्रेज भारत छोड़ देंगे।
  5. माउंटबेटन योजना (3 जून 1947): भारत का विभाजन और सत्ता हस्तांतरण।

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947

  • 15 अगस्त 1947 को दो डोमिनियन (भारत, पाकिस्तान)।
  • रेडक्लिफ आयोग सीमा तय करेगा।
  • 562 रियासतों को भारत या पाकिस्तान में मिलने की छूट। (पटेल ने एकीकरण किया – ऑपरेशन पोलो हैदराबाद के लिए, इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन कश्मीर के लिए)।

Unit 11: संवैधानिक विकास (Acts)

Act Key Provisions (UPSC Prelims)
Regulating Act 1773 • बंगाल का गवर्नर → ‘गवर्नर जनरल ऑफ बंगाल’ (वारेन हेस्टिंग्स)।
• कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट (1774)।
Pitt’s India Act 1784 • द्वैध शासन: कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स (व्यापार) + बोर्ड ऑफ कंट्रोल (राजनीति)।
Charter Act 1813 • शिक्षा पर 1 लाख रु.
• कंपनी का व्यापार एकाधिकार समाप्त (चाय और चीन को छोड़कर)।
Charter Act 1833 • बंगाल का G.G → ‘भारत का गवर्नर जनरल’ (बेंटिक)।
• व्यापार एकाधिकार पूर्णतः समाप्त। विधि आयोग (मैकाले)।
GOI Act 1858 • कंपनी शासन अंत। वायसराय पद (कैनिंग)। भारत सचिव (SoS) लंदन में।
Council Act 1861 • पोर्टफोलियो प्रणाली। अध्यादेश जारी करने की शक्ति।
Council Act 1892 • अप्रत्यक्ष चुनाव। बजट पर बहस का अधिकार (पूरक प्रश्न नहीं)।
Morley-Minto 1909 • मुस्लिमों को पृथक निर्वाचन। वायसराय की कार्यकारिणी में भारतीय (S.P. सिन्हा)।
Montagu-Chelmsford 1919 • प्रांतों में द्वैध शासन (Dyarchy) – आरक्षित/हस्तांतरित विषय。
• द्विसदनीय विधायिका केंद्र में। महिलाओं को वोट का अधिकार।
GOI Act 1935 • अखिल भारतीय संघ (लागू नहीं हुआ)।
• प्रांतों में स्वायत्तता (द्वैध शासन समाप्त)। केंद्र में द्वैध शासन。
• RBI, संघीय न्यायालय की स्थापना।

Unit 12: प्रमुख गवर्नर जनरल/वायसराय

वारेन हेस्टिंग्स (1773-85)

– घेरे की नीति (Ring Fence)。
– गीता का अनुवाद (विल्किंस)。

कॉर्नवॉलिस (1786-93)

– सिविल सेवा का जनक。
– स्थायी बंदोबस्त。

वेलेजली (1798-1805)

– सहायक संधि (Subsidiary Alliance)。
– फोर्ट विलियम कॉलेज。

विलियम बेंटिक (1828-35)

– सती प्रथा अंत。
– अंग्रेजी शिक्षा (मैकाले मिनट)。

डलहौजी (1848-56)

– रेल, तार, पोस्ट。
– हड़प नीति। विधवा विवाह एक्ट。

कैनिंग (1856-62)

– 1857 विद्रोह。
– प्रथम वायसराय। IPC लागू。

लिटन (1876-80)

– वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट。
– आर्म्स एक्ट। (प्रतिक्रियावादी)。

रिपन (1880-84)

– स्थानीय स्वशासन का जनक。
– इल्बर्ट बिल विवाद। (उदारवादी)。

कर्जन (1899-1905)

– बंगाल विभाजन。
– विश्वविद्यालय आयोग。

इरविन (1926-31)

– साइमन कमीशन。
– गांधी-इरविन समझौता。

लिनलिथगो (1936-44)

– क्रिप्स मिशन。
– भारत छोड़ो आंदोलन। (सबसे लंबा कार्यकाल)。

माउंटबेटन (1947)

– अंतिम वायसराय。
– भारत विभाजन。


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Manikant kumar Yadav
Manikant kumar Yadav

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